उत्तर प्रदेश पुलिस की Anti‑Terrorist Squad (ATS) ने 19 मार्च 2026 को 19 साल के छात्र Harish Ali को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया था जिसके बाद से ही शख्स से लगातार पूछताछ की जा रही थी। आरोप हैं कि वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आतंक फैलाने और ISIS‑समर्थित नेटवर्क के लिए क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे जुटाने में शामिल था। लंबी पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। तो आइए जानते हैं, कैसे यह युवा छात्र देश और डिजिटल दुनिया के लिए खतरा बन गया, साथ ही इससे पूछताछ में क्या क्या खुलासे हुए?
सबसे पहले ये जान लेते हैं आखिर Harish Ali कौन है? दरअसल ये शख्स सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है और एक निजी मेडिकल कॉलेज में BDS के दूसरे साल का छात्र है। पुलिस के अनुसार Harish Ali सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स जैसे सोशल नेटवर्क और चैट ग्रुपों पर फर्जी पहचान से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करता था।
दरअसल, इस नेटवर्क के ज़रिए Harish Ali ने ISIS‑समर्थित विचार फैलाने, नए सदस्यों को जोड़ने और Cryptocurrency के माध्यम से फंडिंग उपलब्ध कराने जैसे गंभीर काम किए हैं। इसमें उसने अलग अलग सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से कई लोगों को जोड़ने की कोशिश की। हालाँकि वह प्लान पूरा करने से पहले ही पुलिस के हाथ चढ़ गया।
जांच में ATS ने Harish Ali के स्मार्टफोन और लैपटॉप जब्त किए, जिनकी फोरेंसिक जांच में चैट, वीडियो और दस्तावेज़ मिले। इनमें हैंड ग्रेनेड और IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने के सामान मिले। पूछताछ में Harish Ali ने माना कि उसे ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, ये ट्रेनर कई अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहे थे और तकनीकी जांच में कई IP एड्रेस पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान क्षेत्र से जुड़े पाए गए, जिससे क्रॉस‑बॉर्डर लिंक का संकेत मिलता है। हालांकि अब तक उसके व्यक्तिगत क्रिप्टो अकाउंट्स से कोई संदिग्ध लेन‑देना सीधे तौर पर सामने नहीं आया है।
जांच की सबसे गंभीर बात ये है कि Harish Ali ने नाबालिगों को रैडिकलाइज करने की कोशिश की। अब तक लगभग 6 नाबालिगों की पहचान हुई है जो उसके संपर्क में थे और कट्टरपंथी विचारों की ओर प्रभावित हो रहे थे। ATS ने इन नाबालिगों से बयान रिकॉर्ड किए हैं जिन्हें आगे की जांच में सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, 18-20 साल के कई युवा भी जांच में शामिल हैं, लेकिन उनके नेटवर्क में सटीक रोल अभी तय नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और इसका मुख्य ध्यान फाइनेंशियल सिस्टम, डिजिटल कम्युनिकेशन और संभावित क्रॉस‑बॉर्डर कनेक्शन पर है।
Harish Ali की गिरफ्तारी और उसके नेटवर्क की जांच यह साफ़ करती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी का गलत इस्तेमाल किस तरह देश और समाज के लिए खतरा पैदा कर सकता है। यह मामला दिखाता है कि Harish Ali जैसे युवा वर्ग को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने वाले ऑनलाइन नेटवर्क तेजी से फैल सकते हैं, लेकिन समय पर सतर्कता और जांच उन्हें पकड़ने में मदद कर सकती है। इस घटना से यह सीख मिलती है कि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जागरूक रहना बहुत जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ये पूरा आर्टिकल मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। लेख का उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना या कोई न्यायिक निर्णय प्रदान करना नहीं है।
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