Binance के Co-CEO Richard Teng ने कहा है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए साफ और स्थिर नियम बेहद जरूरी हैं। उन्होंने यह बात वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में कही। Teng के अनुसार, भारत पहले ही डिजिटल एसेट्स को अपनाने में दुनिया में आगे है, लेकिन पॉलिसी को लेकर असमंजस इस गति को सीमित कर रहा है।
उनका मानना है कि यदि भारत में स्पष्ट स्ट्रक्चर तैयार होता है, तो देश अमेरिका की तरह तेज़ी से आगे बढ़ सकता है, जहां हाल के वर्षों में Stablecoin का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है। भारत की युवा आबादी और टेक्नोलॉजी के प्रति झुकाव इस सेक्टर को मजबूत आधार देता है।
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Richard Teng ने चेनालिसिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि India Crypto अपनाने के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है। यह स्थिति तब है, जब देश में डिजिटल टोकन को लेकर अभी भी पूरी तरह स्पष्ट कानून मौजूद नहीं हैं।
उनके अनुसार, छोटे निवेशक, डेवलपर्स और टेक-फ्रेंडली यूजर्स लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल कंपनियां भारत को लॉन्ग टर्म मार्केट के रूप में देख रही हैं। टेंग ने कहा कि India का इकोसिस्टम केवल ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्लॉकचेन बेस्ड सॉल्यूशन, पेमेंट सिस्टम और प्रोग्रामेबल फाइनेंस की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है।
Richard Teng ने यह भी साफ किया कि Crypto का मकसद India के UPI सिस्टम को चुनौती देना नहीं है। उनके अनुसार, दोनों का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जा सकता है। UPI डोमेस्टिक ट्रांजैक्शन में बेहद सफल रहा है, जबकि Blockchain आधारित ट्रांसफर सीमाओं के पार काम आते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल टोकन से ऐसे भुगतान संभव होते हैं, जो अपने आप शर्तों के अनुसार पूरे हो सकते हैं। यह सुविधा ट्रेडिशनल सिस्टम में सीमित है। इसी वजह से कई ग्लोबल कंपनियां सीमा-पार ट्रांजैक्शन के लिए इस टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही हैं।
अमेरिका में हालिया कानूनों से डिजिटल एसेट सेक्टर को स्पष्ट दिशा मिली।
स्टेबलकॉइन से जुड़ा स्ट्रक्चर बैंकों और निजी संस्थाओं दोनों के लिए खुला।
AI और Blockchain को एक साथ इस्तेमाल करने पर तेजी से काम हो रहा है।
बड़े संस्थागत निवेशक अब Crypto में ज्यादा इंटरेस्ट दिखा रहे हैं।
डेटा को ज्यादा ट्रांसपेरेंट तरीके से समझने के नए तरीके बन रहे हैं।
साफ नियमों को अब एक बड़ी कॉम्पिटिटिव ताकत माना जा रहा है।
टेंग के मुताबिक, अमेरिकी अनुभव यह दिखाता है कि सही नियम इनोवेशन को रोकते नहीं, बल्कि बढ़ावा देते हैं।
कई देशों में आम लोगों के लिए CBDC को लेकर उत्साह कम हो रहा है।
बैंकिंग से जुड़े जोखिमों के कारण सरकारें ज्यादा सतर्क हैं।
अब ध्यान बड़े ट्रांजैक्शन वाले थोक मॉडल पर जा रहा है।
सेंट्रल बैंकों के लिए यह टेक्नोलॉजी समझने का जरिया बन रही है।
CBDC को निजी डिजिटल एसेट्स का ऑप्शन नहीं माना जा रहा।
पूरी Crypto इंडस्ट्री का आकार चार ट्रिलियन डॉलर के करीब है।
रिचर्ड टेंग ने कहा कि बाइनेंस का लक्ष्य एक बिलियन यूजर्स तक पहुंचना है, जिसमें भारत की भूमिका अहम है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने हाल ही में गोल्ड और सिल्वर बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट्स जोड़े हैं और कई क्षेत्रों में पूर्ण लाइसेंस हासिल किए हैं।
पिछले 7 वर्षों में मैंने देखा है कि India में Crypto को अपनाने की इच्छा हमेशा मजबूत रही है। लेकिन बार-बार बदलती पॉलिसीस ने यूज़र्स और कंपनियों दोनों को भ्रमित किया। अगर नियम साफ हों, तो भारत इस सेक्टर में ग्लोबल लीडर बन सकता है।
India में क्रिप्टो को लेकर मजबूत पकड़ पहले से मौजूद है। युवा आबादी, टेक्निकल समझ और डिजिटल पेमेंट की आदत इस सेक्टर को आगे बढ़ाने की पूरी क्षमता रखती है। Richard Teng का बयान यह साफ करता है कि समस्या अपनाने की नहीं, बल्कि स्पष्ट पॉलिसी की है। यदि भारत स्थिर और ट्रांसपेरेंट नियम बनाता है, तो न सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि देश ग्लोबल डिजिटल फाइनेंस में अहम भूमिका निभा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह न्यूज़ रिपोर्ट केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े फैसले लेने से पहले अपनी रिसर्च करें और किसी योग्य फाइनेंशियल एडवाइजर से एडवाइज जरूर लें। राइटर या वेबसाइट किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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