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SHIB Burn Rate, इन बड़े प्रतिशत का असली मतलब क्या होता है

Research Analyst
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SHIB Burn Rate के प्रतिशत और कुल supply की तुलना का चार्ट
SHIB Burn Rate के प्रतिशत और कुल supply की तुलना का चार्ट

इस टोकन से जुड़ी सबसे आम सुर्खी कुछ इस तरह होती है, कि Shiba Inu burn rate में हज़ारों प्रतिशत की बढ़त हुई। ऐसी खबरें बहुत फैलती हैं और उनसे उम्मीद बनती है। SHIB Burn Rate को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह प्रतिशत किस चीज़ पर निकाला जाता है।

क्योंकि जिस दिन यह एक बात समझ आ जाती है, उस दिन इस श्रेणी की लगभग हर सुर्खी अपने आप सही जगह पर आ जाती है।

SHIB Burn Rate, यह होता क्या है

Burn का मतलब है कुछ टोकन ऐसे पते पर भेज देना जहाँ से उन्हें कभी निकाला न जा सके। इससे चलन में मौजूद कुल संख्या घट जाती है, और सिद्धांत यह है कि आपूर्ति घटने से बची हुई इकाइयाँ अपेक्षाकृत कम हो जाती हैं।

यह सिद्धांत अपने आप में गलत नहीं है। पर उसका असर पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि जलाई गई मात्रा कुल संख्या के मुकाबले कितनी है, और यही वह तुलना है जो सुर्खियों में कभी नहीं दिखती।

वे बड़े प्रतिशत कहाँ से आते हैं

यह हिस्सा सबसे ज़रूरी है। वह प्रतिशत कुल आपूर्ति पर नहीं निकाला जाता, बल्कि पिछले दिन जितना बर्न था उस पर निकाला जाता है।

इसका नतीजा यह होता है कि अगर किसी दिन बहुत थोड़ा बर्न और अगले दिन उससे थोड़ा ज़्यादा बर्न हुआ, तो प्रतिशत हज़ारों में पहुँच जाता है, जबकि असल में दोनों संख्याएँ बहुत छोटी हैं। यानी वह आँकड़ा गिरावट या बढ़त नहीं, केवल दो छोटी संख्याओं का अनुपात है। यही कारण है कि ऐसी सुर्खियाँ बार-बार आती हैं और कीमत पर कुछ खास असर नहीं दिखता।

सुर्खी बनाम असली संख्या

सुर्खीजितना जलाकुल supply सेअसली असर
10,731% बढ़तलगभग 17.3 करोड़करीब 0.00003%लगभग शून्य
91,000% उछाल1 अरब से अधिककरीब 0.00017%कीमत लगभग स्थिर रही
2,713% बढ़तलगभग 47.6 लाखनगण्यकोई असर नहीं
380% बढ़तलगभग 48 लाखनगण्यकोई असर नहीं
कुल supply585 लाख करोड़ से अधिकयही असली संदर्भ है

तालिका की दूसरी पंक्ति सबसे ज़्यादा बताती है। इतिहास के सबसे बड़े उछालों में से एक में एक अरब से ज़्यादा टोकन बर्न हुए, और कीमत फिर भी लगभग वहीं रही।

337 साल वाला आँकड़ा

इस पूरे विषय पर एक ही गणना सबसे साफ जवाब देती है। उपलब्ध विश्लेषणों के अनुसार मौजूदा रफ्तार पर कुल आपूर्ति का केवल एक प्रतिशत हटाने में लगभग तीन सौ सैंतीस साल लगेंगे।

इसे उल्टा करके भी देखिए

अगर कोई यह कहे कि रफ्तार बढ़ जाएगी, तो एक और गणना काम आती है। अगर रोज़ एक लाख करोड़ टोकन जलाए जाएँ, जो मौजूदा रफ्तार से कई गुना ज़्यादा है, तब भी कुल आपूर्ति का लगभग एक चौथाई प्रतिशत हटाने में डेढ़ साल से ऊपर लग जाएगा। यह किसी की राय नहीं है, यह केवल भाग है, और इसे कोई भी अपने फोन पर कर सकता है। इसी गणित को इस explainer में सामान्य रूप में भी समझाया गया है।

Shibarium वाली स्वचालित burn अलग क्यों है

संतुलन के लिए यह हिस्सा ज़रूरी है, क्योंकि सब कुछ एक जैसा नहीं है। इस परियोजना के अपने नेटवर्क पर होने वाले हर लेनदेन से कुछ शुल्क बनता है, जिसका एक हिस्सा टोकन जलाने में जाता है।

यह व्यवस्था दो कारणों से बेहतर है। पहला, यह किसी की भावना या किसी अभियान पर निर्भर नहीं है, बल्कि नेटवर्क पर हो रही असली गतिविधि से जुड़ी है। दूसरा, अगर उपयोग बढ़ता है तो जलने की मात्रा अपने आप बढ़ती है। यानी यहाँ सही सवाल burn का नहीं, उपयोग का है। अगर नेटवर्क पर लेनदेन बढ़ रहे हैं तो burn अपने आप अर्थपूर्ण होगी, और अगर नहीं, तो कोई अभियान उसकी भरपाई नहीं कर सकता।

burn का असली असर क्या होता है

दो अलग असर होते हैं और उन्हें मिलाना नहीं चाहिए। पहला, आपूर्ति पर असर, जो ऊपर के आँकड़ों से साफ है कि इस पैमाने पर लगभग नगण्य है।

दूसरा, भावना पर असर, जो असली होता है। ऐसी खबरें आने पर कुछ लोग खरीदते हैं, और इस श्रेणी में कीमत अक्सर भावना से चलती है, बुनियाद से नहीं। यानी burn की खबर से कीमत हिल सकती है, पर वह हलचल आपूर्ति घटने से नहीं आती, ध्यान बढ़ने से आती है। यह अंतर जान लेने पर यह भी समझ आ जाता है कि वह हलचल टिकाऊ क्यों नहीं होती, जिसका पूरा तंत्र memecoin पेज पर है।

एक बड़ी burn जो पहले ही हो चुकी है

इस टोकन के इतिहास में एक बात अलग से जानने लायक है। अब तक जितने टोकन जलाए जा चुके हैं, उनका बहुत बड़ा हिस्सा एक ही घटना से आया, जो लगभग पाँच साल पहले हुई थी।

उसके बाद से कुल जली हुई मात्रा में बहुत ज़्यादा बढ़त नहीं हुई। इसका मतलब यह है कि जब कोई यह कहे कि इतने लाख करोड़ टोकन जल चुके हैं, तो वह आँकड़ा सही होते हुए भी भ्रामक हो सकता है, क्योंकि वह मुख्य रूप से एक पुरानी घटना का है, चल रही गतिविधि का नहीं। इसलिए कुल जली मात्रा और मौजूदा रफ्तार, दोनों अलग-अलग देखनी चाहिए।

किसी भी टोकन पर यही जाँच कैसे लगाएँ

यह जाँच किसी एक टोकन तक सीमित नहीं है और तीन कदमों की है। पहला, जब भी burn की खबर दिखे, प्रतिशत छोड़कर असली संख्या खोजिए, यानी कितने टोकन जले।

दूसरा, उस संख्या को कुल आपूर्ति से भाग दीजिए, जो किसी भी डेटा प्लेटफॉर्म पर मिल जाती है। तीसरा, उसी दर पर एक साल का अनुमान लगाइए, यानी अगर यही रफ्तार रही तो साल भर में कितना प्रतिशत हटेगा। इन तीन कदमों के बाद कोई भी burn संबंधी सुर्खी अपने आप अपनी सही जगह पर आ जाती है। बुनियादी समझ यहाँ, बाज़ार के आँकड़े पढ़ने का तरीका इस पेज पर, meme श्रेणी की भारत-विशिष्ट तस्वीर इस गाइड में, कर की स्थिति यहाँ और समग्र परिदृश्य India हब पर है।

यह समस्या इस टोकन तक सीमित नहीं है

यह गणित उन सभी टोकनों पर लागू होता है जिनकी कुल संख्या बहुत बड़ी है, और ऐसे टोकन बहुत हैं। जब आपूर्ति लाख करोड़ में हो, तो कोई भी burn अभियान उसके सामने छोटा ही पड़ेगा, चाहे वह कितना भी बड़ा लगे।

इसीलिए ऐसे टोकनों के साथ अक्सर एक ही तरह की सामग्री बनती है, जिसमें burn की खबरें बार-बार आती हैं और हर बार उम्मीद बनती है। इसका मतलब यह नहीं कि burn करने वाले लोग कुछ गलत कर रहे हैं, वे अपनी परियोजना के लिए काम कर रहे हैं। मतलब केवल यह है कि पाठक को उस खबर से जो निष्कर्ष निकालने को कहा जा रहा है, वह संख्या से नहीं निकलता। और यही फर्क पहचानना इस पूरे विषय का असली कौशल है।

Glossary

Burn
टोकन को ऐसे पते पर भेजना जहाँ से वे कभी निकाले न जा सकें।
Burn Rate
एक तय अवधि में जलाए गए टोकन की मात्रा, जिसका प्रतिशत अक्सर पिछली अवधि पर निकाला जाता है।
Circulating Supply
चलन में मौजूद कुल टोकन, जो किसी भी burn की तुलना का असली आधार है।
Automatic Burn
नेटवर्क पर होने वाले लेनदेन से अपने आप होने वाली burn।
Base Effect
छोटी संख्या पर बड़ा प्रतिशत बनने की स्थिति।

एक अच्छा सवाल जो burn से बेहतर है

अगर किसी परियोजना को परखना हो तो burn से कहीं ज़्यादा उपयोगी एक दूसरा सवाल है, कि उसके नेटवर्क पर हो क्या रहा है। यानी कितने लेनदेन हैं, कितने लोग उसे वाकई इस्तेमाल कर रहे हैं, और वह उपयोग बढ़ रहा है या घट रहा है।

इसका कारण सीधा है। burn एक नतीजा है, कारण नहीं। जहाँ उपयोग बढ़ता है वहाँ शुल्क बनता है और burn अपने आप होती है। जहाँ उपयोग नहीं है, वहाँ burn एक अलग गतिविधि बन जाती है जिसका बाकी सब से कोई संबंध नहीं रहता। इसीलिए किसी भी परियोजना पर समय देते हुए पहले उपयोग के आँकड़े देखिए, और burn को उसी का एक उपोत्पाद मानिए, अलग खबर नहीं।

निष्कर्ष

इस पूरे विषय का सार एक वाक्य में है। वे बड़े प्रतिशत कुल आपूर्ति पर नहीं, पिछले दिन की संख्या पर निकाले जाते हैं, इसलिए वे बड़े दिखते हैं और छोटे होते हैं। इसलिए SHIB Burn Rate से जुड़ी कोई भी खबर पढ़ते समय प्रतिशत छोड़िए और वह भाग कीजिए जो सुर्खी में कभी नहीं होता, कि यह संख्या कुल आपूर्ति का कितना हिस्सा है।

अस्वीकरण

यह लेख शैक्षिक उद्देश्य से है और किसी टोकन की सिफारिश या आलोचना नहीं करता। यहाँ दिए आँकड़े सार्वजनिक on-chain डेटा और विश्लेषणों पर आधारित हैं और बदलते रहते हैं। इस श्रेणी में पूँजी के नुकसान का जोखिम रहता है।

लेखक परिचय
Niharika Singh Research Analyst

Niharika Singh एक अनुभवी क्रिप्टो और ब्लॉकचेन जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में CryptoHindiNews.in से जुड़ी हुई हैं। उन्हें मीडिया और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5 से अधिक वर्षों का अनुभव है, जिसमें उन्होंने दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे देश के प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स पर एंकर और कंटेंट प्रेजेंटर के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इस व्यापक अनुभव ने उन्हें जटिल से जटिल विषयों को भी सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करने की गहरी समझ प्रदान की है।

क्रिप्टो इंडस्ट्री में निहारिका ने खुद को एक विश्वसनीय लेखक के रूप में स्थापित किया है। वे Web3, DeFi, NFTs और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी जैसे तकनीकी विषयों को आम पाठकों की भाषा में सहजता से पहुंचाती हैं। उनकी लेखन शैली में SEO ऑप्टिमाइज़ेशन, रिसर्च-बेस्ड एनालिसिस और क्रिएटिव अप्रोच का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है, जिसके चलते उनका कंटेंट न केवल सूचनाप्रद और प्रासंगिक होता है, बल्कि Google Discover सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी शानदार प्रदर्शन करता है। निहारिका से LinkedIn के माध्यम से सीधे संपर्क किया जा सकता है।

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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

कुछ टोकन ऐसे पते पर भेज देना जहाँ से उन्हें कभी निकाला न जा सके, जिससे चलन में मौजूद कुल संख्या घट जाती है।

सिद्धांत रूप में आपूर्ति घटने से बची इकाइयाँ दुर्लभ होती हैं, पर असर पूरी तरह इस पर निर्भर है कि जलाई गई मात्रा कुल संख्या के मुकाबले कितनी है।

वह प्रतिशत कुल आपूर्ति पर नहीं, बल्कि पिछले दिन जितना जला था उस पर निकाला जाता है। इसलिए दो छोटी संख्याओं का अनुपात भी हज़ारों में पहुँच जाता है।

एक दिन burn rate में करीब दस हज़ार सात सौ प्रतिशत की बढ़त की खबर आई थी। उसमें लगभग सत्रह करोड़ टोकन जले, जो कुल आपूर्ति का लगभग तीन लाखवाँ हिस्सा है।

पाँच सौ पचासी लाख करोड़ से अधिक। यही वह संख्या है जिससे तुलना करनी चाहिए, और यही सुर्खियों में कभी नहीं दिखती।

एक बार लगभग इक्यानबे हज़ार प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई थी जिसमें एक अरब से ज़्यादा टोकन जले, और कीमत फिर भी लगभग वहीं रही।

उपलब्ध विश्लेषणों के अनुसार मौजूदा रफ्तार पर लगभग तीन सौ सैंतीस साल।

अगर रोज़ एक लाख करोड़ टोकन जलाए जाएँ, जो मौजूदा रफ्तार से कई गुना है, तब भी कुल का लगभग एक चौथाई प्रतिशत हटाने में डेढ़ साल से ऊपर लगेगा।

नहीं। इस परियोजना के अपने नेटवर्क पर होने वाले लेनदेन से अपने आप कुछ टोकन जलते हैं, और वह व्यवस्था अलग है।

क्योंकि वह किसी अभियान या भावना पर नहीं, नेटवर्क पर हो रही असली गतिविधि पर निर्भर है, और उपयोग बढ़ने पर अपने आप बढ़ती है।

burn का नहीं, उपयोग का। अगर नेटवर्क पर लेनदेन बढ़ रहे हैं तो burn अपने आप अर्थपूर्ण होगी, और अगर नहीं, तो कोई अभियान उसकी भरपाई नहीं कर सकता।

क्योंकि दो अलग असर होते हैं। आपूर्ति पर असर इस पैमाने पर नगण्य है, पर भावना पर असर असली होता है, और इस श्रेणी में कीमत अक्सर भावना से चलती है।

क्योंकि वह आपूर्ति घटने से नहीं, ध्यान बढ़ने से आती है, और ध्यान कुछ ही दिनों में हट सकता है।

तीन कदम, प्रतिशत छोड़कर असली संख्या खोजिए, उसे कुल आपूर्ति से भाग दीजिए, और उसी दर पर एक साल का अनुमान लगाइए।

वे बड़े प्रतिशत कुल आपूर्ति पर नहीं, पिछले दिन की संख्या पर निकाले जाते हैं। इसलिए वे बड़े दिखते हैं और छोटे होते हैं।