Crypto उद्योग की बजट-मांगें: तर्क, प्रतिवाद और असली अर्थ
Bharat Web3 Association की मांगें, 2026 बजट से कितनी उम्मीद
भारत में डिजिटल एसेट सेक्टर एक बार फिर चर्चा में है। जनवरी 2026 की प्री-बजट मीटिंग के दौरान Bharat Web3 Association (BWA) ने सरकार के सामने Crypto और Web3 Industry से जुड़ी अहम मांगें रखीं। इस मीटिंग में टैक्स रिसर्च यूनिट (TRU) के अधिकारियों के साथ विस्तार से बातचीत की गई, जहां सेक्टर से जुड़े कई पुराने मुद्दों को दोबारा सामने रखा गया।
Bharat Web3 Association का कहना है कि मौजूदा पॉलिसीस की वजह से भारत में Blockchain पर बेस्ड बिज़नेस को आगे बढ़ने में कई रुकावटें आ रही हैं। आर्गेनाइजेशन ने खास तौर पर क्रिप्टो टैक्स स्ट्रक्चर, बैंकिंग सुविधाओं की कमी और स्पष्ट नियमों के अभाव पर ध्यान दिलाया।
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टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग
Bharat Web3 Association की सबसे बड़ी मांग ट्रांजैक्शन पर लगने वाले 1% TDS को घटाकर 0.01% करने की रही। इंडस्ट्री का मानना है कि मौजूदा रेट बहुत ज्यादा है, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम पर नेगेटिव असर पड़ा है। इसके अलावा 30% फ्लैट टैक्स को भी एक बड़ी समस्या बताया गया, क्योंकि इसमें नुकसान को एडजस्ट करने की परमिशन नहीं मिलती।
Bharat Web3 Association के रिप्रेजेन्टेटिव ने मीटिंग में यह तर्क रखा कि इतना सख्त टैक्स सिस्टम निवेशकों को विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर जाने के लिए मजबूर कर रहा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में भारतीय यूज़र ऑफशोर एक्सचेंज का रुख कर चुके हैं, जिससे घरेलू इकोसिस्टम कमजोर हुआ है।
प्री-बजट मीटिंग में Bharat Web3 Association की प्रमुख मांगें
क्रिप्टो नुकसान को एडजस्ट करने की परमिशन देने पर जोर।
Web3 स्टार्टअप्स के लिए आसान बैंकिंग एक्सेस की जरूरत।
पेमेंट गेटवे और ऑन-रैम्प्स पर स्पष्ट गाइडेंस।
क्रिप्टो एसेट्स के लिए बैलेंस्ड और साफ रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की मांग।
बैंकिंग एक्सेस अब भी बड़ी चुनौती
मीटिंग के दौरान बैंकिंग इंटीग्रेशन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। Bharat Web3 Association ने बताया कि कई स्टार्टअप्स को आज भी बेसिक बैंकिंग सुविधाएं पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अकाउंट ओपनिंग, पेमेंट गेटवे और रेगुलेटेड ऑन-रैम्प्स जैसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी बताई गई।
BWA का मानना है कि जब तक बैंकों को स्पष्ट नियम नहीं मिलेंगे, तब तक वे इस सेक्टर के साथ काम करने से हिचकिचाते रहेंगे। इसका सीधा असर इनोवेशन, रोजगार और निवेश पर पड़ता है।
रेगुलेटरी क्लैरिटी की जरूरत
Association ने सरकार से साफ और संतुलित नियम लाने की अपील की। उनका कहना है कि अभी न तो क्रिप्टो एसेट्स की कानूनी परिभाषा पूरी तरह स्पष्ट है और न ही यह तय है कि किन एजेंसियों के तहत यह सेक्टर आएगा। इस अनिश्चितता के कारण कई कंपनियां भारत में विस्तार की योजना टाल रही हैं।
BWA ने यह भी कहा कि सही नियम बनने से कंज्यूमर की सुरक्षा बेहतर होगी और इलीगल एक्टिविटीज पर लगाम लगाई जा सकेगी।
क्या 2026 बजट से कुछ बदलेगा?
इस बार इंडस्ट्री में थोड़ी उम्मीद इसलिए भी देखी जा रही है क्योंकि नवंबर 2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार Web 3 और क्रिप्टो सेक्टर के साथ एक अलग बैठक की थी। इसे एक पॉजिटिव सिग्नल माना गया, जिससे यह उम्मीद बनी कि सरकार इस क्षेत्र की बात सुनने के लिए तैयार है।
पिछले कई बजट्स में इसी तरह की मांगें उठाई गईं, लेकिन ठोस सुधार देखने को नहीं मिले। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 2026 के बजट में बड़े बदलाव की संभावना सीमित हो सकती है, लेकिन छोटे और व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।
क्या होगा भविष्य
Bharat Web3 Association का कहना है कि उनकी मांगें किसी खास छूट के लिए नहीं हैं। आर्गेनाइजेशन चाहता है कि सरकार ऐसा नियम बनाए, जिससे विकास और कानून का संतुलन बना रहे। अगर टैक्स में थोड़ी राहत मिलती है, बैंकिंग सुविधाएं आसान होती हैं और नियम साफ होते हैं, तो भारत Web3 Sector में आगे बढ़ सकता है। इससे निवेश, रोजगार और नई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलेगा।
फिलहाल सभी की नजरें 2026 के केंद्रीय बजट पर हैं। इसी बजट से तय होगा कि सरकार इंडस्ट्री की बातों को कितनी गंभीरता से लेती है और इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाती है।
पिछले 7 वर्षों से Web3 और क्रिप्टो सेक्टर को कवर करते हुए मैंने देखा है कि भारत में टैलेंट और इनोवेशन की कोई कमी नहीं है। लेकिन सख्त टैक्स नियमों ने इस ग्रोथ को बार-बार धीमा किया है। अगर इस बार सरकार ने व्यावहारिक कदम उठाए, तो भारत Global Leader बन सकता है।
कन्क्लूजन
Bharat Web3 Association की मांगें किसी विशेष लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद सिस्टम बनाने की दिशा में हैं। टैक्स स्ट्रक्चर में मामूली बदलाव, बैंकिंग सपोर्ट और साफ नियम इस सेक्टर को नई गति दे सकते हैं। पुराने अनुभवों को देखते हुए बड़े सुधार की उम्मीद सीमित है, लेकिन अगर 2026 बजट में छोटे और स्पष्ट फैसले लिए जाते हैं, तो भारत में क्रिप्टो इकोसिस्टम को मजबूत आधार मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और इंडस्ट्री एनालिसिस के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई राय राइटर के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले रीडर्स स्वयं रिसर्च करें या किसी फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।