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RBI और FIU-IND की नज़र में ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड: RedotPay की जाँच

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RBI और FIU-IND की नज़र में आए ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स: जाँच शुरू
RBI और FIU-IND की नज़र में आए ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स: जाँच शुरू

भारत में लोग बिना किसी भारतीय एक्सचेंज या बैंक से गुज़रे, क्रिप्टो से मोबाइल रिचार्ज, फ़्लाइट बुकिंग और ATM से कैश तक निकाल रहे थे। अब इस पर नियामकों की नज़र पड़ गई है। Financial Intelligence Unit-India (FIU-IND) और Reserve Bank of India (RBI) ऑफ़शोर क्रिप्टो पेमेंट कार्ड्स की जाँच कर रहे हैं, जिनसे भारतीय निवासी डिजिटल एसेट्स ख़र्च कर सकते हैं और रुपये निकाल सकते हैं। यह ख़बर The Economic Times ने 2 November को दी, और इसे कई दूसरे आउटलेट्स ने आगे बढ़ाया।

अभी यह जाँच "रिपोर्टेड" है, यानी किसी आधिकारिक बयान या एनफ़ोर्समेंट ऑर्डर से पुष्टि नहीं हुई है। दो जानकार लोगों के हवाले से बताया गया कि नियामक यह देख रहे हैं कि ये इंतज़ाम भारत के पेमेंट नियमों, फ़ॉरेन एक्सचेंज की पाबंदियों और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों को कहीं दरकिनार तो नहीं करते। इसलिए सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि ये कार्ड्स असल में काम कैसे करते हैं।

ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड कैसे काम करते हैं

ये कार्ड्स विदेशी फ़िनटेक कंपनियों के जारी किए प्रीपेड प्रोडक्ट हैं, जो RedotPay जैसे प्रोवाइडर्स के ज़रिए Visa और Mastercard नेटवर्क पर चलते हैं। यूज़र आम तौर पर डॉलर से जुड़े स्टेबलकॉइन एक वॉलेट में रखता है, और चेकआउट के वक़्त बैलेंस रुपये में बदल जाता है। भारतीय मर्चेंट को पेमेंट ऐसे मिलता है जैसे यह किसी आम बैंक डेबिट कार्ड से हुआ हो। यानी मर्चेंट की तरफ़ से सब सामान्य दिखता है, जबकि एसेट्स भारत की बैंकिंग व्यवस्था के बाहर रखे होते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ कार्ड्स की क़ीमत लगभग 40 से 50 डॉलर है, वे तीन साल तक वैलिड रहते हैं और उनकी ट्रांज़ैक्शन लिमिट काफ़ी ऊँची है। इनका इस्तेमाल ऑनलाइन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, ट्रैवल बुकिंग और ATM विड्रॉल के लिए हुआ। यह सहूलियत ही नियामकों की चिंता की जड़ है। अब सवाल उठता है कि जाँच की शुरुआत हुई कैसे।

जाँच की शुरुआत कैसे हुई

इस मामले में बेंगलुरु की संस्था Digital South Trust की अहम भूमिका बताई जा रही है। उसने August में Visa-बैक्ड एक वर्चुअल RedotPay कार्ड हासिल किया, भारत में ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन पूरे किए और अपने निष्कर्ष भारतीय अधिकारियों को सौंप दिए। संस्था के संस्थापक Sudhakar Lakshmanaraja ने चिंता जताई कि कुछ ऑफ़शोर कार्ड प्रोग्राम सीमित आइडेंटिटी वेरिफ़िकेशन का प्रचार करते हैं, जिससे ट्रांज़ैक्शन मॉनिटरिंग कमज़ोर पड़ सकती है।

इसी बीच यूज़र्स की तरफ़ से कार्ड बंद होने की शिकायतें आने लगीं। कई यूज़र्स का कहना है कि उनके कार्ड 29 October से भारत में काम नहीं कर रहे। कुछ प्रोवाइडर्स की वेबसाइट्स तक पहुँच भी सीमित होने की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक अधिकारी Visa और Mastercard से बात कर रहे हैं, लेकिन न इन नेटवर्क्स ने और न ही RBI ने इसकी सार्वजनिक पुष्टि की है। RedotPay का नाम लेकर किसी औपचारिक एनफ़ोर्समेंट ऑर्डर की भी घोषणा नहीं हुई है। यानी कार्ड्स बंद होने की वजह अभी आधिकारिक तौर पर साफ़ नहीं है। अब देखते हैं कि क़ानूनी सवाल क्या उठ रहे हैं।

FEMA, KYC और पेमेंट नियमों पर उठे सवाल

कानूनी जानकारों ने कुछ अहम मुद्दे गिनाए हैं:

  • FEMA: Foreign Exchange Management Act, 1999 के तहत संभावित असर पर वकीलों ने ध्यान दिलाया। विदेशी कस्टोडियन के पास क्रिप्टो रखकर उसे भारत में ख़र्च करना इसी के दायरे में परखा जा सकता है।

  • पेमेंट ऑथराइज़ेशन: Ascentium India के Harshal Bhuta के मुताबिक जब विदेशी कस्टोडियन क्रिप्टो को अपने-आप रुपये में बदल देते हैं, तो ऐसे कार्ड्स घरेलू पेमेंट ऑथराइज़ेशन की ज़रूरतों को बायपास कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये कार्ड्स भारत के प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (PPI) फ़्रेमवर्क और Payment and Settlement Systems Act के बाहर बैठते हैं।

  • ट्रेसेबिलिटी: Khaitan & Co के Manavendra Mishra का कहना है कि नियामक ब्लॉकचेन एनालिटिक्स से टोकन की ओनरशिप पकड़ सकते हैं और संदिग्ध फ़ंड्स की पहचान कर सकते हैं। यानी इन कार्ड्स से गुमनामी का जो भरोसा लोगों को होता है, वह उतना पक्का नहीं है।

एक ज़रूरी बात: किसी ख़ास ट्रांज़ैक्शन से क़ानून टूटता है या नहीं, यह उसके ढाँचे और लागू नियमों पर निर्भर करता है। सब कुछ एक ही पैमाने से अवैध नहीं कहा जा सकता। इस जाँच को बड़े संदर्भ में देखना ज़रूरी है, क्योंकि यह अकेली कार्रवाई नहीं है।

ऑफ़शोर प्लेटफ़ॉर्म्स पर बढ़ता शिकंजा

September 2026 में FIU-IND ने Weex, Blofin, Bitunix और ChangeNow समेत 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को नॉन-कम्प्लायंस नोटिस जारी किए थे, और उनकी वेबसाइट्स व ऐप्स पर पाबंदी भी माँगी गई थी। भारत के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग ढाँचे में योग्य डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को FIU-IND में रजिस्टर होना होता है, और ये नियम भारतीय ग्राहकों को सेवा देने वाले ऑफ़शोर कारोबारों पर भी लागू हो सकते हैं।

टैक्स का सवाल भी उठता है। क्रिप्टो से ख़रीदारी में घरेलू एक्सचेंज से गुज़रे बिना डिजिटल एसेट्स का टैक्सेबल ट्रांसफ़र हो सकता है। भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के ट्रांसफ़र से हुई कमाई पर आम तौर पर 30% टैक्स लगता है, साथ में लागू होने वाली विदहोल्डिंग भी।

दूसरी तरफ़ ग्लोबल ट्रेंड तेज़ी से बढ़ रहा है। Visa ने October में 225 से ज़्यादा स्टेबलकॉइन-लिंक्ड कार्ड प्रोग्राम बताए, जिनमें 50 से ज़्यादा देशों में लगभग पाँच मिलियन कार्ड्स पर स्पेंडिंग साल-दर-साल 150% से ऊपर बढ़ी है। उसका सालाना स्टेबलकॉइन सेटलमेंट रन रेट 25 अरब डॉलर से ऊपर गया, हालाँकि यह आँकड़ा कंज़्यूमर कार्ड स्पेंडिंग से अलग है। इसी से नियामकों की उलझन समझ आती है: भारत में ऐसी ख़र्चीली आदतें बढ़ीं, तो KYC, मॉनिटरिंग और टैक्स का ट्रेल कैसे बचेगा।

भारतीय यूज़र्स के लिए क्या मायने हैं

फ़िलहाल यूज़र्स की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऑफ़शोर कार्ड्स चालू रहेंगे या नहीं, और सेवाओं पर रोक लगी तो मौजूदा बैलेंस तक पहुँच कैसे मिलेगी। इस बारे में कोई आधिकारिक गाइडेंस अभी सामने नहीं आई है। जब तक नियामकों या कंपनियों की तरफ़ से साफ़ बयान नहीं आता, ऐसे कार्ड्स में बड़ी रकम रखने से पहले सोच-समझ लेना बेहतर है। टैक्स के लिहाज़ से भी हर ख़र्च का रिकॉर्ड रखना समझदारी होगी, क्योंकि क्रिप्टो से ख़रीदारी पर ट्रांसफ़र का टैक्स सवाल खड़ा कर सकता है।

अंत में एक ज़रूरी स्पष्टीकरण: औपचारिक नतीजे सामने आने तक इस जाँच को RedotPay, Visa या Mastercard की किसी पुष्ट अनियमितता के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

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डिस्क्लेमर: यह ख़बर सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे कानूनी, टैक्स या निवेश सलाह न समझें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

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FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

Offshore Crypto Payment Cards विदेशी फिनटेक कंपनियों द्वारा जारी किए जाने वाले प्रीपेड कार्ड हैं, जिनकी मदद से भारतीय यूज़र्स अपने क्रिप्टो या Stablecoin बैलेंस से रोज़मर्रा के खर्च कर सकते हैं। ये कार्ड Visa और Mastercard जैसे पेमेंट नेटवर्क पर काम करते हैं। पेमेंट के समय क्रिप्टो बैलेंस रुपये में कन्वर्ट हो जाता है और मर्चेंट को सामान्य डेबिट कार्ड की तरह भुगतान मिलता है।

हाँ, 2 November 2026 को The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक Financial Intelligence Unit-India (FIU-IND) और Reserve Bank of India (RBI) ऑफ़शोर क्रिप्टो पेमेंट कार्ड्स की जाँच कर रहे हैं। नियामक यह पता लगा रहे हैं कि क्या इन कार्ड्स के ज़रिए भारतीय पेमेंट नियमों, FEMA और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। हालांकि, रिपोर्ट के समय तक इस जाँच की किसी आधिकारिक बयान या एनफ़ोर्समेंट ऑर्डर से पुष्टि नहीं हुई थी।

RedotPay एक ऑफ़शोर क्रिप्टो पेमेंट कार्ड प्रोवाइडर है, जिसके कार्ड Visa नेटवर्क पर काम करते हैं। यूज़र्स अपने वॉलेट में डॉलर से जुड़े Stablecoins रखते हैं और कार्ड से ऑनलाइन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, फ़्लाइट बुकिंग और ATM Cash Withdrawal जैसे भुगतान कर सकते हैं। ट्रांज़ैक्शन के समय बैलेंस रुपये में कन्वर्ट होता है, जिससे भारतीय मर्चेंट को सामान्य कार्ड पेमेंट मिलता है।

कई यूज़र्स ने शिकायत की है कि उनके ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स 29 October 2026 से भारत में काम नहीं कर रहे हैं। कुछ प्रोवाइडर्स की वेबसाइट्स तक पहुँच सीमित होने की भी रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, कार्ड्स बंद होने की असली वजह अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं है और किसी औपचारिक प्रतिबंध की सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई है।

नियामकों की मुख्य चिंता यह है कि ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स के ज़रिए भारतीय यूज़र्स विदेशी वॉलेट में रखे डिजिटल एसेट्स को सीधे भारतीय रुपये में खर्च कर सकते हैं। इससे KYC, ट्रांज़ैक्शन मॉनिटरिंग, विदेशी मुद्रा नियमों और घरेलू पेमेंट ऑथराइज़ेशन से जुड़े सवाल उठते हैं। अधिकारी यह जाँच रहे हैं कि क्या ऐसे पेमेंट सिस्टम भारत के मौजूदा वित्तीय नियमों के बाहर काम कर रहे हैं।

ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स के इस्तेमाल पर Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 के संभावित प्रभाव को लेकर कानूनी सवाल उठे हैं। विदेशी कस्टोडियन के पास क्रिप्टो रखकर भारत में उसे खर्च करने की व्यवस्था नियामकीय जाँच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, हर ट्रांज़ैक्शन को गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता। इसकी वैधता संबंधित व्यवस्था और उस पर लागू नियमों पर निर्भर करेगी।

कानूनी जानकारों के मुताबिक, जब विदेशी कस्टोडियन क्रिप्टो को अपने स्तर पर भारतीय रुपये में बदलकर भुगतान करते हैं, तो घरेलू पेमेंट ऑथराइज़ेशन और Prepaid Payment Instruments (PPI) Framework से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। ऐसे कार्ड्स Payment and Settlement Systems Act के दायरे से बाहर तो नहीं हैं, इसकी भी जाँच की जा रही है। हालांकि, किसी नियम के उल्लंघन की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

बेंगलुरु की संस्था Digital South Trust ने अगस्त 2026 में Visa-बैक्ड RedotPay वर्चुअल कार्ड हासिल करके भारत में ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन किए थे। संस्था ने अपने परीक्षण के निष्कर्ष भारतीय अधिकारियों को सौंपे। इसके संस्थापक Sudhakar Lakshmanaraja ने सीमित Identity Verification और कमजोर Transaction Monitoring को लेकर चिंता जताई थी।

ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स के मामले में KYC और Anti-Money Laundering (AML) नियमों का पालन एक प्रमुख नियामकीय मुद्दा है। अधिकारियों की चिंता है कि कुछ कार्ड प्रोग्राम सीमित आइडेंटिटी वेरिफ़िकेशन के साथ काम कर सकते हैं, जिससे संदिग्ध ट्रांज़ैक्शन की निगरानी मुश्किल हो सकती है। भारत में सेवाएँ देने वाले योग्य Virtual Digital Asset Service Providers को लागू PMLA नियमों के तहत FIU-IND में रजिस्ट्रेशन और संबंधित अनुपालन करना पड़ सकता है।

भारत में Virtual Digital Assets के ट्रांसफ़र से होने वाली आय पर आम तौर पर 30% टैक्स लागू होता है। ऑफ़शोर कार्ड से खरीदारी करते समय क्रिप्टो का रुपये में कन्वर्ज़न या ट्रांसफ़र टैक्स संबंधी सवाल खड़ा कर सकता है। इसलिए भारतीय यूज़र्स को अपने क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन, कन्वर्ज़न और खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखना चाहिए तथा अपनी टैक्स देनदारी समझने के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

हाँ, रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ऑफ़शोर क्रिप्टो पेमेंट कार्ड्स का इस्तेमाल ATM से भारतीय रुपये में कैश निकालने के लिए भी किया गया है। इन कार्ड्स में मौजूद Stablecoin बैलेंस भुगतान या निकासी के समय स्थानीय मुद्रा में कन्वर्ट हो सकता है। हालांकि, कार्ड की ATM Withdrawal सुविधा और लिमिट संबंधित प्रोवाइडर के नियमों पर निर्भर करती है।

2 November 2026 तक उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, RBI और FIU-IND की जाँच की खबर सामने आई थी, लेकिन किसी आधिकारिक पूर्ण प्रतिबंध या RedotPay के खिलाफ औपचारिक Enforcement Order की घोषणा नहीं हुई थी। कुछ यूज़र्स ने कार्ड सेवाएँ बंद होने की शिकायत की है, लेकिन इसकी वजह स्पष्ट नहीं है। इसलिए जाँच और आधिकारिक प्रतिबंध के बीच अंतर समझना ज़रूरी है।

हाँ, ब्लॉकचेन एनालिटिक्स टूल्स की मदद से क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन और डिजिटल टोकन की ओनरशिप को ट्रैक किया जा सकता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, नियामक संदिग्ध फंड्स की पहचान करने के लिए ब्लॉकचेन डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं। इसलिए ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड इस्तेमाल करने से ट्रांज़ैक्शन पूरी तरह गुमनाम नहीं हो जाते।

ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स की नियामकीय स्थिति को लेकर स्पष्टता आने तक भारतीय यूज़र्स को इनमें बड़ी रकम रखने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। सेवाओं पर रोक लगने की स्थिति में मौजूदा बैलेंस तक पहुँचने या पैसे निकालने में परेशानी हो सकती है। यूज़र्स को सभी ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड रखना चाहिए और किसी भी कार्ड में बड़ी रकम रखने से पहले उसकी शर्तों, कानूनी स्थिति और विड्रॉल सुविधाओं की जाँच करनी चाहिए।

Visa और Mastercard के पेमेंट नेटवर्क पर कई विदेशी फिनटेक कंपनियाँ क्रिप्टो-लिंक्ड प्रीपेड कार्ड जारी करती हैं। इनके ज़रिए यूज़र्स अपने Stablecoin बैलेंस से सामान्य कार्ड पेमेंट कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय नियामक इन कार्ड प्रोग्राम्स के संचालन को समझने के लिए Visa और Mastercard से बातचीत कर रहे थे, लेकिन दोनों नेटवर्क्स की ओर से इसकी सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई थी।

सितंबर 2026 में FIU-IND ने Weex, Blofin, Bitunix और ChangeNow समेत 15 Virtual Digital Asset Service Providers को नॉन-कम्प्लायंस नोटिस जारी किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्लेटफ़ॉर्म्स की वेबसाइट्स और ऐप्स पर पाबंदी लगाने की माँग भी की गई थी। यह कार्रवाई भारत में सेवाएँ देने वाले ऑफ़शोर क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स पर बढ़ती नियामकीय निगरानी को दर्शाती है।

हाँ, रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय यूज़र्स ने ऑफ़शोर क्रिप्टो कार्ड्स के ज़रिए मोबाइल रिचार्ज, ऑनलाइन शॉपिंग और फ़्लाइट टिकट बुकिंग जैसे भुगतान किए हैं। इन कार्ड्स में मौजूद Stablecoins भुगतान के समय भारतीय रुपये में कन्वर्ट हो जाते हैं। हालांकि, भारत में इन सेवाओं की उपलब्धता और नियामकीय स्थिति को लेकर जाँच जारी होने की रिपोर्ट है।