Treasure NFT नाम का प्लेटफॉर्म 2024–2025 के दौरान तेजी से वायरल हुआ, जिसने India, Pakistan और Bangladesh में लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। यह खुद को एक AI-powered NFT trading platform बताता था और हाई रिटर्न व आसान कमाई का सपना दिखाता था, लेकिन असल में यह एक बड़ा Ponzi scheme निकला।
शुरुआत में इसने छोटे-छोटे रिटर्न और withdrawals देकर लोगों का भरोसा जीता, लेकिन बाद में पूरा सिस्टम अचानक बंद हो गया, जिससे लाखों निवेशकों का पैसा फंस गया। बाद में इसके कई rebranded प्रोजेक्ट अलग-अलग नामों से सामने आए। इस आर्टिकल में हम Treasure NFT को विस्तार से समझेंगे कि यह क्या था और कैसे काम करता था।
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Treasure NFT को TreasureMeta Technology, Inc. के नाम से 2021-22 के आसपास लॉन्च किया गया था। प्लेटफॉर्म ने दावा किया कि यह AI पर आधारित NFT Trading System है, जो रोज़ाना 4.3% से 6.8% तक रिटर्न दे सकता है। इसके अलावा इसमें एक मजबूत Referral System भी था, जिसमें नए यूज़र्स जोड़ने पर अतिरिक्त कमाई का लालच दिया जाता था।
शुरुआत में कुछ यूज़र्स को वास्तव में पैसे मिले, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ गया। लेकिन यह पूरी प्रणाली नए इन्वेस्टर्स के पैसे से पुराने निवेशकों को पेमेंट करने वाले Ponzi structure पर आधारित थी। जब नए यूज़र्स की एंट्री धीमी हुई, सिस्टम ढहने लगा।
मार्च 2025 में अचानक प्लेटफॉर्म ने system upgradeके नाम पर withdrawals बंद कर दिए। इसके अगले ही दिन एक और बड़ा कदम लिया गया, जिसमें यूज़र्स से “Blind Box” के नाम पर लाखों डॉलर जमा करवाए गए। सिर्फ कुछ ही घंटों में लगभग $143.8 million इकट्ठा किया गया।
इसके बाद वेबसाइट और ऐप पूरी तरह बंद हो गए। कस्टमर सपोर्ट गायब हो गया और ऑफिशियल सोशल मीडिया चैनल भी निष्क्रिय हो गए। यह classic exit scam का पैटर्न था, जिसमें ऑपरेटर्स अचानक पूरी लिक्विडिटी लेकर गायब हो जाते हैं। इसके बाद Treasure Fun और Nova NFT जैसे clone apps भी सामने आए, लेकिन उन्होंने भी वही किया।
Treasure NFT में कई ऐसे स्कैम संकेत थे जो शुरुआत से ही धोखाधड़ी की ओर इशारा कर रहे थे। सबसे बड़ा रेड फ्लैग था Unrealistic Returns का दावा।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म न तो किसी Regulatory Body जैसे SEBI या RBI के तहत रजिस्टर्ड है और न ही इसके पास कोई Verified Audit Report या Whitepaper था। इसके फाउंडर के नाम भी fake पाए गए और उनकी कोई Public Identity मौजूद नहीं थी। वहीं Withdrawals में 96 से 168 घंटे की देरी भी एक बड़ा Warning Sign था, जबकि Legit Blockchain Transactions तुरंत या कुछ मिनटों में पूरी हो जाती हैं।
Treasure NFT ने खास तौर पर उन क्षेत्रों को टार्गेट किया जहां Financial Literacy कम थी, जैसे ग्रामीण एरिया, पाकिस्तान के कुछ हिस्से और बांग्लादेश। लोगों को Referral Income और हाई रिटर्न का लालच देकर बड़े पैमाने पर निवेश करवाया गया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि कई लोगों ने सिर्फ अपनी बचत ही नहीं लगाई, बल्कि अपने परिवार और दोस्तों को भी इसमें शामिल कर लिया। जब स्कैम टूटा, तो कई परिवारों की पूरी जमा-पूंजी खत्म हो गई। भारतीय अधिकारियों ने भी मार्च 2025 के बाद इस मामले की जांच शुरू की और cyber fraud के तहत शिकायतें दर्ज होने लगीं।
Treasure NFT जैसे मामलों से सबसे बड़ा सबक यह मिलता है कि:
Treasure NFT scam एक बार फिर यह साबित करता है कि, बिना रिसर्च किए और लालच में किया गया इन्वेस्टमेंट कितना खतरनाक हो सकता है। यह सिर्फ एक financial loss नहीं था, बल्कि हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करने वाला बड़ा fraud था। Crypto और NFT space में अवसर जरूर हैं, लेकिन risk management और due diligence हमेशा सबसे जरूरी कदम हैं।
Disclaimer: यह रिपोर्ट Public Community Claims और Available Information पर आधारित है। इसमें किए गए किसी भी दावे को Officially Verified नहीं माना जाए। यह लेख किसी भी प्रकार की Financial या Investment Advice नहीं है। Crypto और NFT Projects में 100% Loss का Risk संभव है। निवेश से पहले अपने Financial Advisor से सलाह लें।
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