भारत का सबसे चर्चित क्रिप्टो एक्सचेंज WazirX, पिछले एक साल से सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। जुलाई 2024 में हुए $234 मिलियन के WazirX Hack ने न केवल हज़ारों निवेशकों की पूंजी को रोक दिया बल्कि पूरे भारतीय क्रिप्टो सेक्टर पर एक गहरा सवालिया निशान खड़ा कर दिया। महीनों की कानूनी लड़ाई और रिस्ट्रक्चरिंग की कोशिशों के बाद अब तस्वीर थोड़ी साफ होती दिखाइ दे रही है। हाल ही में हुए Revoting Result में 95.7% क्रेडिटर्स ने अमेंडेड रिकवरी प्लान के फेवर में वोट किया है। यह नतीजा WazirX के लिए राहत की बड़ी खबर है, लेकिन अब असली चुनौती सामने है, पहले पेआउट तक का सफर और उसके बाद का ट्रस्ट रिकवरी।

Source – Nischal Shetty की X Post से ली गई है।
Revoting का नतीजा यह साफ कर देता है कि ज्यादातर यूज़र्स ने WazirX को एक और मौका देने का फैसला किया है। लगभग 1.5 लाख क्रेडिटर्स ने वोटिंग में हिस्सा लिया और भारी बहुमत से इस रिकवरी प्लान का समर्थन भी किया। अब सारी नजरें Singapore Court पर हैं, जहां इस प्लान को मंजूरी मिलनी बाकी है। अगर कोर्ट ग्रीन सिग्नल दे देता है तो कंपनी ने साफ किया है कि 10 बिजनेस डेज़ के भीतर पहला पेआउट शुरू कर दिया जाएगा।
लेकिन सवाल यह नहीं है कि पेआउट कब होगा, बल्कि यह है कि क्या यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो पाएगी या फिर नई दिक्कतें खड़ी होंगी।
Revoting का रिजल्ट पॉजिटिव है, लेकिन आगे का रास्ता इतना आसान नहीं है। इसमें कई सारी रूकावटे भी हैं, जिन्हें हम स्टेप बाय स्टेप जानते हैं –
पहली चुनौती – कोर्ट की मंजूरी
भले है क्रेडिटर्स द्वारा WazirX Restructuring Plan को फिर मंज़ूरी मिली है और Singapore Court की मंजूरी टेक्निकली फॉर्मेलिटी नजर आती हो, लेकिन इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। किसी भी क्रेडिटर को अधिकार है कि वह आपत्ति दर्ज करे। यदि किसी बड़े ग्रुप ने विरोध किया तो कोर्ट सुनवाई लंबी खींच सकता है। ऐसे में पहला पेआउट अगले 15–20 दिनों में नहीं बल्कि 2–3 महीने भी खिसक सकता है। इस मामले में निवेशकों की बेचैनी पहले ही काफी बढ़ चुकी है और देरी की स्थिति में गुस्सा और अविश्वास दोनों गहराने की संभावना है।
दूसरी चुनौती – सिक्योरिटी और ट्रस्ट
हैक के बाद WazirX की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी सिक्योरिटी पर सवाल रहा है। क्रेडिटर्स को पैसा मिलना जरूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि वे प्लेटफॉर्म पर दोबारा भरोसा करें। अगर पेआउट के बाद भी कोई नई सिक्योरिटी लीक या टेक्निकल गड़बड़ी सामने आती है, तो यह WazirX के लिए घातक साबित हो सकती है। कंपनी को अब केवल फाइनेंशियल रिकवरी नहीं बल्कि ट्रस्ट रिकवरी प्लान पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
तीसरी चुनौती – ऑपरेशनल तैयारी
पिछले एक साल में WazirX के कई ऑपरेशंस ठप रहे हैं। अब जब एक्सचेंज दोबारा शुरू करने की योजना बना रहा है तो यह देखना होगा कि क्या उसके पास पर्याप्त ऑपरेशनल स्टाफ, टेक्निकल सपोर्ट और कस्टमर सर्विस है या नहीं। हजारों क्रेडिटर्स को पेमेन्ट करना आसान काम नहीं है। छोटा सा डिले या ट्रांजैक्शन फेलियर से सोशल मीडिया पर बड़ा विरोध शुरू हो सकता है।
अगर कोर्ट की मंजूरी बिना किसी बड़ी आपत्ति के मिल जाती है, तो सितंबर के पहले हफ्ते में ही क्रेडिटर्स को पहला पेआउट मिलने की उम्मीद है। लेकिन अबतक जो घटनाक्रम रहा उससे मेरा अंदाज़ा यही कहता है कि यह प्रक्रिया कुछ लंबी खिंच सकती है। क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में बतौर लेखक अपने अनुभव के अनुसार मैं कह सकता हूँ कि, इस तरह की कानूनी और ऑपरेशनल जटिलताओं में अक्सर अप्रत्याशित देरी होती है। इस लिहाज़ से निवेशकों को कम से कम अक्टूबर तक की टाइमलाइन ध्यान में रखनी चाहिए।
हालांकि 95% से ज्यादा क्रेडिटर्स ने रिकवरी प्लान के पक्ष में वोट दिया है, फिर भी असंतुष्ट निवेशकों का एक छोटा वर्ग कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है। यह आपत्ति रिकवरी अमाउंट के प्रतिशत, वितरण के तरीके या पेआउट टाइमलाइन को लेकर हो सकती है। ऐसे केस में Singapore Court सुनवाई करके ही आगे बढ़ेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो जाएगी।
एक क्रिप्टो एनालिस्ट और ऑब्जर्वर के तौर पर मैं यह मानता हूँ कि WazirX इस समय सबसे नाजुक मोड़ पर है। Revoting का रिजल्ट पॉजिटिव है और यह दिखाता है कि लोग अब भी उम्मीद रखे हुए हैं। लेकिन यह समर्थन लंबे समय तक तभी टिकेगा जब कंपनी अगले कुछ हफ्तों में ट्रांसपेरेंसी और एफिशिएंसी दिखा पाए।
मेरे अनुभव के अनुसार, पेआउट तो एक शुरुआत है। अगर WazirX इस मौके को सही तरह से हैंडल नहीं करता, तो यूज़र्स का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है और इसका असर न सिर्फ WazirX बल्कि पूरे भारतीय क्रिप्टो इकोसिस्टम पर पड़ेगा। इसलिए कंपनी को तुरंत सिक्योरिटी ऑडिट, रियल-टाइम अपडेट्स और एक हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं शुरू करनी चाहिए ताकि यूज़र्स को लगे कि उनकी चिंता सुनी जा रही है।
WazirX अब फिनिश लाइन के बेहद करीब है। कोर्ट की मंजूरी मिलते ही 10 बिजनेस डेज़ में पहला पेआउट संभव है, लेकिन रास्ते में कई अड़चनें अभी भी हैं। क्रेडिटर्स की संभावित आपत्तियां, ऑपरेशनल कमियां और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का दबाव, ये सभी फैक्टर तय करेंगे कि आने वाले महीने WazirX के लिए नए विश्वास का दौर शुरू करेंगे या फिर एक और संकट की कहानी लिखेंगे।
अभी के लिए यूज़र्स के पास उम्मीद करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। लेकिन यह तय है कि आने वाले 30-60 दिन WazirX और उसके हजारों निवेशकों के लिए सबसे अहम साबित होंगे।
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