2018 बना Crypto Investors के लिए Reality Check Year
आज से 16 साल पहले Satoshi Nakamoto द्वारा डीजीटल असेट्स के रिवोल्यूशन की शुरुआत की गई थी, जो शुरू हुई थी Bitcoin के रूप में। जहाँ शुरुआती दिनों में केवल एक एक्सपेरीमेंट के रूप में शुरू हुआ Bitcoin आज दुनिया की सबसे चर्चित डिजिटल करेंसी है।
जब यह सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने आया था तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह कभी लाखों-करोड़ों की वैल्यू को हांसिल कर लेगा। इस ब्लॉग में हम देखेंगे 1 Bitcoin Price in 2009 in Indian Rupees, 2009 से 2017 तक का सफर, 2018 में क्या खास हुआ और कैसे यह साल Bitcoin के भविष्य की नींव बना।

Source – यह तस्वीर Bitcoin Whitepaper से ली गई है, यहाँ हमने इसकी ऑफिशियल लिंक भी दी है।
Bitcoin की शुरुआत 2009 में Satoshi Nakamoto ने की थी। उस समय इसका कोई मार्केट प्राइस नहीं था क्योंकि इसे सिर्फ क्रिप्टोग्राफी कम्युनिटी में एक्सपेरिमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
2009 में 1 Bitcoin Price in Indian Rupees लगभग 0 रुपये था, क्योंकि तब इसे खरीदने-बेचने का कोई ऑफिशियल प्लेटफॉर्म नहीं था।
2010 में पहली बार इसका उपयोग हुआ जब 10,000 Bitcoins से दो पिज्जा खरीदे गए। उस समय 1 Bitcoin की वैल्यू कुछ पैसों के बराबर थी।
2011 में Bitcoin ने $1 का आंकड़ा छुआ, जो भारतीय रुपये में करीब 45-50 रुपये होता है।
2013 में यह तेजी से बढ़कर $1000 तक पहुंचा। यह पहला बड़ा बुल रन था, हालांकि इसके बाद बड़ी गिरावट भी आई।
2015 तक Bitcoin धीरे-धीरे $200-$300 के बीच रहा और स्थिरता की ओर बढ़ा।
2017 Bitcoin के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस साल 1 Bitcoin Price लगभग $20,000 (करीब 13 लाख रुपये) तक पहुंच गया और दुनिया भर में इसकी चर्चा होने लगी।
इस पूरे दशक ने Bitcoin को एक अज्ञात डिजिटल एक्सपेरिमेंट से ग्लोबल फाइनेंशियल असेट बना दिया।
2018 की शुरुआत Bitcoin के लिए रोमांचक रही। जनवरी 2018 में 1 Bitcoin Price लगभग ₹9,50,000 – ₹10,00,000 के बीच था। यह अब तक का सबसे ज्यादा वैल्यूएशन था और भारतीय निवेशकों में क्रिप्टो खरीदने की होड़ लगी थी।
लेकिन जैसे-जैसे साल आगे बढ़ा, Bitcoin में भारी गिरावट आई। दिसंबर 2018 तक 1 Bitcoin Price गिरकर लगभग ₹2,80,000 से ₹3,00,000 रह गया। यानी सालभर में लगभग 70% से ज्यादा वैल्यू खत्म हो गई।
2018 को Bitcoin के लिए क्रैश और रियलाइजेशन का साल कहा जाता है।
क्रिप्टो क्रैश – 2017 की बुल रन के बाद 2018 में मार्केट में बहुत बड़ी गिरावट आई। ज्यादातर निवेशक जिन्होंने BTC को हाई प्राइस पर खरीदा था, उन्हें नुकसान हुआ।
रेगुलेशन की शुरुआत – कई देशों की सरकारों ने पहली बार क्रिप्टो पर कड़े नियम लागू किए। भारत में भी क्रिप्टो को लेकर RBI और सरकार ने चेतावनियां दीं।
टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट – इसी दौरान Lightning Network जैसे लेयर-2 सॉल्यूशन्स पर काम तेज हुआ, जिससे Bitcoin की ट्रांजैक्शन स्पीड और स्केलेबिलिटी पर ध्यान गया।
इन्वेस्टर्स का टेस्ट – 2018 ने यह टेस्ट किया कि कौन निवेशक लॉन्ग-टर्म सोच रखते हैं और कौन सिर्फ शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट के लिए आए हैं।
हालांकि 2018 में Bitcoin Price गिरा, लेकिन यह साल Bitcoin की असली ताकत को साबित करने वाला बना। इस साल यह साफ हो गया कि Bitcoin सिर्फ स्पेकुलेशन का जरिया नहीं है, बल्कि यह मार्केट साइकिल्स को झेल सकता है।
क्रैश के बावजूद Bitcoin कभी शून्य पर नहीं गया। यह बात साबित करती है कि इसकी कम्युनिटी और टेक्नोलॉजी मजबूत है। 2018 के बाद ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने सोचना शुरू किया कि इसे एक वैल्यू स्टोर के रूप में अपनाना चाहिए।
2018 का क्रैश ही असल में Bitcoin की फ्यूचर स्ट्रेंथ का आधार बना। 2017 के बाद लोगों को लगा कि Bitcoin केवल ऊपर ही जाएगा। लेकिन 2018 ने निवेशकों को यह सीख दी कि यह भी एक हाई-रिस्क-हाई-रिटर्न एसेट है। इस साल की घटनाओं ने दुनियाभर की सरकारों को मजबूर किया कि वे क्रिप्टो रेगुलेशन पर काम शुरू करें।
आज जो Bitcoin ETFs और ग्लोबल एक्सेप्टेंस हम देख रहे हैं, उसकी तैयारी 2017-2018 के बुल रन और उसके बाद आए रेगुलेटरी डिबेट के दौर में ही शुरू हो चुकी थी। कीमत गिरने के बावजूद डेवलपर्स ने नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर काम किया। यही वजह है कि आज Bitcoin लाखों ट्रांजैक्शन संभाल पा रहा है।
मैं 2018 के पहले से क्रिप्टो मार्केट में निवेश कर रहा हूँ, इसलिए मैंने 2017-18 का दौर खुद अनुभव किया है। उस समय मार्केट में अचानक आई गिरावट ने बहुत से नए निवेशकों को बाहर कर दिया। मैंने उस वक्त यह समझा कि Bitcoin में सिर्फ हाइप देखकर एंट्री करना सही नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक लॉन्ग-टर्म अप्रोच अपनाना जरूरी है।
मेरे एक्सपीरियंस के हिसाब से 2018 ने यह साबित कर दिया कि जो निवेशक इस क्रैश से बचकर आगे बढ़े, उन्होंने बाद में होने वाले बुल रन (2020-21) में बड़े मुनाफे कमाए और वर्तमान समय तक जिन निवेशकों ने धैर्य रखा, उनमें से कई ने अपने निवेश पर काफ़ी अच्छे रिटर्न देखे, हालांकि हर किसी के लिए ऐसा होना ज़रूरी नहीं है।
मैं बतौर क्रिप्टो राइटर पिछले 3 साल से काम कर रहा हूँ, मेरा मानना है कि 2018 Bitcoin के लिए सबसे अहम सालों में से एक है। अगर 2017 की तेजी ने इसे दुनिया भर में मशहूर किया, तो 2018 की गिरावट ने इसे मजबूत बनाया।
मेरी राय में, अगर आप Bitcoin में निवेश करना चाहते हैं तो 2018 की कहानी से सीखना जरूरी है। यह आपको बताएगा कि Bitcoin सिर्फ “जल्दी अमीर बनने का जरिया” नहीं है, बल्कि यह एक लॉन्ग-टर्म डिजिटल एसेट है, जिसमें धैर्य और समझदारी जरूरी है।
आप अगर हमारी इस सीरिज का पिछला ब्लॉग 1 Bitcoin Price in 2009 in Indian Rupees, 2017 में आया Boom, पढ़ना चाहते हैं तो लिंक पर क्लिक करें।
1 Bitcoin Price in 2009 in Indian Rupees लगभग शून्य था, लेकिन 2018 तक यह लाखों रुपये तक पहुंच गया और फिर गिरकर स्थिर हुआ। 2018 ने निवेशकों को सबक दिया, टेक्नोलॉजी को मजबूत किया और भविष्य की नींव रखी।
आज Bitcoin का जो प्रभाव हम देख रहे हैं, उसमें 2018 की भूमिका सबसे खास है। यही वह साल था जिसने यह साफ कर दिया कि Bitcoin सिर्फ एक हाइप नहीं, बल्कि एक ऐसा एसेट है जो ग्लोबल फाइनेंस को बदल सकता है।
डिस्क्लेमर- यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की फाइनेंशियल सलाह, निवेश सुझाव या लीगल गाइडेंस नहीं है। आप किसी भी निवेश से पहले रिसर्च करें और एक्सपर्ट्स की सलाह अवश्य लें।
Explore Our FAQs
Find quick answers to commonly asked questions and understand how things work around here.
Copyright 2026 All rights reserved