Bitcoin की एक बड़ी सीमा है, हर ट्रांजैक्शन पब्लिक रहता है। कोई भी आपका वॉलेट देखकर पूरी लेन-देन हिस्ट्री जान सकता है। Zcash ZEC Token इसी समस्या का हल लेकर आया, यूजर को यह चुनने का अधिकार देता है कि उसकी ट्रांजैक्शन दिखे या छिपी रहे। आइए समझते हैं यह कैसे काम करता है।
Zcash की जड़ें 2013 के Zerocoin प्रपोजल तक जाती हैं, जो Johns Hopkins University में बना था। January 2016 में क्रिप्टोग्राफर Zooko Wilcox ने Electric Coin Company के जरिए इस आइडिया को औपचारिक रूप से Zcash नाम से लॉन्च करने की घोषणा की, और October 2016 में यह नेटवर्क लाइव हो गया।
Zcash की सबसे बड़ी खासियत है इसका दोहरा सिस्टम। t-addresses यानी Transparent एड्रेस बिल्कुल Bitcoin की तरह काम करते हैं, हर लेन-देन पब्लिक दिखता है। वहीं z-addresses यानी Shielded एड्रेस पूरी तरह प्राइवेट होते हैं, इनमें भेजने वाला, पाने वाला और रकम, तीनों छिपे रहते हैं।
Zcash zk-SNARK नाम की एक क्रिप्टोग्राफिक तकनीक इस्तेमाल करता है, जिसे Zero-Knowledge Proof भी कहते हैं। सीधी भाषा में, यह नेटवर्क को यह साबित कर देता है कि ट्रांजैक्शन सही है, बिना यह बताए कि किसने किसे कितना भेजा। यह गणितीय रूप से बेहद जटिल है, लेकिन असर सीधा है, प्राइवेसी और सिक्योरिटी दोनों एक साथ।
Zcash के लॉन्च के समय एक "Trusted Setup Ceremony" हुई थी, जहां छह लोगों ने मिलकर एक प्राइवेट की जनरेट की और फिर उसे हमेशा के लिए नष्ट कर दिया, ताकि कोई भी ZEC को नकली तरीके से न बना सके। April 2022 में यह सामने आया कि Edward Snowden भी इन छह लोगों में से एक थे। उन्होंने बाद में कहा कि यह उन्होंने एक पब्लिक सर्विस के रूप में, प्राइवेसी में विश्वास रखते हुए किया था।
29 May 2026 को एक इंडिपेंडेंट सिक्योरिटी रिसर्चर Taylor Hornby ने Anthropic के Claude Opus 4.8 की मदद से Zcash के Orchard प्राइवेसी पूल में एक गंभीर खामी खोजी, जो अटैकर को बिना किसी सीमा के नकली ZEC बनाने की इजाजत दे सकती थी। डेवलपर्स ने तुरंत एक इमरजेंसी फिक्स तैयार किया, और 3 June 2026 को Zcash Foundation ने इस खामी को सार्वजनिक करते हुए बताया कि नेटवर्क अपग्रेड से समस्या ठीक कर दी गई है। राहत की बात यह रही कि इस खामी का कभी असल में इस्तेमाल नहीं हुआ था।
प्राइवेसी कॉइन होने की वजह से Zcash को कई बार रेगुलेटरी दबाव का सामना करना पड़ा है। November 2020 में ShapeShift ने इसे डीलिस्ट किया था, हालांकि December 2025 में इसे फिर से जोड़ा गया। 2023 में OKX ने भी इसे हटाया था, फिर November 2025 में इसकी कीमत में उछाल के दौरान दोबारा लिस्ट किया। Binance पर अभी भी यह लिस्टेड है, लेकिन कम्युनिटी वोटिंग के जरिए डीलिस्टिंग की चर्चा चलती रहती है।
Zcash जैसे प्राइवेसी कॉइन्स कुछ देशों में रेगुलेटरी जांच के दायरे में आ सकते हैं, इसलिए स्थानीय कानूनों को समझना जरूरी है। इसके अलावा ज्यादातर ZEC सप्लाई अभी भी Transparent Pool में है, यानी पूरी तरह शील्डेड नहीं। किसी भी नए एसेट में पैसा लगाने से पहले उसका इतिहास और मौजूदा एक्सचेंज सपोर्ट जरूर जांचें। ऐसे ही अन्य altcoins की जानकारी के लिए हमारी What is Tether USDT और PAX Gold रिपोर्ट भी पढ़ें। लाइव डेटा के लिए CoinGecko और CoinMarketCap पर उपलब्ध जानकारी देखें।
Zcash ZEC Token क्रिप्टो की दुनिया में प्राइवेसी को लेकर एक अलग सोच पेश करता है, यूजर को चुनने का हक देना कि उसका लेन-देन दिखे या न दिखे। Snowden जैसे नाम का इससे जुड़ना और हाल की सिक्योरिटी खामी, दोनों इसे एक दिलचस्प लेकिन जटिल प्रोजेक्ट बनाते हैं। किसी भी प्राइवेसी कॉइन में निवेश से पहले रेगुलेटरी जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है।
zk-SNARK: बिना जानकारी उजागर किए किसी दावे को सत्य साबित करने वाली क्रिप्टोग्राफिक तकनीक। Shielded Transaction: पूरी तरह छिपी हुई लेन-देन। Trusted Setup Ceremony: नेटवर्क शुरू करने के लिए सुरक्षित तरीके से चाबी बनाने और नष्ट करने की प्रक्रिया। Privacy Coin: लेन-देन को छिपाने की सुविधा देने वाली क्रिप्टोकरेंसी। Sapling Upgrade: 2018 में आया अपग्रेड, जिसने शील्डेड ट्रांजैक्शन को तेज और सस्ता बनाया।
यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं। प्राइवेसी कॉइन्स कुछ देशों में रेगुलेटरी जोखिम रखते हैं। किसी भी निवेश से पहले स्थानीय कानूनों की पूरी जानकारी लें।
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