Updated Date: March 19, 2026
पिछले कुछ महीनो से सोशल मीडिया पर “Treasure NFT Withdrawal कब होगा?” यह सवाल बार-बार ट्रेंड कर रहा था। कई यूजर्स ने X पर शिकायत की थी कि उनके फंड्स फंसे हुए हैं और विड्रॉल रिक्वेस्ट का कोई जवाब नहीं मिल रहा। लेकिन अब TreasureNFT ने Nova NFT पर डाटा ट्रान्सफर गेंद अपने पाले से ही हटा दी है।
इसके इस पोस्ट से ठीक पहले, कुछ अकाउंट्स ने यह दावा किया था कि TreasureNFT को BlackRock ने Acquisition किया है, यह दावा बाद में फेक निकला। इस बीच टीम ने स्पष्ट किया कि विड्रॉल प्रोसेस को सेफ और ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए उसे अस्थायी रूप से रोका गया था। टीम ने यूजर्स को भरोसा दिलाते हुए कहा, आपका विश्वास हमारे लिए सब कुछ है। निकासी को फिर से शुरू करने से पहले, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह से सेफ और ट्रांसपेरेंट हो। लेकिन यह केवल बातें निकली और अब 2026 में यही स्थिति है और लोग अब भी Treasure NFT से Withdrawal का इन्तजार कर रहे हैं. इस बीच प्लेटफार्म ने Nova NFT नाम से ठगी का नया रास्ता ढूंढ लिया है. हाल ही में Chandigarh और Pakistan से आई ख़बरों के अनुसार इसके इवेंट्स फिर से शुरू हो गए हैं. लेकिन Treasure NFT Withdrawal अब भी नहीं शुरू हुआ है.
इस बयान से साफ है कि Treasure NFT Withdrawal शुरू होने की सम्भावना लगभग ख़तम हो चुकी है, दूसरी तरफ NovaNFT भी Withdrawal से पहले डिपाजिट की मांग कर रहा है, लेकिन इस बार टीम सिक्योरिटी और प्रोसेस की ट्रांसपेरेंसी पर विशेष ध्यान दे रही है।
कई यूजर्स अब भी यह जानना चाहते हैं कि क्या उनका फंड सेफ है। पहले TreasureNFT ने कहा था कि “सभी अकाउंट्स को कंपन्सेट किया जाएगा,” लेकिन अब इसकी सम्भावना भी लगभग ख़तम ही मानी जा सकती है।
यदि आप Treasure NFT Withdrawal प्रोसेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो ध्यान रखें कि प्लेटफॉर्म की Privacy Policy कुछ महत्वपूर्ण बातें कहती है।
प्लेटफॉर्म यूजर डेटा को थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ शेयर कर सकता है।
किसी भी लॉ, मर्जर या रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट की स्थिति में डेटा ट्रांसफर हो सकता है।
वेबसाइट यह भी कहती है कि वह थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स या लिंक्ड सर्विसेज के लिए जिम्मेदार नहीं होगी।
इसका मतलब है कि अगर किसी थर्ड-पार्टी लिंक के जरिए कोई लॉस या डेटा मिसयूज होता है, तो TreasureNFT उस नुकसान की जिम्मेदारी नहीं लेगा। ऐसे में NovaNFT पर डाटा ट्रान्सफर करके ट्रेज़र की टीम ने यूज़र्स के फण्ड से पल्ला झाड़ लिया है।
पहले कई भारतीय यूजर्स ने रिपोर्ट किया था कि उन्हें Treasure NFT Withdrawal रिक्वेस्ट के बाद कन्फर्मेशन मेल मिल रहा है, लेकिन फंड रिलीज़ नहीं हुआ।
हालांकि, कई इन्वेस्टर्स का अनुभव काफी अलग है। कुछ निवेशकों ने बताया कि खास तौर पर शुरुआती यूजर्स या जिनके पास नए रेफरल्स हैं, वे अपने फंड्स विड्रॉ कर पा रहे हैं, जबकि बाकी यूजर्स को “टेक्निकल इश्यू” या डिले की वजह बताकर इंतजार करवाया जा रहा है। यह सिलेक्टिव विड्रॉल पैटर्न अक्सर उन फाइनेंशियल स्कैम्स में देखा गया है, जहां शुरुआत में कुछ भुगतान करके प्लेटफॉर्म ट्रस्ट बिल्ड करता है, लेकिन बाद में विड्रॉल प्रोसेस को मुश्किल बना देता है।
इसी कारण कई यूजर्स अब भी अपने विड्रॉल स्टेटस को लेकर परेशान हैं। टीम ने स्पष्ट किया कि वे “एक्टिव स्टेप्स” ले रहे हैं ताकि कोई यूजर मिसलीड न हो। इसका मतलब यह है कि प्लेटफॉर्म यूजर-कम्युनिकेशन में सुधार कर रहा है।
Treasure NFT Withdrawal का मॉडल एनएफटी-बेस्ड रिवार्ड्स और हाई रिटर्न्स पर टिका है। शुरुआती दिनों में इसने भारतीय यूजर्स को तेज़ रिटर्न का वादा किया था। प्लेटफॉर्म ने यूजर्स को डेली रिटर्न्स 4.3% से लेकर 6.8% तक देने का दावा किया जो कि आमतौर पर बाजार में मिलने वाले रिटर्न्स से काफी ज्यादा है।
सिर्फ इतना ही नहीं, Treasure NFT ने मल्टी-लेवल रेफरल सिस्टम भी अपनाया, जिसमें यूजर्स को नए लोगों को जोड़ने पर अतिरिक्त बेनिफिट्स मिलते थे। ऐसे मॉडल्स अक्सर लोगों को जल्दी-जल्दी इन्वेस्ट करने और अपने नेटवर्क को बढ़ाने के लिए इंसेंटिव देते हैं।
इन हाई रिटर्न्स और रेफरल स्कीम्स की वजह से प्लेटफॉर्म ने भारत में तेजी से लोकप्रियता हासिल की, लेकिन साथ ही इससे इसकी लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी को लेकर सवाल भी उठने लगे। लेकिन जब Treasure NFT Withdrawal बंद हुए, तो प्लेटफॉर्म की ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठे।
हाल ही में उनकी टीम ने माना कि उन्हें “Risk-Control Issues” पर बेहतर कम्युनिकेशन करने की जरूरत है। यह कन्फेशन यह दिखाता है कि टीम यूजर्स का भरोसा फिर से जीतना चाहती है। फिलहाल प्लेटफॉर्म ने कहा है कि हम कम्युनिकेशन को ठीक करने और ट्रांसपेरेंसी एन्स्योर करने के लिए पहले से ही एक्टिव स्टेप्स उठा रहे हैं।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स बार-बार यह चेतावनी देते रहे हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स, जो ज्यादा रिटर्न का वादा करते हैं और Treasure NFT Withdrawal मॉडल लगातार नए इन्वेस्टर्स पर टिका है, वे खतरे की घंटी हो सकते हैं। जैसे ही नए इन्वेस्टमेंट की रफ्तार धीमी पड़ती है, इन प्लेटफॉर्मस के लिए पुराने यूजर्स को पेमेंट करना मुश्किल हो जाता है। इससे इन्वेस्टर्स के फंड फंस सकते हैं और पोंजी स्कीम जैसा रिस्क पैदा हो सकता है।
अगर फंड फ्लो रुक जाए, तो इन्वेस्टर्स को पेआउट मिलना अनिश्चित हो जाता है।
ऐसे केस में कंपनियाँ अक्सर कम्युनिकेशन स्लो कर देती हैं।
वित्तीय अस्थिरता के चलते अचानक विड्रॉल रोकना पड़ सकता है।
इसलिए, हाई-रिटर्न मॉडल पर काम करने वाले किसी भी प्लेटफॉर्म में निवेश करने से पहले एक्सपर्ट्स हमेशा सावधानी बरतने की सलाह देते हैं—खासतौर पर जब प्लेटफॉर्म का बिज़नेस मॉडल केवल नए यूजर्स के पैसे से प्रोमिस्ड रिटर्न देने पर निर्भर करता हो।
सिलेक्टिव Treasure NFT Withdrawal पैटर्न आमतौर पर तब नजर आता है, जब प्लेटफॉर्म शुरूआती यूजर्स या नए रेफरल लाने वालों को इक्ज़िट (विड्रॉल) की अनुमति देता है, जबकि बाकी यूजर्स को तकनीकी दिक्कतों या अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए इंतजार करवाया जाता है।
आमतौर पर, ऐसे पैटर्न फाइनेंशियल स्कैम या पोंजी स्कीम्स में देखने को मिलते हैं, जहाँ:
शुरूआती निवेशकों को उनके फंड वापस कर असली भरोसा बनाया जाता है।
नए यूजर्स को देखकर विड्रॉल प्रोसेस को सहज दिखाया जाता है।
जैसे-जैसे यूजरबेस बढ़ता है, फंड विड्रॉल में देरी और बहानेबाजी बढ़ जाती है।
अंत में, ज़्यादातर यूजर्स को पैसे वापस नहीं मिलते।
पोंजी स्कीम में, पुराने निवेशकों को नए निवेशकों के पैसे से भुगतान होता है—इसलिए शुरुआत में कुछ यूजर्स के पैसे लौटाना जरूरी होता है ताकी प्लैटफॉर्म की विश्वसनीयता बनी रहे। अगर किसी प्लेटफॉर्म पर यही सिलेक्टिव विड्रॉल ट्रेंड दिखे तो वहां सतर्क रहना चाहिए और पूरी तरह से जांच-पड़ताल करनी जरूरी है। हालांकि सबसे बड़ी बात यह है कि West Bengal Police Treasure NFT को Ponzi Scheme घोषित कर चुकी है।
यहाँ भी, कुछ यूजर्स को ट्रांजेक्शन पूरा होने की पुष्टि मिल रही है, जबकि अन्य लगातार Treasure NFT Withdrawal इंतजार कर रहे हैं—ऐसी स्थिति में सतर्कता बरतना सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
Treasure NFT का रिवार्ड मॉडल सिर्फ हाई डेली रिटर्न्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मल्टी-लेवल रेफरल सिस्टम भी शामिल है। इस सिस्टम के तहत यूजर्स को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे नए यूजर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ें। जैसे ही कोई नया यूजर आपके रेफरल के जरिए साइन अप करता है और इन्वेस्ट करता है, आपको उसकी इन्वेस्टमेंट का एक हिस्सा कमीशन के रूप में मिलता है।
यह चेन आगे बढ़ती है—मतलब, जितने ज्यादा लोग आपके लिंक से जुड़ते हैं और फिर आगे अपने रेफरल्स बनाते हैं, उतना ही आपका नेटवर्क फैलता है और आपकी कमाई बढ़ती है। ये मल्टी-लेयर स्ट्रक्चर वैसा ही है जैसा Amway, Herbalife जैसी कंपनियों के सेल्स मॉडल में देखने को मिलता है, लेकिन जब यही स्ट्रक्चर हाई रिटर्न्स और इन्वेस्टमेंट के नाम पर आता है, तो इसमें रिस्क काफी बढ़ जाता है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने बार-बार चेताया है कि ऐसे सिस्टम्स में असली दिक्कत तब शुरू होती है, जब नए इन्वेस्टर्स की संख्या घटती है। Treasure NFT Withdrawal मॉडल नए फंड्स के लगातार आने पर निर्भर करता है। जैसे ही फ्रेश इन्वेस्टमेंट की स्पीड धीमी पड़ती है, पुराने यूजर्स को रिवार्ड या विड्रॉल देना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर Ponzi स्कीम्स का शक गहराता है—क्योंकि इसी मॉडल का इस्तेमाल पहले कई हाई प्रोफाइल स्कैम्स (जैसे Bitconnect, PlusToken) में देखा गया है।
यानि अगर रेफरल चेन रुक गई, तो पूरी प्रणाली में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे सिस्टम्स में शामिल होने से पहले, हर यूजर को इसका रिस्क जरूर समझ लेना चाहिए।
अपने क्रिप्टो मार्केट में राइटर के तौर पर कार्य करने के अनुभव से कहूँ तो Treasure NFT Withdrawal का इन्तजार शायद ही कभी ख़त्म होने वाला है। लेकिन यूजर्स को सतर्कता बरतनी चाहिए। अब यह प्लेटफार्म NovaNFT के नाम से फिर से Deposit के बाद Withdrawal शुरू करने की बात कर रहा है और हाल ही में इसने यूज़र्स को लुभाने के लिए Nova NFT ने Eid के मौके पर Exclusive Reward Program शुरू किया है।
किसी भी प्लेटफॉर्म में इन्वेस्टमेंट से पहले यह समझना जरूरी है कि “आपका डेटा और फंड किस हद तक सुरक्षित है।” टीम ने भरोसा दिया है कि सभी अकाउंट्स को कंपन्सेट किया जाएगा, लेकिन असली भरोसा तभी बनेगा जब सभी Treasure NFT Withdrawal क्लियर हो जाएंगे।
Treasure NFT Withdrawal का इन्तजार कर रहे इन्वेस्टर्स को अब एक नए प्लेटफार्म के साथ इसे लेकर लड़ाई लड़नी है। दूसरी ओर पहले से अपनी प्राइवेसी पालिसी में थर्ड पार्टी के जुड़ने के बाद प्लेटफार्म ने अपनी जिम्मेदारी न होने की बात कही है। प्लेटफार्म भले बदल गए हो लेकिन सवाल अब भी बने हुए की विड्रोल कब से शुरू होंगे ओर इन प्लेटफार्म पर कभी कार्यवाही भी होगी।
हालांकि भविष्य में यदि टीम अपने वादे के अनुसार कंपन्सेशन और ट्रांसपेरेंट विड्रॉल प्रोसेस देती है, तो यह प्लेटफॉर्म के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर – यह प्लेटफ़ॉर्म लम्बे समय से अपने ट्रांसपेरेंसी और सेफ्टी प्रोसेस से जुड़ी आलोचनाएं झेल चुका है, ऐसे में निवेश से जुड़ी योजना बनाने से पहेल DYOR करना बेहद जरूरी है।
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