अगर आप भारत में क्रिप्टोकरेंसी खरीदने का सोच रहे हैं, तो सबसे पहले आपको Crypto Exchange के बारे में जानना होगा। ये प्लेटफॉर्म्स वह जगह हैं, जहां आप अपनी मेहनत से कमाए गये पैसों को बिटकॉइन जैसे डिजिटल टोकन में बदल सकते हैं। साफ़ तौर पर कहा जाए तो 2026 में, क्रिप्टो एक्सचेंज सिर्फ एक ट्रेडिंग ऐप नहीं है, ये एक सुरक्षित पोर्टल है, जो भारत की Financial Intelligence Unit (FIU-IND) के कड़े नियमों का पालन करता है। जब आप प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग करते हैं, तो इसके पीछे एक जटिल प्रणाली काम करती है जो तेज़ी से व्यापार करती है और सरकार द्वारा निर्धारित कर नियमों का पालन करती है। तो चलिए और विस्तार से जानते हैं इसके पीछे की कहानी क्या है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि वे सीधे क्रिप्टो एक्सचेंज से डिजिटल करेंसी खरीद रहे हैं। मगर असल में, आप दूसरे लोगों के साथ ट्रेडिंग कर रहे होते हैं, और एक्सचेंज सिर्फ एक मध्यस्थ (Intermediary) की भूमिका निभाता है।
वहीं 2022-2023 में आए नए नियमों के बाद, भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों ने अपनी प्रक्रियाओं में कई बदलाव किए हैं।
ई-केवाईसी (E-KYC): अब, इंडिया स्टैक की मदद से, आप ओटीपी के ज़रिए आसानी से अपना आधार और पैन कार्ड लिंक कर सकते हैं। इससे ट्रेडिंग करना तेज़ और सुरक्षित हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि आप गुमनाम तरीके से ट्रेड नहीं कर सकते।
आईएनआर ऑन-रैंप (INR On-Ramp): इस प्रक्रिया के जरिए आप पैसे को क्रिप्टो में बदलने के लिए आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं। ज़्यादातर भारतीय एक्सचेंज यूपीआई, आईएमपीएस या एनईएफटी के माध्यम से जल्दी डिपॉज़िट करते हैं।
ऑर्डर बुक्स (Order Books): ये वह लाइव लिस्ट होती हैं, जिसमें सभी खरीद (बिड) और बिक्री (आस्क) के ऑर्डर्स होते हैं। एक "मैचिंग इंजन" इन सभी ऑर्डर्स को कीमत के हिसाब से मिलाकर तेज़ी से व्यापार करता है।
भारत में क्रिप्टोकरेंसी को वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) के रूप में Classified किया गया है और इस पर खास कर नियम लागू होते हैं, जो इस प्रकार है….
30% फ्लैट टैक्स: क्रिप्टोकरेंसी से मिलने वाले लाभ पर आपको 30% टैक्स देना होता है, साथ में 4% उपकर भी लगाया जाता है।
कोई छूट नहीं: अगर आप एक क्रिप्टो (जैसे बिटकॉइन) पर ₹10,000 कमाते हैं और दूसरे क्रिप्टो (जैसे सोलाना) पर ₹10,000 का नुकसान करते हैं, तो आपको केवल बिटकॉइन से मिलने वाले लाभ पर 30% टैक्स देना होगा।
1% टीडीएस (TDS): जब भी आप क्रिप्टो बेचते हैं या बदलते हैं, तो एक्सचेंज को कानूनी रूप से आपके लाभ से 1% टीडीएस काटना होता है। इसका मतलब है कि सरकार आपके हर ट्रेड पर नजर रखती है।
Centralized Exchange (CEX): जैसे Pi42, ZebPay, या WazirX। ये FIU Registered Crypto Exchange होते हैं और आपके लिए 1% टीडीएस का भुगतान करते हैं। लेकिन इनका नुकसान यह है कि ये आपकी Private Keys अपने पास रखते हैं। इसका मतलब यह है कि आपकी सुरक्षा पूरी तरह से इन प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर होती है।
Decentralized Exchange (DEX): जैसे Uniswap, ये अधिक गोपनीयता प्रदान करते हैं, लेकिन आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से आपकी होती है। अगर आप अपना पासवर्ड भूल गए तो आपको इसे रिकवर करने का कोई तरीका नहीं मिलेगा।
यदि साफ़ शब्दों में कहा जाए भारत में क्रिप्टो ट्रेडिंग के लिए "आलसी" होना आपके लिए बहुत महंगा पड़ सकता है। उच्च कर दरों और 1% टीडीएस के कारण, कानूनी परेशानी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप (Financial Intelligence Unit) FIU Registered Exchange का चयन करें। इस मामले में, ज्ञान केवल शक्ति नहीं है, बल्कि यह आपको एक सुरक्षित और कानूनी रास्ता दिखाता है, खासकर ऐसे बाजार में जहां हर चीज़ बेहद तेज़ी से बदलती रहती है।
डिस्क्लेमर: हमारे द्वारा लिखा गया लेख किसी भी तरह का निवेश और व्यापार का समर्थन नहीं करता है। यह लेख केवल शिक्षा और सूचना के उद्देश्य के लिए है। इससे जुड़े किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने 'निवेश सलाहकार' से अवश्य चर्चा करें।
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