कोई भी रिसोर्स अगर लिमिटेड हो और उसकी डिमांड लगातार बनी रहे, तो उसका वैल्यू समय के साथ बढ़ती है, यही कांसेप्ट Bitcoin में भी लागू किया गया है। इसे इम्प्लीमेंट करने के लिए एक ख़ास तरीका अपनाया गया है जिसे Bitcoin Halving कहा जाता है।
लेकिन Bitcoin Halving सिर्फ़ एक टेक्निकल प्रोसेस नहीं, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी की पूरी इकोनोमी को प्रभावित करता है क्योंकि आज भी Bitcoin का मार्केट डोमिनेंस क्रिप्टो मार्केट में 60% से अधिक है, इस प्रोसेस का इम्पैक्ट इन्वेस्टर, डेवलपर्स, माइनर और पूरे Web3 इकोसिस्टम पर पड़ता है।
Bitcoin Halving का मतलब है, बिटकॉइन माइनिंग के लिए मिलने वाले रिवॉर्ड को आधा कर देना।
जब कोई माइनर Bitcoin की Blockchain पर एक नया Block बनाता है, तो उसे नेटवर्क की ओर से एक फिक्स्ड क्वांटिटी में बिटकॉइन मिलते हैं। लेकिन हर 210,000 Blocks जुड़ने के बाद यह रिवॉर्ड आधा कर दिया जाता है, इसका लगभग 4 साल में रिपीट होने वाली प्रोसेस है। इसे ही Bitcoin Halving कहा जाता है।
उदाहरण के लिए:
इस तरह, जैसे-जैसे समय बीतता है, नए बिटकॉइन बनते तो हैं, लेकिन उनकी रफ़्तार धीमी होती जाती है, जिससे सप्लाई कंट्रोल में रहती है और कमी बनी रहती है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसकी टोटल सप्लाई पहले से तय है, जो केवल 21 मिलियन टोकन है। यह रूल किसी आर्गेनाइजेशन द्वारा नहीं, बल्कि नेटवर्क के कोड में लिखा हुआ है और कोई भी इसे बदल नहीं सकता। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप Bitcoin Whitepaper देख सकते हैं।
Bitcoin Halving इसी सप्लाई को धीमा करने का एक तरीका है। इसका उद्देश्य है कि:
इसलिए Bitcoin Halving केवल रिवॉर्ड कम करने की प्रोसेस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मॉनेटरी पॉलिसी का हिस्सा है।
इसके दो प्रमुख उद्देश्य होते हैं:
यह पूरी प्रोसेस Bitcoin को एक लिमिटेड और वैल्युएबल डिजिटल एसेट बनाती है, इसी कारण से इसे डिजिटल गोल्ड भी कहा जाता है।
2024 में आखिरी बार Bitcoin Halving हुई थी, इसे मिलाकर अब तक 4 बार Halving हो चुकी है:
हर Halving के बाद माइनिंग रिवॉर्ड आधा हो जाता है और सप्लाई ग्रोथ कम हो जाती है। यह शेड्यूल Pre-defined है, अगली Halving 2028 के आसपास होगी।
इतिहास बताता है कि हर Halving के बाद Bitcoin की प्राइस बढ़ी है, हालांकि यह जरुरी नहीं है की प्राइस बढे ही।
यह प्राइस Halving के तुरंत बाद नहीं बढ़तीं हैं लेकिन कुछ महीनों के अंदर मार्केट में इसकी कमी का असर दिखने लगता है। इन्वेस्टर उम्मीद करते हैं कि सप्लाई कम होने से डिमांड बढ़ेगी, जिससे इसकी प्राइस बढ़ेगी।
Miners पर Halving कोई निश्चित प्रभाव नहीं डालती है:
यानी Halving माइनिंग सिस्टम में एक तरह का नेचुरल सिलेक्शन भी लेकर आती है।
Halving का असर सिर्फ़ माइनर्स तक ही सीमित नहीं होता है, पूरा क्रिप्टोकरेंसी मार्केट इससे प्रभावित होता है।
इस तरह Halving एक ट्रेंड-इंडिकेटर बन जाता है जो पूरे ब्लॉकचेन इकोसिस्टम को तेजी से आगे बढ़ाता है।
हालांकि इतिहास में हर Halving के बाद Bitcoin की प्राइस ऊपर गयी हैं, लेकिन ऐसा हर बार होना ज़रूरी नहीं है।
इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि Halving एक पोटेंशियल ट्रिगर है, और इसका कोई निश्चित परिणाम नहीं होता है।
Bitcoin Halving को समझना किसी भी क्रिप्टोकरेंसी इन्वेस्टर या डेवलपर के लिए जरूरी है क्योंकि यह सिर्फ़ सप्लाई कम करने की प्रोसेस नहीं है, बल्कि पूरे ब्लॉकचेन इकोसिस्टम के इकोनोमिक बैलेंस का आधार है। अब तक हुए हर Halving इवेंट का असर न केवल Bitcoin पर पड़ा है, बल्कि यह पूरे Web3, NFT और dApps इकोसिस्टम को नई उमंग से भर देता है, Halving केवल एक शब्द नहीं बल्कि पूरे Blockchain और क्रिप्टोकरेंसी इकोसिस्टम का इकनोमिक इंडिकेटर है।
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