स्टेबलकॉइन की दुनिया में ज़्यादातर नाम (USDT, USDC) किसी न किसी कंपनी के पीछे खड़े हैं, जो dollar-reserve रखकर टोकन जारी करती है। DAI इस भीड़ से बिल्कुल अलग खड़ा है: इसे कोई केंद्रीय कंपनी 'issue' नहीं करती, यह MakerDAO नाम के एक decentralized protocol के smart-contracts से जन्म लेता है। यह लेख DAI की इसी बुनियादी अलग पहचान को समझाता है: यह बनता कैसे है, स्थिर कैसे रहता है, और आम dollar-backed stablecoins से इसका फर्क क्या है।
DAI पाने के लिए dollar जमा नहीं करना पड़ता, बल्कि crypto-assets (जैसे ETH) को MakerDAO के smart-contract, जिसे Vault कहा जाता है, में collateral के तौर पर लॉक करना पड़ता है। जमा किए collateral की वैल्यू से कम मात्रा में DAI 'mint' होता है, यह over-collateralization कहलाता है, यानी अगर $150 का ETH जमा है, तो शायद $100 का DAI मिले। यह अतिरिक्त cushion इसलिए रखा जाता है ताकि crypto-भाव में गिरावट आने पर भी DAI का backing सुरक्षित रहे।
अगर collateral की वैल्यू एक तय सीमा से नीचे गिर जाए (यानी ETH का भाव गिरे), तो protocol स्वचालित रूप से उस Vault के collateral को बेचकर DAI को वापस खरीद लेता है, इसे liquidation कहते हैं। यह mechanism DAI के $1 के peg को स्थिर रखने की रीढ़ है, बिना किसी बैंक के, सिर्फ code और incentive के ज़रिए। Vault-मालिक के लिए इसका मतलब है कि collateral-ratio पर लगातार नज़र रखनी ज़रूरी है, वरना गिरावट में जमा किया गया asset अपने आप बिक सकता है।
USDT-USDC का backing bank-account में रखे डॉलर या treasury-bills से आता है, यानी भरोसा किसी कंपनी और उसके audit पर टिका है। DAI का backing on-chain crypto-collateral से आता है, जो कोई भी blockchain-explorer पर सार्वजनिक रूप से देखा जा सकता है, भरोसा किसी कंपनी पर नहीं, code और collateral पर टिका है। यही फर्क DAI को 'decentralized stablecoin' कहलाने का आधार देता है, हालांकि व्यवहार में यह पूरी तरह centralization-मुक्त भी नहीं है, क्योंकि इसके collateral-मिश्रण में अक्सर USDC जैसे centralized stablecoins का भी हिस्सा शामिल रहा है।
DeFi (decentralized finance) में lending, borrowing और trading के लिए DAI एक लोकप्रिय माध्यम है, क्योंकि यह dollar जैसी स्थिरता देता है पर बिना किसी traditional बैंक की मध्यस्थता के। जो लोग अपने crypto-holdings बेचे बिना dollar-equivalent liquidity चाहते हैं (उदाहरण के लिए ETH रखते हुए DAI उधार लेना), उनके लिए यह उपयोगी tool है।
Smart-contract जोखिम (code में बग की संभावना), collateral-भाव में तीखी गिरावट से liquidation का जोखिम, और governance-जोखिम (MakerDAO के token-holders के फैसलों पर निर्भरता) तीनों DAI के साथ जुड़े रहते हैं। पूरी तरह dollar जैसा 'zero-risk' मानना गलत होगा, यह dollar-जैसी स्थिरता वाला पर अलग तरह के जोखिमों वाला asset है। किसी भी DeFi-गतिविधि से पहले wallet-सुरक्षा की समझ crypto wallet गाइड से बनाएं और स्टेबलकॉइन के अन्य मॉडलों की तुलना के लिए ARC Stablecoin विश्लेषण पढ़ें।
आधिकारिक जानकारी MakerDAO की वेबसाइट पर उपलब्ध है और भाव-सत्यापन CoinGecko के DAI पेज पर करें।
DAI डॉलर की तरह स्थिर दिखने वाला ऐसा टोकन है जिसके पीछे कोई बैंक नहीं, बल्कि locked crypto-collateral और automatic code खड़ा है।
MakerDAO: DAI बनाने वाला decentralized protocol।
Vault: collateral लॉक करने का smart-contract।
Over-Collateralization: DAI की तुलना में ज़्यादा वैल्यू का collateral रखना।
Liquidation: collateral गिरने पर स्वचालित बिकवाली।
Peg: टोकन की तय स्थिर कीमत, DAI के लिए $1।
DeFi: Decentralized Finance, बिना बैंक के वित्तीय सेवाएं।
यह लेख शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है, निवेश सलाह नहीं। DeFi-प्रोटोकॉल्स में smart-contract और liquidation जोखिम वास्तविक हैं। किसी भी उपयोग से पहले अपना शोध करें।
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