Ethereum सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म नहीं है बल्कि यह एक लगातार विकसित होने वाला नेटवर्क और कम्युनिटी है, जो कई लोगों के भरोसे पर टिका है। लेकिन जब किसी सिस्टम का कोई ओनर नहीं होता, तो ये सवाल उठता है कि, इसमें डिसिजन कौन लेता है? यही सवाल Ethereum Governance Model को समझने की जरुरत का कारण बनता है।
इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि Ethereum की Governance कैसे काम करती है, इसमें किस-किस की भूमिका होती है और EIPs से लेकर कम्युनिटी डिबेट तक, कैसे एक डिसेंट्रलाइज़्ड नेटवर्क अपने निर्णयों को लागू करता है।
Ethereum जैसे ओपन-सोर्स प्रोटोकॉल के लिए Governance सिर्फ पॉलिसी मेकिंग प्रोसेस नहीं होती, बल्कि नेटवर्क की स्टेबिलिटी और डेवलपमेंट का आधार होती है।
Ethereum पर लगातार नए स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट, dApps और प्रोटोकॉल डिप्लॉय होते रहते हैं, जिससे इसमें टेक्निकल बदलावों की ज़रूरत बनी रहती है लेकिन इन बदलावों को लागू करने के लिए कोई सेंट्रल अथॉरिटी नहीं होती। ऐसे में एक ऐसे इंटीग्रेटेड लेकिन डिसेंट्रलाइज़्ड मॉडल की जरुरत होती है, जो भरोसेमंद भी हो और बदलाव के प्रति फ्लेक्सिबल भी।
Ethereum Governance Model में कम्युनिटी, Ethereum Foundation, कोर डेवलपर्स, Validators और Node Operators के बीच कई हिस्सों में बंटी हुई है और हर पिलर की अपनी भूमिका है:
इन सभी स्टैक होल्डर्स के बीच सहयोग के कारण ही Ethereum लगातार इवोल्व होता रहता है।
Ethereum में किसी भी बदलाव को ऑफिशियली इम्प्लीमेंट करने की शुरुआत EIP के माध्यम से ही होती है।
EIPs के प्रकार:
Ethereum में अंतिम निर्णय कोई एक संस्था नहीं लेती बल्कि यह सोशल कंसेंसस के ज़रिए होता है।
इससे पता चलता है कि Ethereum Governance Model का अप्प्रोच Bottom-up है, जहां कम्युनिटी की भूमिका अहम होती है।
Ethereum Foundation (EF) एक Non-profit आर्गेनाइजेशन है जो Ethereum के लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट और रिसर्च में योगदान करती है।
Ethereum Governance Model मुख्यतः Off-chain है, इसके अधिकांश फैसले GitHub और dev calls, Discussions Forums और Community Platforms पर होते हैं। Ethereum में ऑन-चेन वोटिंग या DAO आधारित निर्णय बहुत कम होते हैं।
इससे उलट कुछ प्रोटोकॉल जैसे Polkadot या Tezos ने ऑन-चेन गवर्नेंस को अपनाया है, जहां यूज़र्स ब्लॉकचेन पर ही वोट करते हैं। Ethereum का Off-chain Governance Model में फ्लेक्सिबिलिटी तो है लेकिन साथ ही इसमें ट्रांसपेरेंसी और पार्टिसिपेशन को लेकर कुछ चुनौतियाँ भी हैं।
Ethereum Governance Model को पूरी तरह परफेक्ट नहीं कहा जा सकता है, इससे जुड़ी कुछ आलोचनाएँ भी सामने आती रही हैं, जैसे:
इन समस्याओं को दूर करने के लिए Ethereum Community के द्वारा DAOs, Soulbound Token और सोशल लेयर्स पर आधारित Ethereum Governance Model पर लगातार एक्सपेरिमेंट कर रही है ।
Ethereum की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसका कोड नहीं, बल्कि उसका डिसेंट्रलाइज़्ड लेकिन सबको डिसिजन में शामिल करने वाला Governance Model है। इसमें हर अपडेट, हर बदलाव एक खुली चर्चा, कम्युनिटी फीडबैक और टेक्निकल मेरिट के आधार पर सामने आता है।
जैसे-जैसे Ethereum आगे बढ़ रहा है, इसकी Governance ओर भी परिपक्व होती जा रही है और शायद यही वो मॉडल है जो दूसरे Web3 प्रोजेक्ट्स के लिए प्रेरणा बन सकता है।
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