Binance Hack: 60 हज़ार करोड़ की चोरी के पीछे North Korea, FBI का दावा
एक्सचेंज का अकाउंट खोलते वक़्त हम में से ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर पैसा तो सुरक्षित ही होगा। 29 October 2026 की रात Binance Hack के साथ यह भरोसा हिल गया। Binance के अनुसार इस हैक में लगभग 6.3 अरब डॉलर के एसेट चोरी किये गए। एक्सचेंज रेट के हिसाब से यह रकम लगभग 60 हज़ार करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। इसके बाद 31 October को FBI ने खुले तौर पर बताया कि इस हमले के पीछे North Korea का हैकिंग ग्रुप है। इस हैक की कहानी चार सवालों में बँटी है: क्या हुआ, FBI को कैसे पता चला, मार्केट ने कैसे रिएक्ट किया, और अब आगे क्या।
Binance Hack: क्रिप्टो की दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी चोरी
29 October को लगभग 20:05 UTC पर XRP Ledger पर Binance के पाँच वॉलेट्स ने 23.3 करोड़ XRP एक ही एड्रेस पर भेज दिए। अगले 30 मिनट में Solana, NEAR, Base, Optimism, Bitcoin, Tron, Ethereum, Arbitrum और Avalanche के हॉट वॉलेट्स भी खाली किए गए। कुल मिलाकर हमलावर ने 11 ब्लॉकचेन पर यह खेल खेला।
सबसे बड़ा नुकसान Ethereum पर हुआ, जहाँ 186 अलग-अलग टोकन्स में 3.80 अरब डॉलर चोरी हुए, जिनमें 1.9 अरब USDT और 82.3 करोड़ USDC शामिल हैं। इसके अलावा 18,270 BTC भी गए, जिनकी कीमत लगभग 1.48 अरब डॉलर थी।
इस चोरी का पैमाना समझने के लिए एक तुलना काफ़ी है। यह रकम Bybit हैक के 1.46 अरब डॉलर से चार गुना से ज़्यादा है, और यह लगभग तय है कि यह किसी भी तरह की सबसे बड़ी सिंगल चोरी है। यानी बात सिर्फ़ क्रिप्टो की नहीं है, इतिहास की किसी भी चोरी से इसका आँकड़ा बड़ा है।
यह हमला हुआ कैसे, इस पर Binance की जाँच अभी चल रही है। शुरुआत में Binance ने कहा कि एक DevOps इंजीनियर का कंप्रोमाइज़्ड लैपटॉप इसकी वजह हो सकता है, जिससे हमलावर एक सर्विस कंटेनर तक पहुँचा और अनऑथराइज़्ड विड्रॉल ट्रांज़ैक्शन भेजे।
बाद में कंपनी ने माना कि जाँच में ब्रीच के और भी पॉइंट्स मिले हैं। Binance के co-CEO Richard Teng ने यह भी कहा कि यह हमला किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया, और हमलावर ने एक सेल्फ़-डिस्ट्रक्ट मैकेनिज़्म इस्तेमाल किया, जिसने काम के दौरान ही टूल्स और निशान मिटा दिए। अब यह समझना ज़रूरी है कि इतने बड़े हमले का सुराग FBI तक कैसे पहुँचा।
FBI ने कैसे पता लगाया North Korea ने किया Binance Hack
31 October को FBI ने अपने स्टेटमेंट में इस एक्टिविटी को "TraderTraitor" नाम दिया, जो North Korea के एक स्टेट-स्पॉन्सर्ड हैकिंग ग्रुप का FBI का दिया नाम है। FBI ने US Secret Service और IRS-CI के साथ मिलकर देखा कि TraderTraitor के लोग चोरी की रकम को ज़्यादातर Ethereum में बदल रहे हैं। FBI के मुताबिक यह रकम आगे DeFi और इंस्टेंट स्वैप सर्विसेज़ से गुज़ारी जाएगी, ताकि लॉन्ड्रिंग के अगले स्टेज की तैयारी हो सके। FBI ने क्रिप्टो कंपनियों से उन एड्रेसेज़ पर ट्रांज़ैक्शन ब्लॉक करने को भी कहा है, जिनकी लिस्ट उसने जारी की है।
FBI के अलावा ब्लॉकचेन एनालिटिक्स फ़र्म्स ने भी यही अंदाज़ा लगाया था। इनमें से Elliptic के सबूत काफ़ी दिलचस्प हैं:
Bitget हैक से लिंक: Binance की चोरी का पैसा September 2026 के Bitget एक्सप्लॉइट की रकम के साथ कई वॉलेट्स में मिलाकर लॉन्डर किया जा रहा है। Elliptic ने Bitget वाले मामले को भी DPRK से जुड़ा होने की बहुत ज़्यादा संभावना वाला माना था। आसान शब्दों में, दो अलग-अलग चोरियों का पैसा एक ही जगह मिल रहा है।
पुराने हमलों से कनेक्शन: लॉन्ड्रिंग में वही सर्विसेज़ इस्तेमाल हुईं, जो BigONE, WOO X और AFX की चोरियों में हुई थीं, जिन्हें TraderTraitor से जोड़ा गया था।
तरीक़ा: लंबी तैयारी, स्टाफ़ को निशाना बनाना और Binance के अपने सिस्टम से ही ट्रांज़ैक्शन साइन करवाना, ये सब पुराने TraderTraitor हमलों, जैसे Bybit, से मिलता-जुलता है।
स्केल: 11 ब्लॉकचेन पर लगभग तीन घंटे में ऐसा हमला कोऑर्डिनेट करना बहुत कम ग्रुप्स के बस की बात है।
तकनीकी पहलू पर Elliptic की रिपोर्ट के मुताबिक Ethereum पर हमलावर ने EIP-7702 नाम के फ़ीचर का दुरुपयोग किया, जो 2025 के Pectra अपग्रेड में आया था। इसमें एक रेगुलर वॉलेट अपना व्यवहार किसी स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को सौंप सकता है, और हमलावर ने इसी तरह Binance के एक हॉट वॉलेट का कंट्रोल अपने "स्वीपर" कॉन्ट्रैक्ट को दे दिया। इसका मतलब यह है कि सेंध क्रिप्टोग्राफ़ी में नहीं, बल्कि वॉलेट्स के आसपास के सिस्टम और लोगों में लगी। यह पैटर्न नया नहीं है, और यहीं से अगला सवाल उठता है कि इस ग्रुप ने पहले क्या-क्या किया है।
इससे पहले भी TraderTraitor कर चुका है बड़े हमले
क्रिप्टो इंडस्ट्री में TraderTraitor का नाम पुराना है। सबसे बड़ा पिछला मामला Bybit का था, जिसके बारे में FBI ने बताया था कि North Korea ने लगभग 1.5 अरब डॉलर के वर्चुअल एसेट्स चुराए थे, और इस ख़ास मैलिशियस एक्टिविटी को वह "TraderTraitor" कहता है। उस वक़्त भी हमलावरों ने चोरी का माल हज़ारों एड्रेसेज़ और कई ब्लॉकचेन पर बाँट दिया था। इस ग्रुप का रिकॉर्ड इन हमलों तक सीमित नहीं है:
BigONE, WOO X और AFX: ये तीनों चोरियाँ TraderTraitor से जोड़ी गई हैं।
Drift Protocol (April 2026): Elliptic ने इसे 28.6 करोड़ डॉलर का संदिग्ध DPRK-लिंक्ड हमला बताया था।
Bitget (September 2026): Elliptic के मुताबिक 2026 में DPRK-लिंक्ड चोरियाँ Binance से पहले ही 1 अरब डॉलर पार कर चुकी थीं।
Elliptic का अनुमान है कि हाल के सालों में North Korea से जुड़े एक्टर्स 6.5 अरब डॉलर से ज़्यादा के क्रिप्टो एसेट्स चुरा चुके हैं, और Binance की चोरी इस कुल रकम को लगभग दोगुना कर देती है। US सरकार इन चोरियों को North Korea के वेपन्स प्रोग्राम की फ़ंडिंग से जोड़ती रही है। इस तरह एक एक्सचेंज की चोरी एक बड़े भू-राजनीतिक मुद्दे से जुड़ जाती है। इन हमलों के बीच एक सवाल और बचता है कि इतनी बड़ी चोरी का असर क्रिप्टो मार्केट पर कितना पड़ा।
इतनी बड़ी चोरी के बाद भी क्रिप्टो मार्केट में सिर्फ़ हल्की गिरावट क्यों?
आम तौर पर इतनी बड़ी ख़बर के बाद मार्केट में घबराहट की बड़ी सेलऑफ़ की उम्मीद की जाती है, पर इस बार रिएक्शन अंदाज़े से काफ़ी नरम रहा। हैक के अगले दिन Bitcoin लगभग 4.1% गिरकर 77,445 डॉलर के आसपास आ गया, Ether करीब 4.4% टूटकर 2,229 डॉलर पर पहुँचा, और Binance का अपना टोकन BNB लगभग 6% गिरकर 701 डॉलर पर आ गया। कुछ दूसरी क्रिप्टोकरेंसीज़ 9% तक नीचे गईं। पैमाने के हिसाब से देखें तो 6 अरब डॉलर से ज़्यादा की चोरी के लिए यह गिरावट मामूली कही जा सकती है। Decrypt ने भी लिखा कि शुरुआत में मार्केट ने इस हैक को उसके स्केल को देखते हुए काफ़ी हद तक सहजता से लिया।
इसके पीछे कुछ वजहें गिनाई जा रही हैं:
यह सॉल्वेंसी का संकट नहीं था: Fundstrat के Sean Farrell के मुताबिक यह रिकॉर्ड हैक ज़रूर है, पर फ़िलहाल यह Binance के लिए सॉल्वेंसी इवेंट नहीं दिखता। उनका कहना था कि असली सिस्टमिक ख़तरा तब होता, जब कस्टमर एसेट्स में कमी की वजह से Binance को रिज़र्व बेचने पड़ते, विड्रॉल्स की भगदड़ मचती और कर्ज़ देने वाले पार्टनर्स हाथ खींच लेते।
नुकसान कंपनी उठा रही है: Binance ने कहा है कि इस चोरी का वित्तीय असर वह ख़ुद झेलेगी, यूज़र्स नहीं। इससे आम निवेशकों का डर काफ़ी हद तक थमा।
पैसा तेज़ी से फ़्रीज़ हुआ: Tether और Circle ने फ़ौरन कदम उठाकर हैक से जुड़े एसेट्स फ़्रीज़ किए। क्रिप्टो फ़र्म्स ने कुल मिलाकर 3 अरब डॉलर से ज़्यादा फ़्रीज़ कर लिए। जब आधी रकम पर ताला लग जाए, तो घबराहट अपने आप कम हो जाती है।
मार्केट पहले से कमज़ोर था: Bitcoin में एक महीने से गिरावट का दौर चल रहा था, और अमेरिकी कांग्रेस में Clarity Act का फ़ेल होना भी इंडस्ट्री पर पहले से भारी था। यानी कुछ बुरी ख़बर पहले ही कीमतों में शामिल थी।
इसका मतलब यह नहीं कि असर बिल्कुल नहीं पड़ा। हैक के बाद पहले पूरे ट्रेडिंग सेशन में US स्पॉट Bitcoin ETFs से 64.32 करोड़ डॉलर निकले, जो अक्टूबर का सबसे बड़ा आउटफ़्लो था, और 1.3 अरब डॉलर से ज़्यादा की लेवरेज्ड पोज़िशंस लिक्विडेट हुईं। पुराना उदाहरण भी सावधान करता है।
Bybit हैक के बाद बड़ी गिरावट कुछ दिन बाद आई थी, जिसे एक एनालिस्ट ने "डिलेड रिएक्शन" कहा था, हालाँकि उस वक़्त अमेरिकी टैरिफ़ की चिंता भी साथ चल रही थी। इसलिए "हल्की गिरावट" को अभी राहत मानना जल्दबाज़ी होगी। असली परीक्षा यह होगी कि Binance के रिपोर्ट्स और विड्रॉल्स की रफ़्तार यूज़र्स का भरोसा कितना लौटा पाती हैं, और इसी वजह से अब देखना ज़रूरी है कि हैक के बाद Binance की ताज़ा स्थिति क्या है।
Binance Hack के बाद क्या है स्थिति
सबसे पहले यूज़र्स के लिए ज़रूरी बात: Binance का दावा है कि नुकसान वह ख़ुद उठाएगा। कंपनी के मुताबिक उसने अपने पैसे से नए टोकन ख़रीदकर चोरी हुई रकम का 90% बदल लिया है, और इसके लिए लगभग 6.34 अरब डॉलर अलग रखे हैं। इस रकम का एक हिस्सा उसके SAFU फ़ंड, फ़्यूचर्स इंश्योरेंस फ़ंड और कॉर्पोरेट ट्रेज़री से आया है। बाक़ी 10% कम लिक्विड टोकन्स हैं, जिन्हें ख़रीदने में ज़्यादा वक़्त लगेगा।
विड्रॉल्स की बात करें तो हैक के बाद Binance ने उन्हें रोक दिया था। 1 November को Binance ने बताया कि विड्रॉल्स फिर से खुलना शुरू हो गए हैं, और शुरुआत Bitcoin नेटवर्क से हुई। कंपनी का कहना है कि डिपॉज़िट पहले ही चालू थे, और हैक उसके अपने हॉट वॉलेट पर हुआ, कस्टमर फ़ंड्स पर नहीं। विड्रॉल्स खुलने के बाद सबसे बड़ा डर यही था कि यूज़र्स एक साथ पैसा निकालने दौड़ेंगे।
इस पर पहला आँकड़ा सामने आया है: Binance के मुताबिक शुरुआत में विड्रॉल्स बढ़े और फिर उम्मीद के मुताबिक धीमे पड़ गए। नेट आउटफ़्लो 3.64 अरब डॉलर रहा, जो उसके कुल 171 अरब डॉलर के डिपॉज़िटेड एसेट्स का 2.1% है। यह आँकड़ा Binance ने ख़ुद दिया है, इसलिए इसे अभी स्वतंत्र वेरिफ़िकेशन का इंतज़ार है।
Binance ने 2 November तक पूरा Proof of Reserves रिपोर्ट पब्लिश करने का वादा किया है। यह रिपोर्ट इस बात की पहली बड़ी परीक्षा होगी कि यूज़र्स का बैलेंस वाक़ई पूरा कवर है या नहीं।
चोरी के पैसे की रिकवरी पर तस्वीर मिली-जुली है:
फ़्रीज़ हुआ पैसा: Elliptic ने 2.85 अरब डॉलर के फ़्रीज़ या सीज़ हुए फ़ंड्स वेरिफ़ाई किए हैं, यानी चोरी का लगभग 44%। इसमें लगभग सब कुछ USDT और USDC है, क्योंकि Tether और Circle जैसे जारीकर्ता अपने स्टेबलकॉइन फ़्रीज़ कर सकते हैं।
जो पैसा फ़्रीज़ नहीं हो सकता: हमलावर के पास अब भी लगभग 3.21 अरब डॉलर के ऐसे एसेट्स हैं जिन्हें कोई जारीकर्ता फ़्रीज़ नहीं कर सकता, जैसे ETH, BTC, XRP और TRX। इनके लिए मुख्य उम्मीद यही है कि जब ये किसी एक्सचेंज या सर्विस तक पहुँचें, तब पकड़े जाएँ।
लॉन्ड्रिंग की रफ़्तार: मुख्य Tron लॉन्ड्रिंग वॉलेट ने 30 October की शुरुआत से 546 अलग-अलग ट्रांसफ़र भेजे, और दो ट्रांसफ़र के बीच का औसत गैप 96 सेकंड रहा। इससे लगता है कि ज़्यादातर काम सॉफ़्टवेयर से हो रहा है।
ट्रेसिंग की सीमा: Elliptic को उम्मीद है कि Bybit की तरह इस पैसे की लॉन्ड्रिंग भी महीनों तक चलेगी।
भारतीय यूज़र्स के लिए इस मामले का सबक वही है जो FIU रजिस्ट्रेशन वाले मामले में दिखता है। FIU Registered Crypto Exchange होना किसी एक्सचेंज को हैक से नहीं बचाता, और Binance भी FIU-IND की सूची में एक रजिस्टर्ड एंटिटी के ज़रिए मौजूद है। इसलिए एक्सचेंज पर सिर्फ़ ट्रेडिंग के लिए ज़रूरी रकम रखिए, लंबी अवधि की होल्डिंग्स अपने सेल्फ़-कस्टडी वॉलेट में रखने पर विचार कीजिए, और Binance के आधिकारिक चैनल्स के अलावा किसी "रिफ़ंड" या "रिकवरी" वाले मैसेज पर भरोसा मत कीजिए। Binance ने ख़ुद स्कैम्स से सावधान रहने को कहा है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश या कानूनी सलाह न समझें। क्रिप्टो एसेट्स में जोखिम होता है।