Updated Date: March 19, 2026
Treasure NFT Withdrawal कब होगा, इस बात को लेकर सभी चिंतित हैं। इसको लेकर Updates और Treasure NFT Real है या Fake, की जांच के क्रम में हमने जो रिसर्च की उनमें कई चौकाने वाले तथ्यों का खुलासा हुआ। आइये जानते हैं इसके Kashmir Connection के बारे में।
Treasure NFT निवेशकों को रोज़ाना करीब 7% तक का फिक्स्ड मुनाफ़ा देने का वादा करता आया है। अगर आप रोज़ाना मिलने वाले ऐसे शानदार मुनाफ़े को देखकर हैरान हो गए, तो ज़रा रुकिए, इतना स्थायी रिटर्न किसी भी असली NFT या क्रिप्टो ट्रेडिंग में संभव ही नहीं है।
किसी भी वाजिब मार्केट या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर रोज़-रोज सात फीसदी या उससे ज़्यादा मुनाफ़े की गारंटी मिलना, सुनने में अच्छा ज़रूर लगता है, पर असलियत में इस तरह का रिटर्न असंभव है।
कई ब्लॉकचेन ऑडिट्स और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स में ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता कि TreasureNFT वाकई AI-Generated trading या NFT की खरीद-बिक्री से ये पैसा कमा रहा है।
इस तरह के भारी-भरकम मुनाफ़े का वादा कई पुराने Ponzi स्कैम्स में भी देखा गया है, जहां निवेशकों का लालच उनका नुकसान कर बैठता है।
Treasure NFT यूज़र्स को नए मेंबर जोड़ने के लिए खासा लुभावने इनाम देने की नीति अपनाता है। असली कारोबार की बजाय, ये प्लेटफॉर्म रेफरल्स और निवेश लाने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाता है। जिन बिज़नेस मॉडल्स में नया पैसा ही पुराने निवेशकों को रिटर्न देने का ज़रिया बन जाए, उन पर हमेशा सवाल उठते हैं। ऐसे सिस्टम सामान्यतः तभी तक चलते हैं, जब तक नए निवेशकों की कतार लगी रहे और जब वो थम जाए, तो पूरा ढांचा ढह जाता है।
सस्टेनेबल और भरोसेमंद NFT प्लेटफॉर्म्स हमेशा असली ट्रांजैक्शन, trading और community engagement पर फोकस करते हैं—not endless recruitment।
BlackRock जैसे बड़े संस्थान या तो ऐसे प्रोजेक्ट्स से कोसों दूर रहते हैं, या पूरी जांच के बाद ही हाथ मिलाते हैं।
संक्षेप में, Treasure NFT के वादे जितने आकर्षक दिखते हैं, असलियत में वो उतने ही अव्यावहारिक और अविश्वसनीय हैं। निवेश से पहले होशियारी बरतना ही समझदारी है!
अब बात करते हैं TreasureNFT के उन फीचर्स और दावों की, जिनकी वजह से लोग इसमें जुड़ने के लिए आकर्षित हो रहे हैं।
यह खुद को एक अगली पीढ़ी का Web3 NFT Marketplace बताता है, जो Blockchain और AI से संचालित है। इसके प्रचार में खास तौर पर कुछ बिंदुओं को हाइलेट किया गया है, जैसे—
ऑटोमेटेड ट्रेडिंग और क्रॉस-चेन सपोर्ट: TreasureNFT दावा करता है कि उसकी प्लेटफॉर्म पर कई Blockchains के NFTs को एक साथ ट्रेड किया जा सकता है। साथ ही, ऑटोमेटेड ट्रेडिंग फीचर के जरिए यूज़र बिना ज्यादा तकनीकी जानकारी के आसानी से ट्रेड कर सकते हैं।
फ्रैक्शनल ओनरशिप: अगर कोई यूज़र बहुत महंगे NFT को नहीं खरीद सकता, तो वो उसके छोटे-छोटे हिस्से यानी fractions खरीद सकता है। इससे आम यूज़र्स को भी महंगे NFTs की कीमत बढ़ने का फायदा मिल सकता है।
छोटे इन्वेस्टमेंट में शुरुआत: इसमें कम अमाउंट के साथ शुरुआत की जा सकती है, जिससे लोगों का रिस्क कम हो जाता है और शुरुआती barrier भी हट जाता है।
रोज़ाना गारंटीड रिटर्न और रिफरल बोनस: कंपनी की ओर से रोजाना निश्चित रिटर्न का वादा किया जाता है। इसके अलावा, अगर आप अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को जोड़ते हैं, तो आपको referral bonuses भी मिलते हैं।
इन दावों और स्कीम्स की वजह से कई नए लोग इसके आकर्षण में आ रहे हैं खास तौर पर जब शुरू में withdrawals आसानी से मिलते हैं, तो लोगों का भरोसा और मजबूत हो जाता है और वे दूसरों को भी जोड़ लेते हैं।
लेकिन कंपनी की लोकेशन और दावों पर अगर बारीकी से नजर डालें, तो कई सवाल भी खड़े हो जाते हैं...
Source: Google TreasureNFT Google Buisness Account पर इसे Online Share Trading Centre के रूप में बताया गया है। जिसका Headquarter Sharjoo, Jammu & Kashmir में है। Sharjoo, J&K के Riyasi जिले में मौजूद एक छोटा सा क़स्बा है, जिसकी कुल आबादी केवल 4000 है।
एक कंपनी जो आज कल BlackRock जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ Partnership करने का दावा कर रही हो, का ऐसी जगह स्थित होना समझ से परे है। इसके साथ ही इससे जुड़े सोशल मीडिया हैंडल के अनुसार Steven Alexender इसका CEO और Founder है, इसे कश्मीर में इस तरह का बिजनेस शुरू करने की परमिशन मिली हो ऐसा होना भी संभव नहीं दिखाई देता।
यह Google Buisness Profile भले ही फर्जी दिखाई देती हो लेकिन इससे जुडी वेबसाइट का TreasureNFT से TreasureFun सीधा कनेक्शन है।
Treasure NFT खुद को एक Decentralized NFT Trading Platform के तौर पर पेश करता है, जहाँ यूज़र्स बिना पूरे टोकन खरीदे High-value NFTs के फ्रैक्शन में निवेश कर सकते हैं। इनके मार्केटिंग दावों में AI Algorithm, NFT Trading और भारी रिटर्न जैसी बातें सामने आती हैं, लेकिन ज़्यादातर मामलों में इन दावों के पीछे कोई प्रमाणिक या ऑडिटेड जानकारी नहीं मिलती।
Referral-Driven Growth: Treasure NFT के प्लेटफार्म पर Referral Commissions काफी ज़्यादा हैं, जिससे Recruitment को बढ़ावा मिलता है। इससे एक पिरामिड जैसा ढांचा बनता है, जहाँ असली NFT खरीद-बिक्री की बजाय नए निवेशकों को जोड़ने पर ज़ोर रहता है।
Early Success का illusion: शुरूआत में छोटे Withdrawals और Payouts आसानी से प्रोसेस कर दिए जाते हैं ताकि लोगों का भरोसा बने और वे दूसरों को भी जोड़ें।
Withdrawals में देरी: जैसे-जैसे नए निवेशकों की संख्या घटती है, Withdrawal Requests या तो डिले होती हैं या पूरी तरह रोक दी जाती हैं। कई यूज़र्स ने फंड फंसने की शिकायतें की हैं।
Treasure NFT अपने NFT Trades, अकाउंट, या ब्लॉकचेन वॉलेट की कोई ऑडिटेड डिटेल्स सार्वजनिक नहीं करता। इससे पता चलता है कि असली ट्रेडिंग कम और Referral-based Fund Collection ज्यादा है।
Treasure NFT के operations में वो सारे क्लासिक लक्षण मिलते हैं जो एक Ponzi Scheme में होते हैं। नए निवेशकों के पैसों से पुराने निवेशकों को भुगतान, असली प्रोडक्ट या सर्विस से ज्यादा Referral-based कमाई, और Financial Transparency की पूरी कमी।
अब जब कई यूज़र्स अपने फंड फंसे होने की शिकायत कर रहे हैं, तो सवाल उठता है कि क्या यह प्लेटफॉर्म सच में इस छोटे से कस्बे से ऑपरेट हो रहा है या नहीं, यह जांच का विषय है।
बने रहिए भरोसेमंद NFT Marketplaces के साथ
NFT खरीदते या बेचते समय हमेशा ऐसे Marketplace चुनें, जिनकी अच्छी रेपुटेशन और लंबा इतिहास रहा हो—जैसे OpenSea, Rarible, या Foundation। ऐसे प्लेटफार्म पर ट्रांजेक्शन और डेटा सिक्योरिटी की बेहतर व्यवस्था होती है, और इन पर पहले से लाखों ट्रांजेक्शन हो चुके हैं। अगर कभी कोई दिक्कत पेश आती है, तो यूज़र्स को शिकायत या सहायता पाने का आसान रास्ता भी मिलता है।
इसके विपरीत, अनजाने या नए-नवेले NFT प्लेटफार्म जोखिम भरे साबित हो सकते हैं। इनमें से कई बिना किसी रेगुलेशन या समीक्षा के सामने आ जाते हैं, जिनकी वजह से फण्ड्स फंसने, फ्रॉड या डेटा लीक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इतनी बड़ी संख्या में यूज़र्स और डिस्कशन वाले Established प्लेटफॉर्म पर Community Trust अपने आप बन जाता है—जबकि नए प्लेटफार्म भरोसे के मामले में अक्सर फिसड्डी निकलते हैं।
इसलिए, NFT से जुड़े किसी भी इन्वेस्टमेंट या ट्रांजेक्शन के लिए बेहतर है कि भरोसेमंद और पूर्व स्थापित NFT Marketplace का ही चुनाव करें।
अगर आप सोच रहे हैं कि Treasure NFT को लेकर बाहर क्या राय है, तो यहां ज़्यादातर समीक्षाओं में इसकी काफी आलोचना देखने को मिली है।
कई स्वतंत्र समीक्षकों और यूज़र्स ने लगातार शिकायत की है कि इस प्लेटफार्म से जुड़े Withdrawal पर परेशानी आती है।
इसके संचालन में पारदर्शिता की कमी, अस्पष्ट नियम-कायदे और फंड्स के अटकने जैसी कई बातें लोगों को परेशान कर रही हैं।
इन सब संकेतों से यही जाहिर होता है कि Treasure NFT को लेकर बहुत सारी शंकाएँ हैं। भरोसेमंद प्लेटफार्म के पैमाने पर यह अभी तक खरा नहीं उतरता। यही वजह है कि एक्सपर्ट और रेग्युलर यूज़र दोनों ही इसकी वैधता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि Treasure NFT की ऑनलाइन रेटिंग्स और यूज़र रिव्यूज़ पर कितना भरोसा किया जा सकता है। अगर आप App Store या Trustpilot पर इसकी प्रोफाइल देखें, तो अधिकतर रिव्यूज़ हैरान करने वाले तरीके से पॉज़िटिव मिलेंगे।
हमारी जांच में ऐसा संकेत मिला है कि इनमें से कई रिव्यू फर्जी या पेड हैं—यानि असली ग्राहकों की राय नहीं, बल्कि इमेज चमकाने के लिए लिखे गए हैं। कई क्रिप्टो विशेषज्ञों ने भी इन रेटिंग्स की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है।
इन फर्जी तारीफों की वजह से आम निवेशक आसानी से भ्रमित हो सकते हैं और बिना पूरी जांच-पड़ताल के पैसा लगा सकते हैं। ऐसे माहौल में ईमानदार रिव्यू अक्सर दब जाते हैं और नई पसर्न्स को सचाई समझना मुश्किल हो जाता है।
तो अगर Treasure NFT की App Store या Trustpilot पर सिर्फ 5 स्टार रेटिंग्स देख रहे हैं, तो सतर्क रहें—यह जरूरी नहीं कि सारी समीक्षाएं असली यूज़र्स की हों।
अगर बात करें कि Treasure NFT प्लेटफॉर्म पर असल में NFT ट्रेडिंग कितनी हो रही है, तो फैंसी दावों के विपरीत यहां ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही है।
अब तक जितने भी प्रमोशनल पोस्ट और दावे किए गए हैं, उनमें से बहुत कम बातों पर ठोस या वेरीफाइड साक्ष्य मिले हैं।
इनके 'AI एल्गोरिद्म' के बारे में कोई ऑथेंटिक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है, और प्लेटफार्म के फाउंडर/टीम के बारे में भी सिर्फ सोशल मीडिया हैंडल्स पर नाम सामने आते हैं, मगर उनकी वैधता संदेहास्पद है।
सबसे अहम बात जितना ट्रेडिंग वॉल्यूम प्लेटफार्म पर दिखाया जाता है, वह बड़े और विश्वसनीय NFT प्लेटफार्मों की तुलना में बेहद कम है। यहां यूज़र असल में NFT खरीदने-बेचने के बजाए, ज्यादा तर डिपॉजिट कराने या नए लोगों को रेफरल के ज़रिए जोड़ने में लगे नज़र आते हैं।
यानी, Treasure NFT पर NFT ट्रेडिंग का स्तर काफी सीमित है और ज़्यादातर गतिविधियाँ प्रमोशनल, डिपॉजिट और रेफरल इनसेंटिव तक ही सीमित रह जाती हैं।
अब आते हैं एक और गंभीर मुद्दे पर इसका कस्टमर सपोर्ट। अगर आपने कभी इस प्लेटफॉर्म पर सवाल या समस्या के लिए मदद मांगी हो, तो शायद आपको भी उसी “आपकी कॉल हमारे लिए ज़रूरी है” वाले अनुभव का एहसास हुआ हो, जो अक्सर सरकारी दफ्तरों में मिलता है।
यूज़र्स की मानें तो प्लेटफार्म के सपोर्ट सिस्टम में या तो जवाब मिलता ही नहीं, या फिर मिलने में इतनी देर हो जाती है कि तब तक मुद्दा पुराना पड़ जाता है। खासकर जब पैसा फंसा हो या Withdrawal में समस्या हो, तब सहायता की उम्मीद बेमानी साबित होती है।
अधिकांश वैध कंपनियाँ जैसे Zerodha, Groww वगैरह अपने कस्टमर को त्वरित जवाब देती हैं और समस्याओं के निस्तारण के लिए कई चैनल उपलब्ध कराती हैं। वहीं, TreasureNFT प्लेटफार्म पर यह पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी नज़र नहीं आती।
इस संवादहीनता के चलते यूज़र्स का विश्वास लगातार कमज़ोर हो रहा है और निवेशकों में असंतोष बढ़ रहा है।
इस प्लेटफार्म से जुड़े कई हैंडल से पिछले कुछ दिनों से Blackrock जैसे प्रतिष्ठित एसेट मेनेजर के साथ पार्टनरशिप की बात कही जा रही है। ऐसे बड़े और प्रतिष्ठित प्लेटफार्म के साथ कनेक्शन के कारण यूज़र्स का भरोसा इसपर फिर से लौटने की सम्भावना थी। लेकिन हमने जांच में पाया Blackrock Treasure NFT Acquisition की खबर फर्जी है। इस तरह के किसी भी इन्वेस्टमेंट का जिक्र Blackrock द्वारा नहीं किया गया है।
Treasure NFT के रेफरल सिस्टम ने उसकी वैधता पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से प्लेटफार्म नए यूज़र्स को लाने और पुराने यूज़र्स को इनाम देने के लिए मोटी कमिशन और बोनस देता है, वह सामान्य एनएफटी प्लेटफार्म से अलग नजर आता है।
यह मॉडल देखने में पिरामिड स्कीम या पॉन्ज़ी स्कीम जैसा दिखता है, जिसमें असली मुनाफा एनएफटी की खरीद-बिक्री से नहीं बल्कि नए लोगों की जमा राशि से मिलता है। शुरुआत में जब तक लोग जुड़ते रहते हैं और निकासी की इजाजत मिलती रहती है, तब तक लोगों का भरोसा बना रहता है। मगर जैसे ही नए जॉइन करने वालों की रफ्तार कम होती है या विड्राल में देरी होने लगती है, तब शक की सुई इस तरह के प्लेटफार्म पर घूम जाती है।
रेफरल के ज़रिए सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में प्रमोशन को बढ़ावा मिलता है, जिससे समुदाय के लोगों को सुरक्षित अनुभव का भ्रम होता है।
ऊंची रेफरल कमाई के चलते असल कारोबार एनएफटी ट्रेडिंग नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना बन जाता है।
ऐसे में असली ट्रांजैक्शन की तुलना में नए सदस्य लाना ही प्राथमिकता बन जाती है, जो किसी भी लॉन्ग-टर्म, भरोसेमंद प्लेटफार्म की पहचान नहीं है।
रेफरल सिस्टम जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही यह इस पूरे ऑपरेशन की पारदर्शिता और भरोसे को लेकर शक पैदा करता है खासतौर पर तब जब संपत्ति की निकासी महीनों तक अटकी हो।
प्लेटफार्म से विड्रोल के लिए कई महीनों से यूज़र्स इन्तजार कर रहे हैं लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। कंपनी ने Nova NFT पर इसके डाटा माइग्रेशन की बात कही है।
हालांकि कई महीनों से यह मामला ऐसे ही अटका हुआ है, इसके पहले 1 November और 1 December 2025 को विड्राल की बात कही गयी थी। लेकिन अब भी इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
यूज़र्स ने बताया कि प्लेटफार्म समय-समय पर Withdrawal खोलने की घोषणा करता है, लेकिन कुछ समय बाद फिर से इसे सस्पेंड कर देता है। कई बार विड्रॉल के लिए कुछ शर्तें रखी जाती हैं, जैसे हर दिन निश्चित संख्या में ट्रेड करने की आवश्यकता, या कुछ अतिरिक्त डिपॉजिट करने का दबाव, जिनकी जानकारी भी बेहद अस्पष्ट रहती है। इस तरह की रणनीति कंपनियां अक्सर पेआउट को टालने और यूज़र्स को लगातार एक्टिव रखने के लिए अपनाती हैं।
यूज़र्स को कई बार अकाउंट लॉक होने, विड्रॉल रिक्वेस्ट रिजेक्ट होने, या समझ में न आने वाले एरर मैसेज मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इस तरह की विड्रॉल समस्याएं आमतौर पर उन प्लेटफॉर्म्स पर देखी जाती हैं जिनपर लिक्विडिटी को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं, खासकर वहां जहां पोंजी जैसी स्कीम्स का शक हो।
भले ही Bengal Police ने इसे पोंजी स्कीम घोषित कर इस पर कार्यवाही की हो लेकिन यह मामला इससे बड़ा हो सकता है। क्रिप्टो मार्केट में अपने 6 वर्षों के अनुभव के आधार पर में यह कह सकता हूँ की जिस तरह से यह प्लेटफार्म तारीख पर तारीख दे रहा है, यह एक बड़े स्केम में बदल सकता है।
हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि कितने यूज़र्स का कितना पैसा इसमें फंसा है, लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में इन्वेस्टर्स फण्ड इसमें फंसे हुए हैं। जिसका वास्तविक आंकड़ा या तो कंपनी के द्वारा खुलासा करने या किसी मजबूत जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—NFT प्लेटफॉर्म्स पर रोज़ाना 7% या तय ऊंचा रिटर्न आखिर संभव कैसे है? हकीकत यह है कि क्रिप्टो या NFT ट्रेंड में निश्चित और लगातार ऊंचे मुनाफे की गारंटी कोई भी जायज सिस्टम नहीं दे सकता।
असली ट्रेडिंग सिस्टम में, प्रॉफिट और लॉस दोनों नियमित आते हैं, न तो बाज़ार में रोज़ कमाई की कोई स्कीम है, न ही कोई AI इतनी सटीक ट्रेडिंग रोज़ कर सकता है कि सबको फिक्स मुनाफा मिले।
ब्लॉकचेन पर पब्लिक रिकॉर्ड्स और इंडिपेंडेंट ऑडिट आसानी से दिखा सकते हैं कि असल में कितना ट्रेड हो रहा है। ऐसे कई केस में, प्लैटफॉर्म के दावे और असल आंकड़े दोनों मेल नहीं खाते।
पुराने स्कैम्स जैसे Bitconnect, GainBitcoin, और PlusToken ने भी इसी ट्रिक का इस्तेमाल किया था, यूज़र्स को हाई और फिक्स प्रॉफिट का लालच देकर पैसा जुटाना, जब तक नया पैसा आता रहा, तब तक सिस्टम चलता रहा।
सच तो यह है कि क्रिप्टो या NFT की दुनिया में हर वादा, जो "हाई और गारंटीड रिटर्न" का हो, ज़्यादातर एक खतरे की घंटी है। असली इन्वेस्टिंग में, जितना ज्यादा रिटर्न वादा किया जाए, उतना ही बड़ा जोखिम छुपा होता है।
Treasure NFT के केस से साफ है कि किसी भी डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफार्म पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। अगर आप भी NFT, Web3 या Crypto में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो नीचे दिए गए बिंदुओं पर जरूर ध्यान दें:
1. टीम और संस्थापकों की पारदर्शिता जांचें
कोई भी भरोसेमंद NFT प्रोजेक्ट अपनी टीम, संस्थापक और मुख्य एक्सपर्ट्स की जानकारी सार्वजनिक रखता है।
टीम मेंबर्स के नाम, उनके पुराने प्रोजेक्ट्स या उनकी प्रोफाइल (जैसे LinkedIn, Twitter) आसानी से मिलनी चाहिए।
यदि टीम के सदस्य छुपे हुए हैं या उनकी कोई वैरिफाइबल हिस्ट्री नहीं है, तो यह खतरे का संकेत है।
2. बिज़नेस मॉडल को समझें
ऐसी कंपनियां जो बस नए लोगों को जोड़ने या किसी भी हालत में फिक्स्ड रिटर्न देने का वादा करती हैं, अक्सर स्कैम होती हैं।
असली NFT प्रोजेक्ट्स में वैल्यू क्रिएशन और प्रोडक्ट डिलीवरी मुख्य होती है।
यदि कमाई सिर्फ नए जॉइन करने वालों के पैसे से हो रही है, तो वह पोंजी स्कीम जैसा मामला हो सकता है।
3. ट्रांजैक्शन एक्टिविटी क्रॉसचेक करें
सही NFT प्रोजेक्ट्स की सारी खरीद-फरोख्त पब्लिक ब्लॉकचेन पर दिख जाती है।
हमेशा NFT के ऑन-चेन डेटा, ट्रेडिंग हिस्ट्री या थर्ड-पार्टी ऑडिट रिपोर्ट देखें।
मुंहफट वादों की बजाए असली ट्रांजैक्शन हमेशा ब्लॉकचेन पर पब्लिक होती है।
4. पहले Withdrawal टेस्ट करें
कहीं भी बड़ी राशि जमा करने से पहले थोड़े पैसे का Withdrawal खुद ट्राय करें।
प्रोसेस आसान और तात्कालिक होनी चाहिए—अगर कंपनी पल्ला झाड़े, डेट आगे बढ़ाए या जवाब गोलमोल दे, तो सतर्क हो जाएं।
Genuine प्लेटफार्म्स कभी भी Withdrawal में अड़चन नहीं डालते।
5. सिर्फ Reputed और पॉपुलर मार्केटप्लेस का ही भरोसा करें
जैसी OpenSea और Rarible जैसी Internationally trusted NFT Sites उन पर ही हमेशा खरीद-बिक्री करें।
Unheard या नई वेबसाइट्स (जिन पर कम या न के बराबर यूज़र रिव्यू हैं) से दूर रहें।
पॉपुलर प्लेटफार्म्स में आमतौर पर यूज़र प्रोटेक्शन और इंडिपेंडेंट वेरीफिकेशन की सुविधा मिलती है।
सावधानी सबसे बड़ा रास्ता:
किसी भी स्कीम में खासकर Treasure NFT जैसे मामले देखने के बाद Blind Faith की बजाय समझदारी, अच्छे से रिसर्च और ट्रांसपेरेंसी पर सबसे ज्यादा भरोसा करें। अगर CEO, Address, Withdrawal Process, या ट्रेडिंग डेटा को लेकर कुछ भी अस्पष्ट है, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं।
Treasure NFT से जुड़े खुलासे, जैसे कश्मीर के छोटे कस्बे में दर्ज बिज़नेस लोकेशन से लेकर BlackRock पार्टनरशिप जैसी गलत खबरों तक स्पष्ट संकेत देते हैं कि यह प्लेटफॉर्म गंभीर संदेहों के घेरे में है। महीनों से अटके विड्रॉल और लगातार बदलती तारीखें इस पूरे मामले को साधारण पोंजी स्कीम से भी बड़ा बना रही हैं। वास्तविक स्थिति तभी सामने आएगी जब विस्तृत जांच हो और कंपनी ट्रांसपेरेंसी के साथ जानकारी दे।
कुछ भी हो यह बात तो स्पष्ट है कि यूज़र्स को इस प्लेटफार्म को लेकर बहुत ही सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल एजुकेशनल पर्पस से लिखी गयी है। क्रिप्टो मार्केट वोलेटाइल है, किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी रिसर्च जरुर करें।
ऐसे NFT स्कैम से कैसे बचें
Treasure NFT जैसे मामलों के बाद यह समझना जरूरी है कि NFT और डिजिटल एसेट्स में इन्वेस्ट करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाए, ताकि आप अपने फंड्स को सुरक्षित रख सकें।
1. टीम और प्रोजेक्ट की पारदर्शिता जाँचें
किसी भी NFT प्रोजेक्ट की टीम के बारे में जानना जरूरी है। विश्वसनीय प्लेटफॉर्म्स अपने फाउंडर्स, टीम मेंबर्स और एक्सपर्ट्स की जानकारी सार्वजनिक रखते हैं। उनकी पिछली ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स और प्रोफाइल (जैसे LinkedIn) वेरिफाई करें। यदि टीम गुमनाम या संदिग्ध है, तो दूर रहें।
2. बिज़नेस मॉडल को समझें
लीगल NFT कंपनियां रियल वैल्यू देने और यूज़र्स को लॉन्ग-टर्म एंगेजमेंट देने पर फोकस करती हैं, सिर्फ़ नए यूज़र्स जोड़ने या गारंटीड हाई रिटर्न्स का वादा करने वाली स्कीम्स पर नहीं। ऐसे वादों से सतर्क रहें, जहां रिटर्न्स मार्केट रियलिटी से मेल नहीं खाते।
3. ट्रेडिंग एक्टिविटी की पुष्टि करें
NFT प्लेटफॉर्म की ट्रेडिंग एक्टिविटी ब्लॉकचेन पर वेरिफाई करें। सही प्लेटफॉर्म्स के पास ऑडिटेड डॉक्युमेंट्स और रियल-टाइम लिस्टिंग होती हैं। केवल इन-हाउस सर्कुलेशन या गुप्त ट्रांजैक्शन वाले प्लेटफॉर्म्स से बचें।
4. विड्रॉल टेस्ट करें
कोई भी बड़ा इन्वेस्टमेंट करने से पहले छोटे अमाउंट से विड्रॉल टेस्ट करें। अगर विड्रॉल में बार-बार देरी या बहानेबाजी हो रही है, तो यह प्लेटफॉर्म की सॉल्वेंसी पर सवाल खड़े करता है। अच्छे प्लेटफॉर्म्स पर विड्रॉल प्रोसेस आसान और ट्रांसपेरेंट होता है।
5. भरोसेमंद मार्केटप्लेस का इस्तेमाल करें
OpenSea, Rarible जैसे स्थापित NFT मार्केटप्लेस का चुनाव करें, जहां सेफ्टी, ट्रैक रिकॉर्ड और पॉजिटिव यूज़र रिव्यूज मिलते हैं। कम-ज्ञात और संदिग्ध साइट्स से दूर रहें, जिनकी कम्युनिटी में कोई साख नहीं है।
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