Digital Rupee यानी e₹, RBI द्वारा जारी Digital Currency है, जबकि UPI केवल Bank Accounts के बीच Payment Transfer System है। भारत में Digital Payment System तेज़ी से बदल रहा है और अब Reserve Bank of India का Digital Rupee इस बदलाव का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
e₹ भारत की Central Bank Digital Currency (CBDC) है, जिसे RBI सीधे जारी करती है, जिसे कानूनी मान्यता भी प्राप्त है। RBI Annual Report 2024-25 के अनुसार, RBI ने Retail Digital Rupee Pilot का दायरा बढ़ाते हुए Offline Payment और Programmability जैसे नए फीचर्स पर काम तेज़ कर दिया है।
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RBI अब e₹ को ऐसे क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी में है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहती है। इसके लिए Offline Digital Currency फीचर टेस्ट किया जा रहा है, जो NFC और Proximity Technology की मदद से बिना इंटरनेट के भी पेमेंट करने की सुविधा देगा। यह ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज इलाकों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
इसके साथ ही Programmability फीचर भी जोड़ा जा रहा है। इसका मतलब है कि Digital Rupee के उपयोग पर विशेष शर्तें लगाई जा सकेंगी। उदाहरण के लिए सरकार किसी सब्सिडी या DBT (Direct Benefit Transfer) राशि को सिर्फ जरूरी सामान खरीदने या किसी खास क्षेत्र में उपयोग करने के लिए सीमित कर सकती है। कंपनियां भी कर्मचारियों को मिलने वाले ट्रैवल या फूड अलाउंस को तय श्रेणी में खर्च करने की सुविधा दे सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं और कॉर्पोरेट पेमेंट सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
RBI की मई 2025 की Annual Report के अनुसार अब तक 17 बैंक और लगभग 60 लाख यूज़र्स CBDC Retail Pilot से जुड़ चुके हैं। e₹ का टोटल सर्कुलेशन ₹234 करोड़ से बढ़कर ₹1,015 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके अलावा 88,000 महिलाओं को वेलफेयर बेनिफिट भी Digital Rupee के माध्यम से दिए गए हैं।
Digital Rupee Wallet का एक बड़ा फायदा यह है कि, अगर मोबाइल खो जाए तो उसी Number और SIM से नए Device पर Wallet दोबारा Activate किया जा सकता है। हालांकि e₹ पर कोई ब्याज नहीं मिलता क्योंकि यह Bank Deposit नहीं है।
सावधानी: Wallet Provider की शर्तें ध्यान से पढ़ें और RBI के Official Updates पर नज़र रखें।
यूज़र्स इसे CBDC Wallet में रख सकते हैं और QR Code स्कैन करके पेमेंट भी कर सकते हैं। इसकी मदद से P2P और Person-to-Merchant (P2M) दोनों तरह के ट्रांज़ैक्शन किए जा सकते हैं। खास बात यह है कि फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट में ट्रांज़ैक्शन पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जा रहा और पेमेंट 24×7 किए जा सकते हैं।
RBI ने Digital Currency यानी Digital Rupee (e₹) को टेस्ट करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका मकसद यह देखना था कि Digital Rupee सुरक्षित और आसान तरीके से कैसे काम करेगा।
इसकी शुरुआत 1 नवंबर 2022 को Wholesale Segment (e₹-W) से हुई थी। इसमें बैंकों के बीच सरकारी बॉन्ड और सिक्योरिटीज़ की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल रुपये का इस्तेमाल किया गया। इससे RBI ने यह जांचा कि बड़े लेनदेन पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और कम खर्चीले हो सकते हैं या नहीं।
कुल मिलाकर, RBI का Digital Rupee यानी e₹ भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को नई दिशा देने की तैयारी में है। Offline Payment और Programmability जैसे फीचर्स इसे गांवों और सरकारी योजनाओं के लिए बेहद उपयोगी बना सकते हैं। हालांकि यह अभी Pilot Phase में है, लेकिन आने वाले समय में e₹ देश की Digital Economy का अहम हिस्सा बन सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय निवेश या कानूनी सलाह नहीं है। Digital Rupee (e₹) से जुड़े सभी नियम, फीचर्स और Pilot Program की शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी निर्णय से पहले RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ताज़ा जानकारी ज़रूर लें। CryptoHindiNews.in इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं है।
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