भारत के फिनटेक और इन्वेस्टमेंट सेक्टर Nikhil Kamath (Zerodha के co-founder) के stablecoin और डिजिटल एसेट्स राय को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। 11 मई 2026 को उनके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत को Dollar-Backed Stablecoins जैसे Tether (USDT) और USD Coin (USDC) से दूर रहना चाहिए और इसके बजाय Gold-Backed Stablecoin जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहले से ही डिजिटल रुपया (CBDC) और Crypto Regulation को लेकर सतर्क हो गया है।
Source: Crypto India x Account
Nikhil Kamath ने Dollar-Backed Stablecoins को लेकर भारत के लिए संभावित रणनीतिक रिस्क की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि ऐसे डिजिटल एसेट्स, जैसे Tether (USDT) और USD Coin (USDC), ग्लोबल लेवल पर अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को और मजबूत कर सकते हैं, जिससे भारत की Monetary और Financial Sovereignty पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में National Payments Corporation of India द्वारा विकसित UPI जैसी Digital Payment System के माध्यम से एक मजबूत और आत्मनिर्भर वित्तीय ढांचा तैयार किया है। ऐसे में अगर डिजिटल ट्रांजैक्शंस धीरे-धीरे Dollar-based Stable Digital Assets पर निर्भर होने लगें, तो यह भारत की आर्थिक स्वतंत्रता और नीति-निर्माण क्षमता के लिए चुनौती बन सकता है।
चेतावनी देते हुए Nikhil Kamath ने यह कहा कि भारत सरकार और रेगुलेटर्स का निजी क्रिप्टोकरेंसी के प्रति सतर्क रुख सही दिशा में उठाया गया कदम है, क्योंकि यह वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और नियंत्रण को बनाए रखने में मदद करता है।
Nikhil Kamath ने अपने सुझाव में एक वैकल्पिक वित्तीय मॉडल के रूप में Gold-Backed Stablecoin पर अपने विचार को लोगों के सामने रखा है। उनका कहना है कि भारत में बड़ी मात्रा में सोना घरेलू स्तर पर निष्क्रिय (idle) पड़ा हुआ है, जिसे डिजिटल रूप से Tokenize करके उपयोग में लाया जा सकता है।
विभिन्न अनुमानों के अनुसार, भारतीय घरों में लगभग 25,000 से 34,600 टन सोना मौजूद है, जिसकी टोटल लगभग $3.8 ट्रिलियन तक आंकी जाती है। यह सोना वर्तमान में आर्थिक प्रणाली में सक्रिय रूप से योगदान नहीं देता, लेकिन टोकनाइजेशन के माध्यम से इसे एक Productive Financial Asset में बदला जा सकता है।
Nikhil Kamath के अनुसार, यदि इस सोने को Gold-Backed Stablecoin के रूप में ढांचा दिया जाए, तो इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ सकती है और इन्वेस्टर्स को अपने गोल्ड होल्डिंग्स पर संभावित रिटर्न भी मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सोने के प्रति सांस्कृतिक झुकाव इस तरह के मॉडल को अधिक स्वीकार्य बना सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक शुरुआती और Exploratory विचार है, न कि कोई Formal Policy Proposal या फाइनल मॉडल।
भारत का मौजूदा रेगुलेटरी रुख डिजिटल एसेट्स के प्रति काफी सतर्क हो गया है। सरकार Digital Rupee (CBDC) को लगातार मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जबकि निजी Cryptocurrency और Stable coins को लेकर सख्त नीति अपनाई जा रही है।
इस संदर्भ में Gold-Backed Stablecoin जैसे प्रस्तावों के सामने कई व्यावहारिक और नियामकीय चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। इनमें सबसे अहम मुद्दा सोने की सुरक्षित कस्टडी (secure custody), Transparent Auditing और टोकनाइजेशन के लिए मजबूत Technical Frameworks की उपलब्धता है।
साथ ही, भारत में पहले से ही सोने से जुड़े कई Regulated Investment Options मौजूद हैं, जैसे Gold ETFs और Sovereign Gold Bond। ये साधन निवेशकों को सोने में सुरक्षित इन्वेस्टमेंट की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे नए मॉडल को अपनाने से पहले इनके साथ तुलना जरूरी हो जाती है।
Gold-Backed Stablecoin का उदाहरण ऐसा डिजिटल टोकन हो सकता है जो 1 ग्राम सोने के बराबर हो और ब्लॉकचेन पर ट्रांसफर किया जा सके, जैसे भुगतान में इस्तेमाल हो। इससे लोग डिजिटल रूप में सोना खरीद-बेच और भेज सकें।
कुल मिलाकर Nikhil Kamath का यह विचार भारत में डिजिटल फाइनेंस की दिशा को लेकर नई बहस छेड़ता है। जिससे सवाल उठता है कि क्या भारत को Dollar-Based Digital System पर निर्भर रहना चाहिए या अपने विशाल सोने के भंडार का उपयोग करके Gold-backed stablecoin जैसे नए मॉडल की ओर बढ़ना चाहिए। यह अभी शुरुआती विचार है, लेकिन इससे fintech और policy क्षेत्र में गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
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