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बैंक और Stablecoins: अपनाने की असली शर्तें और बाधाएं

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बैंक और Stablecoins: अपनाने की असली शर्तें और बाधाएं
बैंक और Stablecoins: अपनाने की असली शर्तें और बाधाएं

Visa की Stablecoins Advisory Practice से आसान होगा स्टेबलकॉइन पेमेंट 


दुनिया की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी Visa ने 15 दिसंबर 2025 को अपनी नई Stablecoins Advisory Practice लॉन्च की है। यह नई पहल Visa Consulting & Analytics (VCA) के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य बैंकों, फिनटेक कंपनियों, ट्रेडर्स और बड़े बिजनेस को स्टेबलकॉइन बेस्ड पेमेंट सिस्टम अपनाने में सही दिशा और सलाह देना है। Visa ने इस जानकारी की पुष्टि अपनी ऑफिशियल प्रेस रिलीज़ में की है, जिससे यह घोषणा पूरी तरह भरोसेमंद और सर्टिफाइड मानी जा रही है। 


Source: यह इमेज Crypto India की X पोस्ट से ली गई है जिसकी लिंक यहां दी गई है। 


Stablecoin Payments क्यों बन रहे हैं ज़रूरी


स्टेबलकॉइन अब केवल क्रिप्टो एक्सपेरिमेंट नहीं रहे। Stablecoin का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, खासकर इंटरनेशनल पेमेंट में।


मुख्य कारण:


  1. ग्लोबल Stablecoin Market Cap 250 बिलियन डॉलर से ऊपर होना।

  2. Visa के Stablecoin Settlement Volume का 3.5 बिलियन डॉलर के Annual Run Rate तक पहुंचना।

  3. Cross-Border Payments में तेज़ी और कम कॉस्ट का होना। 

  4. Stablecoins Advisory Practice से बैंकिंग सिस्टम पर जो निर्भरता है वो कम हो जाएगी।


Visa का मानना है कि स्टेबलकॉइन पेमेंट्स फ्यूचर के पेमेंट सिस्टम का अहम हिस्सा बन सकते हैं। हाल ही में भारत में Sovereign-Backed मॉडल पर आधारित ARC Stablecoin लॉन्च किया गया है। Polygon ने बेंगलुरु की फिनटेक कंपनी Anq के साथ पार्टनरशिप में भारत का पहला ARC Stablecoin लॉन्च किया है। यह स्टेबलकॉइन पूरी तरह से भारत सरकार की सिक्योरिटीज और ट्रेज़री बिल्स से सपोर्टेड है और इसे 1:1 के अनुपात में बैक किया गया है, जिससे इसकी वैल्यू स्थिर और भरोसेमंद बनी रहती है।


Visa Consulting & Analytics की भूमिका


Visa Consulting & Analytics इस नई सलाहकारी पहल का मुख्य आधार है। VCA बैंकों और कंपनियों को यह समझने में मदद करता है कि स्टेबलकॉइन टेक्नोलॉजी उनके बिजनेस मॉडल, ग्राहक जरूरतों और रेगुलेटरी स्ट्रक्चर में कैसे फिट हो सकती है।


Visa के Global Head of VCA, Carl Rutstein के अनुसार, आज के डिजिटल पेमेंट के समय में एक स्पष्ट और सोच-समझकर बनाई गई Stablecoin Strategy बेहद जरूरी हो गई है। Visa का अनुभव और डेटा-ड्रिवन अप्रोच क्लाइंट्स को तेज़ी से बदलते पेमेंट लैंडस्केप में सही फैसले लेने में मदद करता है। 


Stablecoins Advisory Practice की सर्विसेज 


इस नई Consulting Services के तहत वीज़ा कई तरह की सुविधाएं दे रहा है:


  • Stablecoin Training और Market Trend Programs

  • Visa University के ज़रिए विशेष कोर्स

  • Stablecoin Strategy Development

  • Market Entry और Go-To-Market Planning

  • Use Case Sizing और Business Analysis

  • Stablecoin Integration के लिए Technical Support


वीज़ा के अनुसार, Stablecoins Advisory Practice पहले ही 20 से ज्यादा ग्लोबल क्लाइंट एंगेजमेंट पूरे कर चुकी है।


Stablecoin उपयोग के प्रमुख क्षेत्र


Stablecoins का उपयोग खास तौर पर Cross-Border Payments, Business-To-Business Transactions, Remittances, Global Payroll और Creator Economy Payouts में तेजी से बढ़ रहा है। इन मामलों में स्टेबलकॉइन ट्रडिशनल बैंकिंग सिस्टम की तुलना में ज्यादा फ़ास्ट, ट्रांसपेरेंट और एक अच्छा ऑप्शन बनकर उभर रहे हैं।


Visa की बड़ी Stablecoin स्ट्रेटेजी 


Stablecoins Advisory Practice, वीज़ा की पहले से चल रही डिजिटल करेंसी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है।


Visa की मौजूदा उपलब्धियां:


  • USDC के साथ Stablecoin Settlement Pilot

  • 40+ देशों में 130 से ज्यादा Stablecoin-Linked Card Programs

  • Visa Direct के ज़रिए Stablecoin Payouts के पायलट

  • USDC, PYUSD, USDG, और EURC का सपोर्ट


Visa CEO Ryan McInerney ने Stablecoins को “Next-Generation Settlement Infrastructure” बताया है।


शुरुआती क्लाइंट्स का एक्सपीरियंस 


Navy Federal Credit Union, Pathward और VyStar Credit Union ने Visa की इस एडवाइजरी सर्विस के साथ काम किया है। Navy Federal का मानना है कि स्टेबलकॉइन पेमेंट्स तेज़ होते हैं और इनमें खर्च भी कम आता है। Pathward को वीज़ा की टीम से आसान और साफ़ दिशा-निर्देश मिले, जिससे आगे बढ़ने की योजना समझना आसान हुआ। वहीं VyStar ने Visa की बड़ी पहुँच और क्रिप्टो में अनुभव को इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत बताया है।


मेरे 7 साल के क्रिप्टो और डिजिटल पेमेंट्स अनुभव के अनुसार, Visa की Stablecoins Advisory Practice एक टर्निंग पॉइंट है। अब तक स्टेबलकॉइन टेक्नोलॉजी और ट्रेडिशनल बैंकिंग के बीच जो गैप था, उसे Visa जैसे आर्गेनाइजेशन तेजी से खत्म कर रहे हैं। यह पहल स्टेबलकॉइन को मेनस्ट्रीम पेमेंट सिस्टम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। 


कन्क्लूजन 


Visa की Stablecoins Advisory Practice यह दिखाती है कि अब बैंकिंग और ब्लॉकचेन पेमेंट्स एक-दूसरे के और करीब आ रहे हैं। स्टेबलकॉइन अब सिर्फ नया प्रयोग नहीं रहे, बल्कि डेली पेमेंट्स का ऑप्शन बनते जा रहे हैं। Visa जैसे भरोसेमंद नाम के पार्टिसिपेशन से साफ है कि यह टेक्नोलॉजी भविष्य की ज़रूरत बन सकती है। आने वाले समय में स्टेबलकॉइन पेमेंट्स तेज़, आसान और भरोसेमंद ग्लोबल पेमेंट्स सिस्टम का अहम हिस्सा बन सकते हैं।


डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी Visa की ऑफिशियल प्रेस रिलीज़ और पब्लिक सोर्सेज पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की फाइनेंशियल, निवेश या कानूनी सलाह नहीं है। किसी भी डिसीजन से पहले अपनी रिसर्च अवश्य करें।

लेखक परिचय
Akansha Vyas Hindi News Writer
आकांक्षा व्यास एक स्किल्ड क्रिप्टो राइटर हैं, जिनके पास 7 वर्षों का अनुभव है और वे ब्लॉकचेन और Web3 के कॉम्पलेक्स टॉपिक्स को सरल और समझने योग्य बनाने में एक्सपर्ट हैं। वे डीप रिसर्च के साथ आर्टिकल्स, ब्लॉग और न्यूज़ लिखती हैं, जिनमें SEO पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि रीडर्स का जुड़ाव बढ़ सके। आकांक्षा की राइटिंग क्रिएटिव एक्सप्रेशन और एनालिटिकल अप्रोच का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो रीडर्स को जटिल विषयों को स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। क्रिप्टो स्पेस के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें इस उद्योग में एक अच्छे राइटर के रूप में स्थापित कर रही है। अपने कंटेंट के माध्यम से, उनका उद्देश्य रीडर्स को क्रिप्टो की तेजी से बदलती दुनिया में गाइड करना है।
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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

सट्टे के लिए नहीं, settlement के लिए — पैसे को तेज, 24x7 और कम मध्यस्थों के साथ पहुंचाना।

Reserve/issuer-जोखिम, custody की नई क्षमताएं, अनुपालना (AML/KYC/निगरानी), और लेखा व पूंजी-treatment।

लेखा/पूंजी-treatment — क्योंकि प्रतिकूल treatment किसी भी उपयोग को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना देता है।

उत्पाद नहीं, अपनाने की प्रक्रिया — यानी इन चार चिंताओं को हल करने में मदद।

सीमित pilot (एक corridor, कुछ ग्राहक), विस्तार (नियामकीय स्पष्टता के बाद), और production (जहां ग्राहक-मांग, लागत-लाभ और अनुपालना तीनों मिलें)।

यह विफलता नहीं, बैंकिंग की सामान्य गति है — जोखिम-ढांचे और नियामकीय मंजूरी में समय लगता है।

यह किस चरण की है, कितने ग्राहकों/corridors के लिए है, और क्या कोई नियामक शामिल है।

'Stablecoin' के रूप में नहीं, बल्कि तेज और सस्ते हस्तांतरण के रूप में — जैसे आज कोई UPI के पीछे की settlement-व्यवस्था नहीं देखता।

नहीं — बैंक विनियमित, पूर्ण-समर्थित instruments चुनते हैं, और चयन reserves/अनुपालना पर आधारित होता है, बाजार-लोकप्रियता पर नहीं।

संस्थागत अपनाना मानक बनाता है (attestation, custody, रिपोर्टिंग), और उन मानकों का लाभ अंततः retail उपयोगकर्ता को भी मिलता है।

सीमा-पार — remittance और निर्यात-भुगतान, जहां लागत और समय की समस्या वास्तविक है।

सीमित — नियामकीय ढांचे और UPI की मौजूदगी, दोनों कारणों से।

नहीं — issuer, reserve और नियामकीय जोखिम यथावत रहते हैं; भागीदारी केवल प्रक्रिया और मानक जोड़ती है।

यह उन कुछ दिशाओं में है जहां तकनीक का उपयोग सट्टे से नहीं, बुनियादी ढांचे से जुड़ा है।

Pilot का दायरा, नियामक की भागीदारी, लेखा/पूंजी-treatment पर स्पष्टता, और कोई production-स्तर की घोषणा।