Aam Aadmi Party (AAP) के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने भारत के डिजिटल भविष्य से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने देश में एक अलग और स्पष्ट Tokenization Law बनाने की मांग की है, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन, डेटा सिक्यूरिटी और मॉडर्न फाइनेंशियल सिस्टम को कानूनी मजबूती मिल सके।

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इससे पहले Raghav Chadha द ग्रोथ मल्टीप्लायर फिनफेस्ट 2025 में भी इसी तरह की बात कह चुके हैं, उनके अनुसार जिस तरह से भारत तेजी से डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल एसेट्स की ओर बढ़ रहा है, उसी प्रकार से कानूनों का अपडेट होना भी ज़रूरी है।
किसी एसेट के Tokenization का मतलब होता है किसी Real World Asset (जैसे Real Estate, Gold, Artwork, Shares आदि) को Blockchain पर Digital Token के रूप में रिप्रेजेंट करना।
Physical या Traditional Asset को छोटे-छोटे Digital Tokens में बाँट देना।
Tokenization के फायदे
ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के दौरान आपकी रियल जानकारी सामने नहीं होती।
फ्रॉड, डेटा चोरी और हैकिंग का खतरा काफी कम हो सकता है।
पेमेंट प्रोसेस ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनता है।
यूज़र की फाइनेंसियल और पर्सनल जानकारी की सिक्योर रहती है।
इसी वजह से आज बैंक, फिनटेक कंपनियाँ और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस टेक्नोलॉजी पर भरोसा करते हैं, ताकि यूज़र्स की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
यह तकनीक भारत की $5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य में बड़ा योगदान दे सकती है:
निवेश बढ़ावा- रूरल एसेट्स जैसे फार्मलैंड या कमोडिटी को टोकनाइज करके ₹50,000 करोड़ का अनटैप्ड कैपिटल अनलॉक हो सकता है।
जॉब क्रिएशन- फिनटेक और ब्लॉकचेन सेक्टर में लाखों नई नौकरियां क्रिएट हो सकती हैं।
क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड- UPI जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इंटीग्रेशन से एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।
इनोवेशन- MSMEs और Startups को आसानी से फंडिंग मिलेगी।
फिलहाल भारत में टोकनाइज़ेशन और Digital Assets को लेकर कोई अलग से खास कानून नहीं बना है। अभी यह तकनीक कुछ मौजूदा नियमों के तहत ही आती है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act)- यह कानून ऑनलाइन डेटा और साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों को देखता है।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट- इसका मकसद लोगों के निजी डेटा की सुरक्षा करना है।
RBI के दिशा-निर्देश- RBI समय-समय पर Digital Payment और Banking System से जुड़े नियम जारी करता है।
CryptoHindiNews के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी के कानून पूरी तरह साफ नहीं हैं। ये नियम नई तकनीकों को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं।
इसके साथ ही, इनमें Digital Assets और Token Based System को अलग से ठीक तरह से समझाया या डिफाइन नहीं किया गया है, जिस वजह से लोगों में भ्रम बना रहता है।
दुनिया के कई विकसित देशों ने टोकनाइज़ेशन को समझते हुए इसके लिए साफ और अलग नियम बनाए हैं। जैसे कि
European Union ने डिजिटल एसेट्स के लिए अलग से नियम तय किए हैं, ताकि यूजर्स को सुरक्षा और क्लैरिटी मिल सके।
Singapore फिनटेक और Token आधारित सिस्टम को बढ़ावा दे रहा है, जिससे नई तकनीकें तेजी से आगे बढ़ सकें।
UAE (United Arab Emirates) ने रियल एस्टेट टोकनाइज़ेशन के लिए क्लियर नीति बनाई है, जिससे निवेश आसान और सुरक्षित हो सके।
Raghav Chadha का कहना है कि अगर भारत को भी दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है और ग्लोबल लेवल पर आगे बढ़ना है, तो उसे भी टोकनाइज़ेशन और डिजिटल एसेट्स के लिए ऐसे ही क्लियर और मजबूत नियम बनाने चाहिए।
Tokenization Law भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। Raghav Chadha की मांग यह दिखाती है कि बदलती टेक्नोलॉजी के साथ कानूनों का अपडेट होना भी जरुरी है।
एक अलग टोकनाइज़ेशन कानून से डेटा सुरक्षा, निवेश, इनोवेशन और आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।
डिस्क्लेमर- यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। क्रिप्टो मार्केट काफ़ी वोलेटाइल है, इसलिए निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च ज़रूर करें।
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