सोशल मीडिया और Digital Creator Economy में एक नया बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार Meta अपने प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram के लिए एक ऐसा Payout System लॉन्च कर रहा है, जिसमें क्रिएटर्स को USDC Stablecoin में पेमेंट किया जा सकता है। यह सुविधा फिलहाल 160 से ज़्यादा देशों में जैसे Colombia और Philippines में टेस्ट हो रहा है और इसमें Stripe जैसी फिनटेक कंपनियों भी मदद कर रही है। इस सिस्टम को अक्सर “Meta USDC payouts” के नाम से संदर्भित किया जा रहा है। अगर यह बड़े लेवल पर लागू होता है, तो यह क्रिएटर्स के लिए Global Payment System को काफी हद तक बदल सकता है।
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इस संभावित सिस्टम के तहत क्रिएटर्स को अपने Meta Payout Account में एक क्रिप्टो वॉलेट लिंक करना होगा। यह वॉलेट Solana या Polygon Blockchain पर आधारित USDC Stablecoin को सपोर्ट करेगा। MetaMask, Phantom, Binance और Kraken जैसे वॉलेट्स इसके लिए उपयोग किए जा सकते हैं। जब क्रिएटर की अर्निंग रिलीज होगी, तो वह सीधे USDC के रूप में उनके वॉलेट में भेज दी जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि, बैंक ट्रांसफर की देरी और इंटरनेशनल पेमेंट की जो जटिलता कम हो जाएगी।
वहीं ध्यान देने वाली बात यह है कि, इस सिस्टम आ जाने के बाद Meta खुद कोई कैश-आउट सुविधा नहीं देगा। यानी USDC को स्थानीय करेंसी (जैसे INR) में बदलने के लिए यूज़र को किसी Crypto Exchange का सहारा लेना होगा। इसी वजह से यह पूरा मॉडल Meta USDC Payouts के नाम से डिजिटल और Blockchain-Based Payment System माना जा रहा है।
अगर यह सिस्टम भारत में लागू होता है, तो Creators को मौजूदा Crypto Tax Rules का पालन करना होगा। भारत में USDC को Virtual Digital Asset (VDA) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस पर 30% फ्लैट टैक्स लागू है, चाहे प्रॉफिट किसी भी तरह का हो। इसके अलावा हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS भी काटा जा सकता है। जब क्रिएटर USDC को किसी एक्सचेंज पर बेचकर INR में बदलते हैं, तो उस पर Additional Exchange Fees और लगभग 18% GST भी लग सकता है (सर्विस चार्ज पर)। इसका असर यह होगा कि भले ही “Meta USDC payouts” सिस्टम तेज और ग्लोबल हो, लेकिन Indian Creators की नेट अर्निंग काफी कम हो सकती है।
भारत में इस सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती FEMA (Foreign Exchange Management Act) से जुड़ी है। इस कानून के अनुसार विदेश से आने वाला पेमेंट केवल Authorized banking channels के माध्यम से ही स्वीकार किया जा सकता है।
USDC या किसी भी Stablecoin को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा Official Currency नहीं माना गया है। इसलिए Crypto Wallet के माध्यम से सीधे पेमेंट प्राप्त करना FEMA Compliance के नजरिए से समस्या पैदा कर सकता है। इसके अलावा ऐसे ट्रांजैक्शन पर FIRC या e-FIRA जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट भी उपलब्ध नहीं होते, जो एक्सपोर्ट सर्विसेज और टैक्स फाइलिंग के लिए आवश्यक होते हैं। इस वजह से “Meta USDC payouts” भारत में फिलहाल एक अनिश्चित कानूनी स्थिति में आता है और इसे अपनाने से पहले सावधानी जरूरी है।
Meta का यह संभावित USDC Based Payout System क्रिएटर्स के लिए एक बड़ा टेक्निकल बदलाव साबित हो सकता है। यह फ़ास्ट, ग्लोबल और Blockchain-Based Payments की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन भारत जैसे देशों में टैक्स, FEMA और Regulatory regulations की जटिलता के कारण यह आसान नही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे किसी भी सिस्टम को अपनाने से पहले पूरी तरह कानूनी और टैक्स सलाह लेना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की समस्या से बचा जा सके।
Disclaimer: यह Article केवल सूचना (informational) उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार की financial Advice नहीं है। Crypto में निवेश अत्यधिक रिस्की होता है। निवेश से पहले अपना खुद का रिसर्च (DYOR) जरूर करें।
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