Digital Rupee, यह UPI से और crypto से किस तरह अलग होता है
भारत में इस समय तीन अलग-अलग चीज़ें चल रही हैं जिन्हें लोग अक्सर एक समझ लेते हैं, और यही गलतफहमी इस विषय की सबसे बड़ी बाधा है। Digital Rupee न UPI है, न क्रिप्टो, और यह फर्क समझ लेने पर बाकी सब अपने आप साफ हो जाता है।
इसलिए यह पेज सबसे पहले वही तीन चीज़ें अलग करता है।
Digital Rupee, यह है क्या
यह रिज़र्व बैंक द्वारा जारी की गई रुपये का डिजिटल रूप है। यानी जैसे कागज़ का नोट रिज़र्व बैंक जारी करता है, वैसे ही यह भी उसी के द्वारा जारी किया जाता है, बस उसका रूप डिजिटल है।
सौ रुपये का यह डिजिटल नोट कानूनी रूप से सौ रुपये के कागज़ी नोट के बराबर है। इसे एक अलग वॉलेट ऐप में रखा जाता है, जो आपके बैंक खाते से अलग होता है। इसका खुदरा परीक्षण दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था और अभी यह पंद्रह बैंकों के जरिए उपलब्ध बताया जाता है।
तीन अलग चीज़ें, जो अक्सर गडमड होती हैं
सबसे साफ तरीका यह है। यह डिजिटल रुपया खुद पैसा है। UPI पैसा नहीं है, वह पैसा हिलाने का रास्ता है। और क्रिप्टो इनमें से कोई नहीं है, वह न किसी सरकार का जारी किया हुआ है और न उसकी कीमत तय है।
इसका व्यावहारिक अर्थ
जब आप UPI से भुगतान करते हैं, तो आप अपने बैंक को निर्देश देते हैं कि वह आपके खाते से किसी और के खाते में रकम भेजे। वहाँ जो रकम है वह आपके बैंक की देनदारी है। इसके उलट, डिजिटल रुपया सीधे रिज़र्व बैंक की देनदारी है, बिल्कुल वैसे ही जैसे आपकी जेब में रखा नोट। यही कारण है कि इसे रखने के लिए बैंक खाता ज़रूरी नहीं है, और दो वॉलेट के बीच लेनदेन बैंकिंग व्यवस्था से गुज़रे बिना उसी समय पूरा हो जाता है।
e₹ बनाम UPI बनाम crypto
| पहलू | e₹ | UPI | crypto |
|---|---|---|---|
| यह क्या है | पैसा | पैसा भेजने का रास्ता | एक संपत्ति |
| किसकी देनदारी | रिज़र्व बैंक की | आपके बैंक की | किसी की नहीं |
| कीमत | हमेशा एक रुपया | — | बदलती रहती है |
| बैंक खाता | ज़रूरी नहीं | ज़रूरी है | ज़रूरी नहीं |
| कानूनी दर्जा | वैध मुद्रा | भुगतान प्रणाली | वैध मुद्रा नहीं |
इसमें खास क्या है
दो चीज़ें इसे बाकी विकल्पों से अलग बनाती हैं। पहली, यह बिना इंटरनेट के भी काम कर सकता है, क्योंकि दो फोन आपस में सीधे संपर्क करके लेनदेन पूरा कर सकते हैं। यह उन इलाकों के लिए मायने रखता है जहाँ नेटवर्क कमज़ोर रहता है।
दूसरी, इसे किसी शर्त के साथ जारी किया जा सकता है। यानी अगर कोई सरकारी सहायता इस रूप में दी जाए, तो उसे इस तरह तय किया जा सकता है कि वह केवल उसी काम में खर्च हो जिसके लिए दी गई है। यह क्षमता न नकद में है और न UPI में, और इसी वजह से इसका सबसे संभावित उपयोग सरकारी भुगतान में देखा जा रहा है।
अब तक की स्थिति और असली दिक्कत
अब ईमानदार हिस्सा। शुरुआत से अब तक लगभग सत्तर लाख लोगों ने इसका उपयोग किया बताया जाता है, और वॉलेट में रखी जा सकने वाली रकम की भी एक सीमा है।
इसकी तुलना UPI से कीजिए, जहाँ उपयोगकर्ता चालीस करोड़ से ऊपर हैं और महीने में अरबों लेनदेन होते हैं। इस तुलना में डिजिटल रुपये का खुदरा हिस्सा बहुत छोटा है। इसका कारण भी सीधा है, आम उपयोगकर्ता के सामने यह सवाल है कि जब UPI पहले से काम कर रहा है तो वह बदले क्यों। और एक दिक्कत यह भी दर्ज की गई है कि बहुत से लोग इसे क्रिप्टो समझ लेते हैं, जिससे अपनाने के बजाय भ्रम बढ़ता है। यही भ्रम इस पेज को ज़रूरी बनाता है।
निजता वाला सवाल
यह पहलू खुलकर दर्ज करना चाहिए। नकद की एक खूबी यह है कि उसका कोई रिकॉर्ड नहीं बनता। डिजिटल रूप में हर लेनदेन का रिकॉर्ड बनता है, और यहाँ वह रिकॉर्ड जारी करने वाली संस्था के दायरे में आता है।
इसका दूसरा पहलू भी है। एक केंद्रीय व्यवस्था होने के कारण यहाँ एक ही जगह पर बहुत कुछ टिका होता है, जबकि बिखरी हुई व्यवस्थाओं में ऐसा एक बिंदु नहीं होता। ये दोनों बातें इस डिज़ाइन के स्वाभाविक नतीजे हैं, न कि किसी की चूक। इन्हें जानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि किसी भी व्यवस्था को चुनते समय उसकी खूबी और उसकी कीमत, दोनों पता होनी चाहिए।
थोक वाला हिस्सा अलग है
इस परियोजना के दो हिस्से हैं और उन्हें अलग समझना चाहिए। एक वह है जो आम लोगों के लिए है, यानी वॉलेट वाला, और दूसरा वह जो बैंकों और बड़ी संस्थाओं के बीच के लेनदेन के लिए है।
दूसरे हिस्से में उतनी चर्चा नहीं होती पर व्यावहारिक असर वहीं ज़्यादा दिख रहा है, क्योंकि वहाँ सरकारी प्रतिभूतियों जैसे बड़े लेनदेन का निपटान होता है और उसमें समय तथा लागत दोनों की बचत होती है। आम उपयोगकर्ता को उससे सीधा कुछ नहीं मिलता, पर वह हिस्सा यह दिखाता है कि इस पूरी व्यवस्था का पहला असली उपयोग शायद आम भुगतान में नहीं, संस्थाओं के बीच होगा।
आम उपयोगकर्ता के लिए इसका मतलब
तीन बातें व्यावहारिक हैं। पहली, यह निवेश की चीज़ नहीं है। इसकी कीमत हमेशा एक रुपया रहेगी, इसलिए इसमें न लाभ है न हानि, यह केवल पैसे का एक रूप है।
दूसरी, इसका क्रिप्टो से कोई संबंध नहीं है, और अगर कोई इसे जोड़कर कोई योजना बेच रहा हो तो वह अपने आप में एक चेतावनी है। तीसरी, अगर आप किसी ऐसे इलाके में हैं जहाँ नेटवर्क कमज़ोर रहता है, या आपको सरकारी भुगतान मिलते हैं, तो आगे चलकर यह आपके काम आ सकता है। भारत की नियामकीय तस्वीर इस पेज पर, क्रिप्टो की बुनियादी समझ यहाँ, और स्थिर मूल्य वाले निजी टोकनों से इसका फर्क इस पेज पर देखा जा सकता है।
दो नीतियाँ जो साथ चल रही हैं
यह तथ्य दर्ज करना ज़रूरी है क्योंकि इसी से इस विषय का पूरा संदर्भ बनता है। एक ही समय पर दो अलग दिशाएँ चल रही हैं, एक ओर निजी क्रिप्टो को लेकर सतर्क और प्रतिकूल रुख, और दूसरी ओर सरकारी डिजिटल मुद्रा का सक्रिय विस्तार।
इन दोनों को साथ रखकर देखने पर तर्क समझ आता है, कि यदि तेज़ और सस्ता डिजिटल भुगतान सरकारी व्यवस्था से ही संभव हो जाए, तो निजी नेटवर्क पर निर्भर रहने का कारण घट जाता है। यह लेख इस दृष्टिकोण के सही या गलत होने पर कोई राय नहीं दे रहा, वह नीति का विषय है। यह केवल यह दर्ज कर रहा है कि दोनों चीज़ें साथ हो रही हैं, और इसीलिए क्रिप्टो से जुड़ी किसी भी खबर को पढ़ते समय यह संदर्भ ध्यान में रखना उपयोगी होता है।
Glossary
- CBDC
- केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई मुद्रा का डिजिटल रूप।
- Legal Tender
- वैध मुद्रा, यानी जिसे भुगतान के रूप में स्वीकार करना कानूनी रूप से मान्य है।
- Liability
- देनदारी, यानी वह संस्था जिस पर आपका दावा बनता है।
- Programmability
- पैसे को किसी शर्त के साथ जारी करने की क्षमता।
- Offline Transaction
- बिना इंटरनेट के दो उपकरणों के बीच सीधा लेनदेन।
सीमा पार वाला संभावित उपयोग
एक और दिशा जिस पर काम चल रहा है वह सीमा पार भुगतान की है। विचार यह है कि अलग-अलग देशों की ऐसी डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ा जाए, ताकि एक देश से दूसरे देश पैसा भेजना सस्ता और तेज़ हो सके।
भारत के लिए यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि यहाँ विदेश से आने वाली रकम बहुत बड़ी है, और उस पर लगने वाला शुल्क तथा समय दोनों आज भी ज़्यादा हैं। अगर यह व्यवस्था बनती है तो उसका असर उन करोड़ों परिवारों पर पड़ेगा जिन्हें हर महीने विदेश से पैसा मिलता है। पर यह अभी चर्चा और परीक्षण के स्तर पर है, इसलिए इसे संभावना मानिए, घोषणा नहीं। इसी दिशा में निजी नेटवर्कों पर भी काम हो रहा है, जिसका ब्यौरा अलग से दर्ज है।
निष्कर्ष
इस विषय को समझने का सबसे छोटा रास्ता वही एक पंक्ति है, कि डिजिटल रुपया पैसा है, UPI पैसा हिलाता है, और क्रिप्टो इनमें से कोई नहीं। तीनों के काम अलग हैं, तीनों के जोखिम अलग हैं, और तीनों को एक मानकर बनी कोई भी राय गलत निकलेगी। इसलिए Digital Rupee के बारे में कुछ भी पढ़ते या सुनते समय सबसे पहले यह तय कीजिए कि बात इन तीनों में से किसकी हो रही है। समग्र परिदृश्य India हब पर, कर की स्थिति इस पेज पर, P2P का पक्ष यहाँ और मंच चुनाव इस पेज पर उपलब्ध है।
अस्वीकरण
यह लेख शैक्षिक उद्देश्य से है। यह परियोजना अभी परीक्षण चरण में है और उसकी शर्तें, सीमाएँ तथा उपलब्धता समय-समय पर बदलती रहती हैं, इसलिए उपयोग से पहले अपने बैंक या आधिकारिक स्रोत से मौजूदा स्थिति की पुष्टि करें।