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Artificial Intelligence

AI से खतरे में नौकरियां? जानें सच और भविष्य की पूरी तस्वीर

भारत में AI का बढ़ता असर, बदल रहा है रोजगार का खेल


AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ एक टेक्नोलॉजी ट्रेंड नहीं रहा बल्कि काम करने के तरीके को बदलने वाली ताकत बन चुका है। जी हाँ.. बैंकिंग से लेकर मीडिया, हेल्थकेयर और आईटी तक हर सेक्टर में AI ऑटोमेशन और स्मार्ट टूल्स अपने पैर पसार चुका है। इतना ही नहीं बल्कि ये काम को तेज, सटीक और किफायती बना रहा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा कि, क्या AI हमारी नौकरियां छीन लेगा? 


वैसे ये सवाल स्वाभाविक भी है, नौकरियां खो जाने के डर से एआई ना जाने कितने लोगों को प्रभावित कर चुका है, हालाँकि हकीकत ये नहीं है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुछ रूटीन और दोहराए जाने वाले कामों को जरूर प्रभावित कर सकता है, लेकिन साथ ही यह नई स्किल्स, नए रोल्स और नए करियर अवसर भी पैदा कर रहा है। आइए डिटेल्स में समझते है एआई के बारे में और इसका भविष्य आखिर कैसा हो सकता है?


AI बन रहा है जॉब पर खतरा?


सबसे पहले इसी पर बात करते हैं क्या सच में एआई जॉब के लिए खतरा बन रहा है? तो इसका जवाब हाँ हो सकता है। ये कुछ हद तक खतरा है, लेकिन पूरी तरह नहीं। इसमें कोई दो राय नही कि एआई तेजी से फैल रहा है और इससे कुछ जॉब्स कम हो रही हैं या बदल रही हैं। लेकिन साथ ही नई जॉब्स भी बन रही हैं और कंपनियां ज्यादा काम कम लोगों से कर पा रही हैं। 


जैसे कि, एक ताजा उदाहरण के साथ समझाते हैं, दरअसल Jack Dorsey (जिन्होंने Twitter बनाया था) की कंपनी Block (जिसमें Square, Cash App जैसी ऐप्स हैं) ने अभी-अभी बड़ी छंटनी की है।

  • कंपनी ने 40% कर्मचारियों की छंटनी की, यानी 4,000 से ज्यादा लोगों की जॉब चली गई।

  • पहले कंपनी में 10,000+ कर्मचारी थे, अब 6,000 से कम रह जाएंगे।

  • वजह? CEO Jack Dorsey ने खुद कहा कि "intelligence tools" ने कंपनी चलाने का तरीका बदल दिया है।

  • छोटी टीम AI की मदद से ज्यादा और बेहतर काम कर सकती है। तेजी से बेहतर हो रहा है, हर हफ्ते कंपाउंडिंग हो रहा है।

  • Dorsey का कहना है कि ज्यादातर कंपनियां अगले सालों में ऐसा ही करेंगी।

यह एक बड़ा संकेत है कि एआई की वजह से कंपनियां छोटी लेकिन स्मार्ट टीमों से काम चला रही हैं।


भारत में इसका इस्तेमाल कितना तेज?


वहीं IMF (International Monetary Fund) के ताजा डाटा के मुताबिक,


  • IMF रिपोर्ट के अनुसार भारत की लगभग 60% कंपनियां पहले से ही किसी न किसी रूप में AI का इस्तेमाल कर रही हैं।

  • यह ग्लोबल औसत से काफी ज्यादा है।

  • भारत में इसे अपनाने की स्पीड बहुत तेज है, जैसे क्रिप्टो में भारत सालों से नंबर 1 रहा है, वैसे ही एआई में भी Grassroots लेवल पर तेजी से अपनाया जा रहा है।

भारतीय फर्म्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बिजनेस को ज्यादा Efficient बना रही हैं, इनोवेशन बढ़ा रही हैं और टेक्नोलॉजी तेजी से फैला रही हैं। लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे स्किल गैप (कर्मचारियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्किल्स की कमी)।


AI के बाद क्या इंसानों का काम बंद हो जाएगा?


  • कुछ जॉब्स खत्म होंगी या कम होंगी (खासकर रूटीन, रिपिटेटिव वाले)।

  • लेकिन नई जॉब्स बनेंगी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रेनर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एथिक्स एक्सपर्ट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम डिजाइनर, डाटा साइंटिस्ट, प्रॉम्प्ट इंजीनियर, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बिजनेस में यूज करने वाले रोल्स।

  • कंपनियां छोटी टीमों से ज्यादा प्रोडक्टिव होंगी, जिससे ग्रोथ तेज होगी और कुल मिलाकर ज्यादा जॉब्स क्रिएट हो सकती हैं।

  • IMF भी कहता है कि इससे ग्लोबल ग्रोथ बढ़ सकती है, लेकिन स्किल्स अपडेट करना जरूरी है। भारत जैसे युवा देश में मौका ज्यादा है अगर हम स्किल्स सीखें।

AI और इंसानों की काम करने की क्षमता में फर्क क्या है?
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत: बहुत तेज, 24/7 काम कर सकता है, गलती कम करता है, बड़े डाटा को सेकंडों में एनालाइज करता है। जैसे डाटा एंट्री, रिपोर्ट बनाना, कुछ कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट के बेसिक सवाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों से बेहतर और सस्ता है।

  • इंसानों की ताकत: क्रिएटिविटी, इमोशन समझना, कॉम्प्लेक्स डिसीजन लेना (जैसे एथिकल चॉइस, नई आइडिया, टीम लीडरशिप, रिलेशनशिप बिल्डिंग) और अनएक्सपेक्टेड सिचुएशन हैंडल करना, ये अभी एआई नहीं कर पाता। 

  • इंसान ही एआई को कमांड देते हैं, ट्रेन करते हैं, और उसे कंट्रोल करते हैं। यानी साफ़ शब्दों में कहे तो AI टूल है और मालिक इंसान है। लेकिन AI टूल इतना पावरफुल हो रहा है कि पहले 10 लोगों का काम अब 2-3 लोग + एआई से हो जाता है।

AI के साथ भविष्य कैसा होगा?
  • चुनौती: जॉब लॉस का डर, खासकर एंट्री-लेवल और मिडिल स्किल जॉब्स में।

  • मौका: भारत एआई में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्किल्स सीखें (कोर्स, ट्रेनिंग), तो दुनिया के साथ कॉम्पिटिटिव बनेंगे।

  • कंपनियां एआई को अपनाएंगी क्योंकि इससे कॉस्ट कम, स्पीड ज्यादा, और बेहतर रिजल्ट मिलते हैं।

समय के साथ AI टूल सीखना कितना जरुरी?

ये खतरा नहीं, बल्कि टूल है। जो इसे यूज करना सीखेगा, वो आगे रहेगा। जो नहीं सीखेगा, वो पीछे रह सकता है। यानी कि, जिस तरह पहले कंप्यूटर और इंटरनेट सीखना एक एक्स्ट्रा स्किल माना जाता था और बाद में बुनियादी जरूरत बन गया, उसी तरह एआई भी धीरे-धीरे हर प्रोफेशन का हिस्सा बन रहा है। चाहे आप कंटेंट क्रिएटर हों, स्टूडेंट, बिजनेस ओनर, मार्केटर या आईटी प्रोफेशनल हो, जो लोग AI का सही उपयोग करना सीख लेते हैं, वे कम समय में ज्यादा प्रोडक्टिव हो जाते हैं और Competition  में आगे निकलते हैं। 

आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि करियर को सुरक्षित और ग्रोथ-फ्रेंडली बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम बन चुका है। अब ऐसे में कंप्यूटर की तरह एआई को भी जीवन का हिस्सा बनाना जरुरी है।

PM ने भी की थी AI बढ़ाने की पहल 

गौरतलब है कि, हाल ही में न्यू दिल्ली में India AI Impact Summit 2026 भी हुआ था जिस में करीब 100+ देशों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य फोकस एआई को जॉब्स पर पॉजिटिव इम्पैक्ट बनाने के लिए था। भारत सरकार और कंपनियां (जैसे OpenAI, Anthropic के साथ पार्टनरशिप) AI को "इनक्लूसिव ग्रोथ" के लिए यूज करने पर जोर दे रही हैं। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और IMF चीफ Kristalina Georgieva ने कहा था कि एआई से जॉब्स "ट्रांसफॉर्म" होंगे, मास लॉस नहीं। लेकिन स्किलिंग बहुत जरूरी है।

कन्क्लूजन

कम शब्दों में कहा जाए तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न तो पूरी तरह दुश्मन है और न ही पूरी तरह जादुई समाधान है। यह एक शक्तिशाली टूल है, जो काम करने का तरीका बदल रहा है। कुछ नौकरियां जरूर प्रभावित होंगी, लेकिन नए अवसर भी उतनी ही तेजी से बनेंगे। भविष्य उनका है जो बदलाव को स्वीकार करेंगे, नई स्किल्स सीखेंगे और एआई के साथ खुद को अपडेट करेंगे। इसलिए डरने की नहीं, सीखने और आगे बढ़ने की जरूरत है।

डिस्क्लेमर

यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई बातें अलग-अलग रिपोर्ट्स और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं। किसी भी करियर या निवेश से जुड़ा फैसला लेने से पहले अपनी समझ से जांच करें या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

पूजा सूर्यवंशी एक स्किल्ड क्रिप्टो राइटर हैं, जिनके पास 6 वर्षों का अनुभव है और वे क्रिप्टो रेगुलेशन, ब्लॉकचेन और Web3 के कॉम्पलेक्स टॉपिक्स को आसान भाषा में समझने योग्य बनाने के लिए जानी जाती हैं। वे डीप रिसर्च और एनालिटिकल एप्रोच के साथ आर्टिकल्स, ब्लॉग और न्यूज़ लिखती हैं, जिनमें SEO पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि रीडर्स का जुड़ाव बढ़ सके। पूजा की राइटिंग क्रिएटिव एक्सप्रेशन और टेक्निकल अप्रोच का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो रीडर्स को जटिल विषयों को स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। क्रिप्टो स्पेस के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें इस उद्योग में एक अच्छे राइटर के रूप में स्थापित कर रही है। अपने कंटेंट के माध्यम से, उनका उद्देश्य अपने रीडर्स को क्रिप्टो की तेजी से बदलती दुनिया में गाइड करना है।

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नहीं, AI सभी नौकरियां खत्म नहीं करेगा। यह कुछ रूटीन और दोहराए जाने वाले कामों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन साथ ही नई तरह की नौकरियां और स्किल्स की मांग भी पैदा करेगा।
डेटा एंट्री, बेसिक कस्टमर सपोर्ट, रिपिटेटिव ऑफिस वर्क और कुछ एंट्री-लेवल जॉब्स पर ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि ये काम ऑटोमेशन से आसानी से किए जा सकते हैं।
हाँ, भारत में कई कंपनियां अपने काम को तेज और प्रभावी बनाने के लिए AI और ऑटोमेशन टूल्स का इस्तेमाल तेजी से कर रही हैं।
डिजिटल स्किल्स, डेटा समझने की क्षमता, क्रिएटिविटी, समस्या समाधान और नई टेक्नोलॉजी सीखने की आदत भविष्य में बहुत जरूरी होंगी।
हाँ, AI टूल्स और संबंधित स्किल्स सीखना करियर को सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद करता है।