आज की डिजिटल दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी अब सिर्फ निवेश का जरिया नहीं रही, बल्कि कई देशों में यह लोगों के लिए पैसे सुरक्षित रखने का नया तरीका बनती जा रही है। खासकर स्टेबलकॉइन, जिनकी कीमत अमेरिकी डॉलर से जुड़ी होती है, तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। हाल ही में BVNK की 2026 Stablecoin Utility Report में एक दिलचस्प खुलासा हुआ है, जिसने पूरी क्रिप्टो इंडस्ट्री का ध्यान खींच लिया है। आइए डिटेल में समझते हैं क्या है पूरी खबर?
BVNK की रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया के क्रिप्टो यूजर्स में लगभग 59% के पास USDT और 48% के पास USDC है, जो दुनिया के कई विकसित देशों से ज्यादा है जो अपने आप में हैरान कर देने वाली बात है। ऑस्ट्रेलिया दूसरे स्थान पर है, जहां लगभग 34% यूजर्स के पास Tether (USDT) पाया गया। ब्राजील भी इस सूची में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है। अफ्रीका की बात करें तो यहां करीब 79% लोगों के पास किसी न किसी रूप में Stablecoin मौजूद है। इससे साफ पता चलता है कि जिन देशों की अर्थव्यवस्था थोड़ी अस्थिर है, वहां लोग अपने पैसे की वैल्यू बचाने के लिए तेजी से डिजिटल डॉलर की ओर बढ़ रहे हैं।
बात की जाए भारत के बारे में तो ये तीसरे स्थान पर है, भारत में लगभग 65% यूजर्स के पास Stablecoin मौजूद है। यानी भारत Stablecoin उपयोग के मामले में दुनिया के टॉप देशों में शामिल है। भारत में कई यूजर्स Stablecoin का उपयोग सिर्फ ट्रेडिंग के लिए नहीं, बल्कि अपनी बचत की वैल्यू सुरक्षित रखने के लिए भी कर रहे हैं। खासकर फ्रीलांसर, ऑनलाइन वर्कर्स और इंटरनेशनल पेमेंट करने वाले यूजर्स USDT और USDC को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह ट्रेंड दिखाता है कि भारत में भी डिजिटल डॉलर की मांग धीरे-धीरे मजबूत होती जा रही है।
दरअसल, नाइजीरिया जैसे देशों में स्थानीय करेंसी नाइरा (Naira) की वैल्यू हर साल तेजी से गिरती रही है। कई बार 20% से 40% तक की गिरावट देखने को मिली है, जिससे लोगों की बचत पर सीधा असर पड़ता है। महंगाई, करेंसी डीवैल्यूएशन और बैंकिंग सिस्टम से जुड़ी समस्याओं के कारण लोग अपनी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए USDT और USDC जैसे स्टेबलकॉइन का उपयोग कर रहे हैं।
यहां Stablecoin को निवेश नहीं बल्कि डॉलर आधारित सेविंग अकाउंट की तरह देखा जा रहा है। खास बात यह है कि कई फ्रीलांसर, गिग वर्कर्स और ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े लोग अपनी इनकम का करीब 35% हिस्सा स्टेबलकॉइन में प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उन्हें करेंसी गिरावट से बचाव मिलता है।
बता दें, Stablecoin की होल्डिंग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनका उपयोग अभी सीमित है। ज्यादातर लोग इन्हें केवल सेविंग के रूप में रखते हैं, जबकि रोज के खर्च में इनका इस्तेमाल अभी आसान नहीं है। कई देशों में दुकानदार USDT या USDC (USD Coin) स्वीकार नहीं करते, जिसके कारण लोगों को खर्च करने से पहले इन्हें वापस लोकल करेंसी में कन्वर्ट करना पड़ता है। इससे ट्रांजेक्शन प्रक्रिया लंबी और महंगी हो जाती है। यह समस्या खासतौर पर लागोस, जकार्ता और साओ पाउलो जैसे शहरों में ज्यादा दिखाई देती है, जहां लोगों के पास स्टेबलकॉइन तो हैं, लेकिन उन्हें खर्च करने का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
वैश्विक स्तर पर Stablecoin का कुल सर्कुलेशन लगभग 308 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल डॉलर की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन देशों में जहां स्थानीय मुद्रा अस्थिर है। स्टेबलकॉइन अब रेमिटेंस, फ्रीलांस पेमेंट, सेविंग और इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी असली ग्रोथ तब होगी जब ज्यादा दुकानदार, कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इन्हें पेमेंट के रूप में स्वीकार करना शुरू करेंगे। अभी ज्यादातर लोग Tether (USDT) और USD Coin (USDC) को केवल सेविंग के लिए रखते हैं। फिनटेक कंपनियां ऐसे पेमेंट टूल्स बना रही हैं, जिनकी मदद से स्टेबलकॉइन से शॉपिंग, बिल पेमेंट और बिजनेस ट्रांजेक्शन आसानी से किए जा सकें। जब यूजर के लिए पेमेंट करना उतना ही आसान हो जाएगा जितना UPI या कार्ड से करना होता है, तब स्टेबलकॉइन आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, आने वाले समय में अगर पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है और ज्यादा मर्चेंट Stablecoin स्वीकार करने लगते हैं, तो USDT और USDC जैसे डिजिटल डॉलर रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा बन सकते हैं। इससे ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और स्टेबलकॉइन की भूमिका और भी मजबूत हो सकती है।
यह आर्टिकल केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। क्रिप्टोकरेंसी एक उच्च जोखिम वाला डिजिटल एसेट है, जिसकी कीमत में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। किसी भी निवेश से पहले अपनी रिसर्च अवश्य करें।
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