Property Records Of India On Blockchain को लेकर 10 फरवरी 2026 को राज्यसभा में बड़ी बहस देखने को मिली। दरअसल चल रहे बजट सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद और चार्टर्ड अकाउंटेंट Raghav Chaddha ने भारत के सभी भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड्स को Blockchain पर लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा भूमि रिकॉर्ड सिस्टम पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुका है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को झेलना पड़ता है। रजिस्ट्रार ऑफिस के चक्कर, दलालों का दबदबा, कैश डील्स, फर्जी दस्तावेज और न ख़त्म होने वाले मुक़दमे जैसे आज भी जमीन से जुड़े हर सौदे का हिस्सा बने हुए हैं।
Raghav Chaddha ने साफ कहा कि जब तक Property Records Of India On Blockchain जैसे आधुनिक समाधान नहीं अपनाए जाएंगे, तब तक Real Estate Sector में ट्रांसपेरेंसी और भरोसा कायम नहीं हो सकता। इस दौरान उन्होंने इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालने वाली समस्या बताया।
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राज्यसभा में बोलते हुए Raghav Chaddha ने कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उनके अनुसार भारत के कुल सिविल विवादों में लगभग 66% भूमि विवाद से जुड़े हुए हैं। करीब 45% प्रॉपर्टी के पास क्लियर टाइटल नहीं है और 48% संपत्तियां पहले से ही किसी न किसी विवाद में फंसी हुई हैं। World Bank के डेटा के आधार पर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की दक्षता में भारत 190 देशों में 133वें स्थान पर है।
उन्होंने बताया कि एक साधारण प्रॉपर्टी बिक्री में 2 से 6 महीने का समय लग जाता है, जबकि विवाद की स्थिति में सिविल कोर्ट में औसतन 7 साल तक मामला चलता है। इसके अलावा, अभी भी 6.2 करोड़ प्रॉपर्टी दस्तावेज ऐसे हैं, जो Digitization के लिए पेंडिंग पड़े हैं। Raghav Chaddha के मुताबिक, जब तक Property Records Of India On Blockchain जैसे सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट सिस्टम लागू नहीं होंगे, तब तक ये समस्याएं खत्म नहीं होंगी।
Raghav Chaddha ने इस दौरान एक नेशनल ब्लॉकचेन प्रॉपर्टी रजिस्टर का प्रस्ताव पेश किया, जो टाइम-स्टैंप्ड, टैम्पर-प्रूफ और पूरी तरह ट्रांसपेरेंट होगा। उनके अनुसार, Property Records Of India On Blockchain लागू होने से टाइटल वेरिफिकेशन तुरंत हो सकेगा और हर बिक्री, म्यूटेशन व वारिस से जुड़ा रिकॉर्ड रीयल-टाइम में क्लीन और ट्रेसेबल तरीके से दर्ज होगा। इससे दलालों की भूमिका भी खत्म होगी, फ्रॉड रुकेगा और विवादों में बड़ी कमी आएगी।
इस बील को पेश करते हुए उन्होंने स्वीडन, जॉर्जिया और यूएई जैसे देशों का उदाहरण दिया, जहां Blockchain पर आधारित सिस्टम से प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन मिनटों में पूरे हो जाते हैं। Chaddha ने कहा कि भारत को भी “कॉस से क्लैरिटी” की ओर बढ़ना चाहिए, जहां सिस्टम समस्याएं पैदा न करे बल्कि उन्हें पहले ही रोक दे।
यह प्रस्ताव बजट 2026-27 की चर्चा में Governance Reform के तौर पर सामने आया, जहां LTCG टैक्स खत्म करने और इन्फ्लेशन-लिंक्ड वेज हाइक जैसे सुझावों के साथ इसे जोड़ा गया। कई एक्सपर्ट्स और क्रिप्टो कम्युनिटी ने भी Property Records Of India On Blockchain के विचार का समर्थन किया है। तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स के पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।
हालांकि, इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने में कानूनी बदलाव, Technical Infrastructure और राज्यों के साथ बेहतर कोऑर्डिनेशन जैसी चुनौतियां हो सकती है। इसके बावजूद, अगर Property Records Of India On Blockchain को सही तरीके से अपनाया गया, तो यह भारत के रियल एस्टेट और गवर्नेंस सिस्टम को पूरी तरह बदल सकता है। यही वजह है कि Raghav Chaddha का यह बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है और लोग इसे “रियल रिफॉर्म” कह रहे हैं।
आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब शहर के सभी सरकारी रिकॉर्ड Polygon Blockchain पर स्टोर किए जाएंगे। अधिक जानकारी नीचे दिए लिंक पर पढ़ें।
Property Records Of India On Blockchain का प्रस्ताव देश के प्रॉपर्टी सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी, सिक्योरिटी और भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह पहल लागू होती है, तो भूमि विवाद कम हो सकते हैं, फ्रॉड पर रोक लग सकती है और ट्रांजेक्शन प्रक्रिया भी तेज हो सकती है। हालांकि, कानूनी और Technical Challenges अब भी मौजूद हैं, लेकिन सही योजना के साथ यह सुधार भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
Disclaimer: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक बयानों, मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। Property Records Of India On Blockchain से जुड़ा यह प्रस्ताव अभी सुझाव और चर्चा के चरण में है, इसलिए नीतियों या सरकारी फैसलों में बदलाव संभव है। किसी भी कानूनी, निवेश या प्रॉपर्टी से जुड़े निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोत या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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