भारत में क्रिप्टो और Virtual Digital Assets (VDA) सेक्टर को लेकर सरकार ने निगरानी और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। Financial Intelligence Unit - India (FIU-IND), जो कि Ministry of Finance के अंतर्गत काम करता है, उसने 8 जनवरी 2026 को AML & CFT Guidelines for Reporting Entities का अपडेटेड संस्करण जारी किया है। इन्हीं नए प्रावधानों को अब आम तौर पर FIU-IND VDA Registration Guidelines के रूप में जाना जाता है।
ये नए नियम 2023 की पुरानी गाइडलाइंस की जगह लेते हैं और Virtual Digital Asset Service Providers (VDASPs) पर बैंकिंग सेक्टर जैसी सख्त जिम्मेदारियाँ लागू करते हैं। इसका सीधा मतलब है कि अब भारत में Crypto Exchange, वॉलेट प्रोवाइडर्स और अन्य Digital Asset Platforms को लगभग बैंक जैसी Compliance व्यवस्था अपनानी होगी।
Source: Official Website
नई गाइडलाइंस के अनुसार भारत में ऑपरेट करने वाले सभी VDA Service Providers को FIU-IND में Reporting Entity के रूप में रजिस्टर करना अनिवार्य है और यह व्यवस्था ही FIU-IND VDA Registration Guidelines 2026 का मुख्य आधार साबित होती है। यह नियम केवल भारत में मौजूद कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन Offshore Platforms पर भी लागू होता है, जो भारतीय यूजर्स को सेवाएँ प्रदान करते हैं।
इसमें Crypto Exchange, NFT Platform, Custodial Wallets और VDA TransferTransfer या एडमिनिस्ट्रेशन सर्विसेज देने वाली सभी संस्थाएँ शामिल हैं। इन नियमों की खास बात यह है कि यह पूरी तरह Activity-Based हैं, यानी अगर कोई प्लेटफॉर्म भारत में यूजर्स को सर्विस देता है, तो उसे FIU द्वारा रजिस्टर्ड होना ही चाहिए, चाहे उसका ऑफिस भारत में हो या नहीं। इसके अलावा नया नियम यह भी अनिवार्य करता है कि Principal Officer (PO), जो AML और compliance का मुख्य जिम्मेदार होता है, वह भारत में ही स्थित होना चाहिए। यह प्रावधान खासतौर पर उन global crypto कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण है जो multi-country operations चलाती हैं।
नए नियम Income Tax के 1% TDS (Section 194S) से भी जुड़े हुए हैं, जिससे क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस की निगरानी और मजबूत हो गई है। अब Exchanges को केवल TDS काटे गए लेनदेन ही नहीं, बल्कि बिना TDS वाले ट्रांजैक्शंस की भी रिपोर्ट करनी होगी।
इस रिपोर्टिंग में ट्रांजैक्शन का कारण, VDA की वैल्यू और मात्रा जैसी जानकारी भी शामिल होगी। इसके साथ ही Section 285BAA के तहत सभी Registered Exchanges को विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
यह बदलाव P2P और unhosted wallet users के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब ऐसे ट्रांसफर भी Regulatory Radar में आ गए हैं, जिससे Anonymity काफी हद तक कम हो गई है। FIU-IND VDA Registration Guidelines 2026 के तहत डेटा ट्रैकिंग और Reporting Framework पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है।
FIU-INDIA पहले ही कई Global Exchanges पर कार्रवाई कर चुका है। Binance, KuCoin, Kraken, Huobi, Gate.io और अन्य प्लेटफॉर्म्स को पहले show cause notices जारी किए गए थे। कुछ मामलों में भारी Penalties भी लगाई गईं जैसे Binance पर लगभग ₹188 करोड़ की Penalty और KuCoin पर भी Compliance से जुड़ी कार्रवाई।
वहीं Non-Compliant Exchanges की वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का रुख साफ है कि FIU-IND VDA Registration Guidelines के बिना भारत में क्रिप्टो सेवाएँ देना अब संभव नहीं होगा।
FIU-Registered Crypto Exchange की जांच के लिए FIU-IND की Official Website पर VASP List देखें। वहां Registered Exchanges का नाम होता है। केवल FIU-Registered Platformही भारत में KYC और AML Rules के तहत Legal Trading की अनुमति रखते हैं
भारत में क्रिप्टो सेक्टर अब पूरी तरह Regulated दिशा में बढ़ रहा है। नए FIU-IND AML guidelines, जिन्हें FIU-IND VDA Registration Guidelines के रूप में भी जाना जाता है, ने स्पष्ट कर दिया है कि Virtual Digital Assets को भी ट्रेडिशनल फाइनेंसियल सिस्टम जैसी ही जिम्मेदारी निभानी होगी। इन्वेस्टर्स और यूज़र्स के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे केवल registered और compliant platforms का ही उपयोग करें, क्योंकि नियमों की अनदेखी अब न केवल Financial Risk बल्कि कानूनी समस्याएँ भी पैदा कर सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह Financial या Investment Advice नहीं है। किसी भी Crypto Asset में निवेश से पहले अपने Financial Advisor से परामर्श लें। CryptoHindiNews.in किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
Copyright 2026 All rights reserved