गुजरात का बहुचर्चित BTC Scam आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया। स्पेशल एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व MLA नलिन कोटडिया, अमरेली के पूर्व एसपी जगदीश पटेल और पूर्व पुलिस निरीक्षक अनंत पटेल सहित 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने माना कि सभी आरोपी 2018 में सामने आए, 12 करोड़ रुपये मूल्य के 176 Bitcoin (उस समय BTC की कीमत) और 32 लाख रुपये नकद की जबरन वसूली व अपहरण की साजिश में शामिल थे।
यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया, जब सूरत के बिल्डर शैलेश भट्ट ने पूर्व MLA, पूर्व एसपी और पूर्व पुलिस निरीक्षक पर गंभीर आरोप लगाया कि उनसे 176 Bitcoin और 32 लाख रुपये नकद की जबरन वसूली हुई। उनका कहना था कि तत्कालीन पुलिस अधिकारी अनंत पटेल और उनकी टीम ने सरकारी वाहनों का उपयोग कर उनका अपहरण किया। इसके बाद उन्हें गांधीनगर के पास एक स्थान पर ले जाकर बिटकॉइन ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
ट्रांसफर के बावजूद उनसे नकद फिरौती की मांग जारी रही थी। यह आरोप ऐसे समय सामने आए थे जब देश में नोटबंदी के बाद काले धन और डिजिटल एसेट्स पर निगरानी बढ़ गई थी।
इस सनसनीखेज BTC Scam की जांच सीआईडी क्राइम ब्रांच ने की। जांच में तत्कालीन अमरेली एसपी जगदीश पटेल, सूरत के वकील केतन पटेल और अन्य 10 पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी सामने आई।
BTC Scam से जुड़ी पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आया कि पूर्व विधायक नलिन कोटडिया ने ‘फिक्सर’ की भूमिका निभाई और पूरे नेटवर्क को जोड़ने का काम किया।
अगस्त 2024 में Directorate of Enforcement (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई करते हुए खुद शिकायतकर्ता शैलेश भट्ट को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि भट्ट ने भी Bitconnect Scam से जुड़े लोगों का अपहरण कर भारी वसूली की थी।
रिपोर्ट की माने तो, भट्ट ने बिटकनेक्ट प्रमोटर सतीश कुंभानी के दो कर्मचारियों से 2,091 Bitcoin, 11,000 Litecoin और करीब 14.5 करोड़ रुपये नकद वसूले थे।
सतीश कुंभानी पर 2017-18 में Bitconnect नामक क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट में करोड़ों की ठगी करने का आरोप है। जनवरी 2018 में कुंभानी ने अचानक बिटकनेक्ट और उसका लेंडिंग प्लेटफॉर्म बंद कर दिया और निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गया। इस घटना से जुड़े कई फ्रॉड केस गुजरात में सामने आए।
इस पूरे BTC Scam ने न केवल राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका उजागर की, बल्कि यह भी दिखाया कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे डिजिटल एसेट्स का गलत इस्तेमाल कैसे आपराधिक नेटवर्क के लिए साधन बन सकता है।
ACB कोर्ट ने इस मामले में 15 आरोपियों पर सुनवाई की। इनमें से 14 को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया। बचाव पक्ष ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है।
यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था में क्रिप्टो से जुड़े अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मैंने अपने 13 साल के राइटिंग करियर और 3 साल के क्रिप्टो मार्केट के अनुभव में यह देखा है कि भारत में हर बड़े BTC Scam या क्रिप्टो फ्रॉड के पीछे दो चीजें कॉमन रहती हैं, ट्रांसपेरेंसी की कमी और रेगुलेटरी अनक्लियरिटी ।
यह मामला भी दिखाता है कि जब तक क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत में एक मजबूत और स्पष्ट Crypto Regulation नहीं बनेगा, तब तक अपराधी इसका गलत फायदा उठाते रहेंगे।
अपने अनुभव से में यही कह सकता हूँ कि, सरकार को जल्द से जल्द क्रिप्टो को रेगुलेट करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, यूज़र्स को भी अपनी सुरक्षा और निवेश के फैसलों में जिम्मेदारी दिखानी होगी।
गुजरात का यह हाई-प्रोफाइल BTC Scam सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है, बल्कि यह इन्डियन क्रिप्टो इकोसिस्टम के लिए चेतावनी है। इस केस ने साबित किया है कि अगर रेगुलेशन और ट्रांसपेरेंसी नहीं होगी, तो डिजिटल एसेट्स का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर अपराध किए जा सकते हैं।
अब नजर इस बात पर होगी कि गुजरात हाईकोर्ट में इस केस की अपील का क्या परिणाम निकलता है और भारत सरकार क्रिप्टो रेगुलेशन पर किस तरह की ठोस पहल करती है।
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